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  • With Her Husband Grooming The Future Of The Children, Rekha Bai Also Held A Hammer In Her Hands, The Only Woman Among 5000 Laborers To Carve The Stones.

प्रेरणा:बच्चों का भविष्य संवारने पति के साथ रेखाबाई ने भी हाथों में थामा हथौड़ा, 5000 मजदूरों में अकेली महिला जो पत्थरों को तराश रहीं

विदिशा10 महीने पहले
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  • 20 साल पहले गांव छोड़ शहर में बसा परिवार, पति की कमाई कम पड़ने लगी तो निभा रहीं साथ, दोनों ही अनपढ़

अपनी ही तरह बच्चे अनपढ़ रहकर मजदूरी के लिए दर-दर की ठोकर खाने मजबूर ना हो और स्वाभिमान के साथ जीवन जी सकें। इसलिए रेखाबाई ने घर का चूल्हा चौका छोड़कर हाथ में हथौड़ा थाम लिया। वह पिछले बीस साल से पत्थरों को तराश कर अपने बच्चों को पढ़ा रही है।
रेखाबाई के दो बेटी और दो बेटे हैं। बच्चों की खातिर उसने 20 साल पहले गांव छोड़ दिया था और शहर में आकर पति के साथ रहने लगी। जब पति की कमाई भी परिवार और बच्चों के लिए कम पड़ने लगी तो उसने घर का चौका चूल्हा छोड़कर पति के साथ काम करने निकल पड़ी। पूरे विकासखंड में एक मात्र महिला है जो पत्थर पीठों पर तराशने की काम कर रही है।
डर था बच्चों की पढ़ाई छूट जाएगी तो वे भी अनपढ़ न रह जाए
रेखाबाई (39) और उसका पति अनपढ़ है। उसका विवाह ग्राम घटेरा के गरीब परिवार के पप्पू रैयकवार (42) के साथ हुआ था। वह मेहनत मजदूरी करता था। गांव में कभी मजदूरी मिलती थी कभी नहीं। इससे परिवार के लिए खर्च भी पूरा नहीं होता था। बच्चे भी बड़े होने लगे थे। दोनों ने गांव छोड़ दिया और शहर आ गए। पति पत्थरों के पीठों पर मजदूरी करने लगा। बच्चे स्कूल जाने लगे। मकान किराया और शहर का खर्च के कारण पति की कमाई भी कम पड़ने लगी तो उसे चिंता सताने लगी कि कहीं बच्चों की पढ़ाई न बंद हो जाए। उनको हमारी तरह भटकना न पड़े तो रेखा ने भी पति के साथ काम करने का फैसला कर लिया। पति से पत्थर तराशना सीख गई।

अब दोनों मिलकर प्रतिदिन 1000 रुपए कमा लेते हैं

दोनों दिन भर में पांच सौ स्क्वायर फीट फीट से ज्यादा पत्थर बना लेते हैं। प्रति स्क्वायर फीट दो रुपए मजदूरी मिलती है। दिन भर में एक हजार रुपए कमा लेते है। खास बात यह है पत्थर तरासने का काम सिर्फ पुरुष ही करते हैं, महिलाएं नहीं। पत्थर को उठाने, बनाना और पलटने में काफी मेहनत और ताकत की जरूरत होती है। विकासखंड में पांच हजार से ज्यादा पत्थर का काम करने वाले अकुशल श्रमिक है। लेकिन उनमें एक मात्र यही महिला है। किसी योजना का लाभ नहीं: पप्पू रैकवार का कहना है वह बीस साल से नगर में रह रहा है। उसे अभी तक किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला। वर्तमान में भी किराए के मकान में पत्नी व बच्चों के साथ रहता है। कई बार योजनाओं के लाभ के लिए प्रयास किया।लेकिन जब सारे प्रयास विफल हो गए। उसके बाद प्रयास करना भी छोड़ दिया।

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