कभी घना जंगल हुआ करता था,अब दिख रहा मैदान:ड्रोन से देखिए जिले की नावरा रेंज के घाघरला स्थित जंगल की भयावह तस्वीर; अतिक्रमणकारी हावी

बुरहानपुर (म.प्र.)2 महीने पहले

बुरहानपुर जिले की नेपानगर तहसील के तहत आने वाली वन विभाग की नावरा रेंज के ग्राम घाघरला में कभी घना जंगल हुआ करता था, लेकिन अब यहां अतिक्रमणकारियों ने तबाही मचा दी है। आलम यह है कि हर तरफ कटे हुए पेड़ नजर आ रहे हैं। रविवार को प्रशासन की टीम घाघरला पहुंची। ड्रोन की मदद से जंगल की फोटो, वीडियोग्राफी की गई। जो मंजर सामने आया वह क्षेत्र के लोगों के लिए काफी दुःख भरा है।

दरअसल जिस क्षेत्र में ड्रोन से निगरानी की गई वहां कभी घना जंगल हुआ करता था, लेकिन जब प्रशासनिक टीम जिसमें एसडीएम हेमलता सोलंकी, एसडीओ अनिल विश्वकर्मा, रेंजर पुष्पेंद्र जादौन आदि शामिल थे, ने यहां ड्रोन से वीडियोग्राफी कराई तो नजर आया कि किस तरह घाघरला के जंगल को तबाह किया जा रहा है। यह क्षेत्र अब मैदान नजर आने लगा है।

लगातार हो रही वन कटाई, अब घाघरला में घुसे अतिक्रमणकारी

नावरा रेंज के जंगलों में लगातार अतिक्रमणकारी कब्जे के प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए वनों को काटा जा रहा है। पहले पानखेड़ा वन क्षेत्र में अंधाधुंध तरीके से कटाई की गई थी अब घाघरला क्षेत्र में करीब 300 से अधिक अतिक्रमणकारी घुस आए हैं। जिससे ग्रामीण भी चिंतित हैं। रविवार को कुछ ग्रामीणों ने कलेक्टर से मुलाकात की थी। सोमवार को भी कुछ ग्रामीण कलेक्टर से मुलाकात करने जाएंगे। एसडीएम हेमलता सोलंकी ने कहा-ड्रोन से निगरानी कराई गई, लेकिन यहां अतिक्रमणकारी नजर नहीं आए।

ऐसे समझें-कैसे जंगल को किया जा रहा तबाह

जिले में 1.90 लाख 100 हेक्टेयर जंगल, 57 हजार पर अतिक्रमण

जिले में एक लाख 90 हजार 100 हेक्टेयर जंगल है। इसमें से 57 हजार हेक्टेयर में लाखों पेड़ काटने के बाद अतिक्रमण पसर चुका है। 2018 के बाद से यहां अतिक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। अधिकांश अतिक्रमणकारी खंडव, खरगोन, बड़वानी जिले के रहने वाले हैं। बड़वानी में जंगल का सफाया करने के बाद यह अतिक्रमणकारी यहां आकर कब्जा कर रहे हैं।

यह है हालात-जिले में 8 रेंज, कहीं सुरक्षित नहीं जंगल

जिले में वन विभाग की असीरगढ़, धुलकोट, नेपानगर, नावरा, बुरहानपुर, खकनार, शाहपुर और बोदरली सहित 8 रेंज है। खास बात यह है कि कोई रेंज ऐसी नहीं है जहां जंगल नहीं कटता हो। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2017 तक ही जिले का 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र अतिक्रमण की जद में आ चुका था। बाद में 2 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में और अतिक्रमण पसरा।

यह है स्थिति- अब कट चुका जंगल

  • 2018 में 200 हेक्टेयर,
  • 2019 में 700 हेक्टेयर,
  • 2020 में 500 हेक्टेयर,
  • 2021 में 100 हेक्टेयर
  • 2022 में अब तक नावरा रेंज में 123 हेक्टेयर

272 अफसर, कर्मचारी, बंदूकें महज 26

जिले में वन विभाग में अफसरों से लेकर वनरक्षक तक 272 लोगों का अमला है। इन पर एक लाख 90 हजार 100 हेक्टेयर जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी है। हालात यह है कि विभाग के पास सिर्फ 25 बंदूकें और 4 पिस्टल है। यह पिस्टल चारा रेंजर को दी गई है। जबकि जिले में आठ रेंजर हैं। विभाग के पास पर्याप्त हथियार नहीं हैं। हर बार टीम हमला होने पर जान बचाकर भागती है।

2019 में बदनापुर में हवाई फायरिंग हुई थी। तब मजिस्ट्रियल जांच भी हुई थी, लेकिन यह जांच अब तक सार्वजनिक नहीं की गई। नावरा रेंजर पुष्पेंद्र जादौन ने बताया अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई के लिए रणनीति तैयार की जा रही है। रविवार को ड्रोन कैमरे की मदद से क्षेत्र की निगरानी की गई थी।

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