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बुद्ध पूर्णिमा आज:गांव में जनसहयोग से बन रहा है बौद्ध स्मारक, हर दिन ग्रामीण करते हैं श्रमदान

बुरहानपुर3 महीने पहले
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विश्व को शांति, करूणा एवं मैत्री का शाश्वत संदेश देने वाले विश्वदीप महाकारूणिक तथागत भगवान गौतम बुद्ध के सुत्र वाक्य ’’ अत्त दीप भवः’’ अर्थात् अंधेरे के विरूद्ध स्वंय दीप बनो से प्रेरणा लेकर ग्राम लोनी के नागरिकों ने बगैर किसी शासकीय अनुदान अथवा निधि के स्वंय ही जनभागीदारी में बुद्ध स्मारक एवं उपवन बनाने का प्रण लिया।

वार्ड क्रं. 08 में स्थानीय कार्यकर्ता संदीप ठाकरे और उनकी टीम द्वारा एक अस्थाई अतिक्रमण हटाकर 2000 वर्ग फीट का भू-खंड चिन्हित किया गया। ’’पे बैक टू सोसायटी’’ के तर्ज पर संदीप ने अपने कुछ मित्रों विशेष रूप से कर्म-जन्म भूमि सेवा समिति नेपानगर के ह्दयेश उपाध्याय को इस पुनित कार्य के निर्माण में सहायता हेतु आव्हान किया। प्रतिसाद में भारत भर में फैले हुए उनके मित्र मंडल की ओर से शुभकामना संदेशो से ऊर्जा का नवसंचार हुआ।

गांव के लोग करने आते हैं श्रमदान

स्मारक निर्माण के लिए स्थानीय नागरिक, युवा, बच्चे, महिलाएं सभी अपने-अपने स्तर पर योगदान कर रहे हैं। रात 2 बजे तक यहां श्रमदान करते है। 1 माह से भी अधिक समय से नीव भराई, प्रतिमा का मंच, चारों ओर की बाउन्ड्री में अभी तक मजदूरी के नाम पर 1 रूपया भी खर्च किये बगैर समाज की एकजुटता के आधार पर केवल श्रमदान के कारण स्मारक आकार ले रहा है।

जहां भगवान बुद्ध के चरण पड़े वहां की मिट्टी, नदियों का जल संग्रहित

जहां जहां भगवान बुद्ध के जीवनकाल में उनके चरण पडे़ थे ऐसे लुम्बिनी, सारनाथ, बनारस, बुद्धगया, कुशीनगर सहित भारत के 50 तीर्थ स्थलों की मिट्टी, साथ ही गंगा, जमुना, ब्रम्हपुत्र, सरयु, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा, क्षिप्रा, ताप्ती और भारत की अन्य प्रमुख पवित्र नदीयों का जल भी इस पवित्र संकल्प के साथ संग्रहित किया है कि यह समस्त पवित्र सामग्री इस स्मारक में विधिवत स्थापित करेगें। इस स्मारक को वंदन करते ही समस्त तीर्थो को वंदन हो जाएगा। आज के इस युग में जहां लोग अपने लिये समय नही निकाल पाते ग्रामवासियों द्वारा आने वाली पीढ़ियों को विकारमुक्त करने के पवित्र संकल्प के साथ निर्माणाधीन यह बुद्ध विहार में श्रमदान कर रहे हैं।