खेती-किसानी:इस साल किसानों को 310 रु. प्रति टन बढ़कर मिल रहा भाव, बड़ी राहत

नेपानगर2 महीने पहले
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क्षेत्र के गन्ना उत्पादक किसानों को इस साल पिछली बार की तुलना में गन्ने के दाम प्रति टन 310 रुपए बढ़कर मिल रहे हैं। इससे किसानों को बड़ी राहत मिली है। क्षेत्र में अंबाड़ा, सारोला, उमरदा, टिटगांव, सीवल, डाभियाखेड़ा और नावरा सहित अन्य गांवों में बड़ी संख्या में किसान गन्ना फसल लगाते हैं। इन दिनों गन्ना कटाई जारी है। अधिकांश किसानों का गन्ना नवलनगर झिरी स्थित सहकारी शकर कारखाना में पहले ही आरक्षित हो जाता है। इसके किसानों को अच्छे दाम भी मिलते हैं। पिछले साल गन्ने के दाम 3150 रुपए प्रति टन मिले थे। वहीं इस बार किसानों की मांग और महंगाई को देखते हुए नवंबर से प्रति टन 3460 रुपए भाव दिया जा रहा है। कारखाने में पिराई सत्र की शुरुआत भी हो चुकी है।

एक हेक्टेयर में होता है 60 टन उत्पादन
किसानों के अनुसार जिले में 4500 हेक्टेयर में गन्ना फसल की बोवनी पिराई सत्र 2021-22 में की गई थी। एक हेक्टेयर में करीब 60 टन गन्ने का उत्पादन होता है। पिछले साल 3127-3150 रुपए प्रति टन के हिसाब से भाव मिला था। अंबाड़ा के किसान गोपाल अप्पा, सुरेंद्र आसखड़के, प्रमोद पाटिल और हनुमंतखेड़ा के किसान सचिन पाटिल ने बताया गन्ने की काफी अच्छी फसल क्षेत्र में होती है। शकर कारखाने में करीब 4 लाख क्विंटल शकर उत्पादन का लक्ष्य हर साल रहता है। इस बार भी यही लक्ष्य है। इसके लिए अधिकांश किसानों का गन्ना पहले से ही बुक हो जाता है।

महंगाई को देखते हुए किसानों ने की थी दाम बढ़ाने की मांग
बढ़ती महंगाई को देखते हुए क्षेत्र के किसान लंबे समय से मांग कर रहे थे कि गन्ने के दाम बढ़ाए जाना चाहिए। लेकिन यह मांग पूरी नहीं हो रही थी। अब दाम 310 रुपए प्रति टन बढ़ाए गए हैं। इससे किसानों में खुशी है। किसान गन्ना कटाई में जुटे हैं। जिले में करीब 5 हजार हेक्टेयर में गन्ना लगाया जाता है। इस साल अब तक करीब 3 हजार हेक्टेयर में गन्ना लगाया जा चुका है। खास बात यह है कि गन्ना उत्पादक जिलों में प्रदेश के नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, बैतूल, दतिया के साथ ही बुरहानपुर जिले का भी नाम है। वर्तमान में कुल गन्ना उत्पादन का लगभग 20 प्रतिशत रकबा बुरहानपुर जिले में है।

इसलिए किसान लगाते हैं गन्ना, क्योंकि यह सुरक्षित व लाभकारी होती है

  • अधिकांश किसान गन्ना इसलिए लगाते हैं, क्योंकि यह एक व्यावसायिक फसल है। विषम परिस्थितियों में भी यह फस्ल प्रभावित नहीं होती है। इन्हीं कारणों से गन्ने की खेती सुरक्षित और लाभ की होती है।
  • गन्ने के साथ ही अधिकांश किसान अंतरवर्तीय फसल भी लगाते हैं। हालांकि ऐसे किसानों की संख्या काफी कम है। लेकिन कृषि विभाग के अनुसार अंतरवर्तीय फसल लगाकर 3-4 महीने में ही प्रारंभिक लागत प्राप्त की जा सकती है। गन्ने की किसी भी अन्य फसल से प्रतिस्पर्धा नहीं है। किसानों को अधिक से अधिक गन्ना लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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