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लापरवाही:बाजार में फिर पॉलिथीन का खुलेआम उपयोग कार्रवाई नहीं, नाले और नालियां हो रही चोक

विजयपुर2 महीने पहले
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कोरोना संक्रमण में लॉकडाउन की वजह से कार्रवाई बंद होते ही शहर सहित अंचल में पॉलिथीन का उपयोग बढ़ने लगा है। ठेला, फल विक्रेता, सब्जी विक्रेता, दूध डेयरी, किराना दुकानों पर पॉलिथीन का उपयोग जमकर किया जा रहा है। तीन महीनों से कार्रवाई न होने से दुकानदारों में अब कार्रवाई का खौफ तक नहीं बचा है। वहीं प्लास्टिक थैली नालियों में जाने की वजह से नाले-नालियां तक चोेक होकर बारिश के सीजन में उफान पर आ रहे हैं, लेकिन जिम्मेेदार अधिकारियों ने अब तक इस समस्या पर ध्यान ही नहीं दिया है। उधर अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही अभियान चलाकर पॉलिथीन का उपयोग करने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई की जाएगी।

शासन द्वारा पूरे प्रदेश में अमानक प्लास्टिक थैलियों पर 2 अक्टूबर 2019 से प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद भी नगर में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है और न ही जिम्मेदार अधिकारी उसका पालन कराने के लिए सजग दिख रहे हैं, जबकि लॉकडाउन से पहले दुकानदारों ने 60 प्रतिशत तक पॉलिथीन का उपयोग बंद कर दिया था। इसकी जगह कपड़े के थैले का उपयोग दुकानदार करने लगे थे। तत्कालीन कलेक्टर बसंत कुर्रे और प्रतिभा पाल ने भी यहां सख्ती के साथ अभियान शुरू करते हुए लगातार पॉलिथीन का उपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की।

दुकानदारों को समझाइश देंगे

जो दुकानदार प्लास्टिक थैलियों का उपयोग कर रहे हैं उन्हें पंचायत द्वारा समझाइश दी जाएगी। यदि फिर भी कोई दुकानदार प्लास्टिक थैलियों का उपयोग करते मिला तो उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। जसवंत रावत, पंचायत सचिव, रघुनाथपुर

जीव-जंतुओं के लिए हानिकारक है अमानक पाॅलिथीन

अमानक पाॅलिथीन के उपयोग न करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा कई नियम बनाए गए हैं। भारत सरकार के ठोस अपशिष्ट निवारण अधिनियम के तहत 40 माइक्रॉन से कम के मानक की थैली पर्यावरण को प्रदूषित करती है। जानकारों का कहना है कि इस पॉलीथीन को रिसाइकल नहीं किया जा सकता है। जिससे यह प्रदूषण का कारण बनती है। सबसे ज्यादा नुकसान आवारा मवेशियों और जीव-जंतुओं को उठाना पड़ता है। पॉलीथिन में खाद्य सामाग्री ले जाने के बाद उसे सड़कों पर फेंक दिया जाता है। जिस वजह से उसे आवारा मवेशी खा लेते हैं। जो कि नुकसानदायक होता है।

सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से चलाए अभियान

केंद्र सरकार ने पॉलिथीन के दुष्परिणाम को देखते हुए 02अक्टूदबर 2019 से इसके उपयोग पर रोक लगाई थी। जिला प्रशासन को समय-समय पर निर्देश जारी किए गए। सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से नपा और नप में कई बार पॉलिथीन उपयोग के खिलाफ अभियान चलाकर जनजागरण कर चुकी है। दुकानदारों को पॉलीथिन के उपयोग न करने की चेतावनी भी दी जा चुकी है।

इसके बाद पॉलिथीन के उपयोग पर कोई अंकुश नहीं लगाया जा सका है। लगातार बढ़ रहा प्लास्टिक थैली का उपयोग गली-गली में दिखाई दे रहा है। बाजार में अमानक स्तर के पॉलिथीन की भरमार है। छोटे से लेकर बड़े व्यापारी तक इन पॉलिथीन का उपयोग कर रहे हैं। शहर और गांवों में कई बड़े सामाजिक संगठन पॉलीथीन के उपयोग को कम करने के लिए जन जागरण अभियान चला चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के अभाव में इनका उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है।

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