ये भयावह दौर:मौत की ये संख्या डरावनी, अप्रैल के 28 दिनों में ही मेडिकल कॉलेज से 250 शव बाहर आए

विदिशा6 महीने पहले
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बाइपास भोर घाट के श्मशान पर शहर के युवा अंतिम संस्कार में मदद कर रहे हैं। - Dainik Bhaskar
बाइपास भोर घाट के श्मशान पर शहर के युवा अंतिम संस्कार में मदद कर रहे हैं।
  • मुक्तिधाम में बुधवार को 15 अंतिम संस्कार हुए, 11 शव मेडिकल कॉलेज से बाहर आए

कोरोनाकाल का यह सबसे भयावह दौर है

अब चूक की कोई गुंजाइश नहीं बची। विदिशा के अटलबिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज से बुधवार को 11 शव बाहर आए। अप्रैल के 28 दिनों में ही मेडिकल कॉलेज से 250 शव बाहर आ चुके हैं। मौत की ये संख्या डरावनी है। इसके अलावा बेतवा तट स्थित मुक्तिधाम और भोर घाट पर चिताएं ठंडी नहीं हो पा रही हैं।

अप्रैल के पहले ऐसा बहुत कम होता था कि इतने संस्कार एक साथ हो रहे हों। बुधवार को 14 सामान्य अंतिम संस्कार और एक संक्रमित का अंतिम संस्कार किया गया। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज से कोरोना संक्रमित के कुल 11 शव बाहर निकाले गए थे, जिसमें दो को गंजबासौदा भेजा गया था और 8 के अंतिम संस्कार भोर घाट के अस्थाई शवदाह स्थल पर किया गया।

प्रशासन कर रहा ईंधन का इंजताम

अंतिम संस्कार के लिए पहले सिर्फ बेतवा तट के मुक्तिधाम पर ही इंतजाम थे। अब प्रशासन ने रंगई के पास भोर घाट पर अस्थाई शवदाह बनवा दिए। प्रशासन अंतिम संस्कार के लिए लगातार लकड़ी और कंडे का इंतजाम कर रहा है।

लोगों का जीवन अनमोल है, आंकड़े बाजी से बात नहीं बनेगी: कानूनगो

विदिशा में हो रही मौतों पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने भी सवाल उठाए हैं। श्री कानूनगो का कहना है कि विदिशा में सामान्य मृत्यु का बढ़ता आंकड़ा निश्चित ही एक भुलावा, एक गलती है। शुतुरमुर्ग की तरह गर्दन रेत में गड़ा लेने से परिस्थिति नहीं बदल जाएगी। टेस्टिंग, कांटेक्ट ट्रेसिंग एवं ट्रैकिंग करना जरूरी है। फीवर क्लीनिक और आइसोलेशन की सुविधा बढ़ाना ही एक मात्र हल है। उनका कहना है कि प्रधान मंत्री के निर्देशन में मुख्यमंत्री जितनी ताक़त से लड़ाई लड़ रहे हैं, उतनी क्षमता अमले को दिखानी होगी। लोगों का जीवन अनमोल है और आंकड़ेबाजी से बात बनेगी नहीं।

37 मरीज भर्ती , 28 हुए डिस्चार्ज
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील नंदेश्वर ने बताया कि हम मरीजों की जानकारी सुबह 8 बजे से दूसरे दिन के सुबह 8 बजे तक जुटाते हैं। बुधवार सुबह 8 बजे तक 37 मरीज भर्ती हुए थे और 28 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया। वहीं मेडिकल कॉलेज में कितनी मौतें हो रही हैं ये जानकारी अभी एकत्रित नहीं की है। हालांकि यह बात सही है कि इस महीने ज्यादा मौतें हुई हैं।

अंतिम संस्कार में युवा कर रहे मदद
बेतवा के भोर घाट पर कोविड संक्रमित मरीजों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। अंतिम संस्कार के काम के लिए संजय प्रजापति, कुलदीप शर्मा, ध्रुव चतुर्वेदी, सुरेंद्र कुशवाह, गिरीश सोनी मदद कर रहे हैं।

सामान्य मौतों के अंतिम संस्कार की संख्या बढ़ना चिंता का विषय
प्रतिदिन मुक्तिधाम में सामान्य मौतों के अंतिम संस्कार की संख्या बढ़ रही है जो चिंता का विषय है। मुक्तिधाम सेवा समिति के सचिव मनोज पांडे का कहना है कि मुक्तिधाम जैसा सार्वजनिक स्थल एवं शहर फिर से संक्रमित न हो इस चिंता को लेकर कलेक्टर डॉ पंकज जैन से बात हुई है। उन्होंने बताया कि जो होम आइसोलेशन में रहते हैं, उनको हम मेडिकल कॉलेज से कोरोना संक्रमित की तरह ही मानते हैं, जबकि कई संक्रमित लोगों की मौत घर पर ही हो जाती है। कई बार प्रशासन को इसकी जानकारी परिजन संबंधित अधिकारियों को नहीं देते। इससे संक्रमण बढ़ सकता है।

संदिग्ध और संक्रमित मरीज की जानकारी प्रशासन को दें
एसडीएम गोपालसिंह वर्मा का कहना है कि कोरोना संक्रमित मरीज की मौत घर पर होती है तो इसकी जानकारी प्रशासन को दी जाए। लोग यह जानकारी नायब तहसीलदार प्रमोद उइके के मोबाइल नंबर 9893346959 पर दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमित मरीज की मौत आइसोलेशन में होती है तो अंतिम संस्कार कोरोना गाइडलाइन के अनुसार ही किया जाता है।

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