बकरियों की तरह दूध दे रहे बकरे:चारों के अनोखे नाम; देखने आ रहे लोग

रईस सिद्दीकी। बुरहानपुर2 महीने पहले

बकरे भी दूध देते हैं ! ये सुनकर आप हैरान हो सकते हैं। हो सकता है इस पर यकीन ना हो, लेकिन सच है। ऐसे एक नहीं, दो नहीं... 4 बकरों की कहानी हम आपको बता रहे हैं।

दरअसल हाल ही में एक ऐसे बकरे ने सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरी थीं। जो दूध देता है। हम आपको ऐसे ही बकरों के बारे में बता रहे हैं। बुरहानपुर में चार बकरे हैं, जो बकरियों की तरह रोज दूध देते हैं। इन बकरों के प्राइवेट पार्ट से सटकर दो थन हैं। जिनसे दूध आता है। बकरों को देखने मप्र, महाराष्ट्र के अलावा देश के अन्य राज्यों से भी लोग आ रहे हैं।

सबसे पहले जान लेते हैं, इन अनोखे बकरों को...

जॉब छोड़कर बुरहानपुर लौटे
शहर से करीब 3 किमी दूर रेणुका क्षेत्र में डॉ. तुषार नेमाड़े का फार्म हाउस है। डॉ. तुषार इंजीनियर हैं और वे नासिक महाराष्ट्र में महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी में जाॅब करते थे। करीब 15 साल पहले उन्होंने जॉब छोड़ दी और कुछ व्यवसाय करने का मन बनाया। इसके बाद वे बुरहानपुर लौटे और बकरी पालन का व्यवसाय शुरू किया। उन्होंने देशभर से अलग-अलग प्रजाति के बकरे-बकरियों का कलेक्शन शुरू किया।

अलग-अलग राज्यों से लाए गए बकरे
डॉक्टर तुषार ने बताया कि उनके फॉर्म पर 12 से अधिक प्रजातियों के बकरे हैं। इनमें 4 प्रजाति के बकरे सबसे खास हैं। इनमें बिटल प्रजाति का पंजाब, हंसा प्रजाति काे भिंड-मुरैना, हैदराबादी प्रजाति का हैदराबाद और पथिरा प्रजाति के बकरे को अहमदाबाद से लेकर आए थे। ये बकरे इसलिए खास हैं क्योंकि ये दूध देते हैं। हर बकरा रोज करीब 250 से 300 ML दूध देते हैं।

3 साल से पाल रहे हैं बकरे
डॉ. तुषार बकरियों की ब्रीडिंग के लिए अलग-अलग राज्यों से उच्च नस्ल के बकरों काे लेकर आते हैं। इन बकरों काे भी वे ढाई से तीन साल पहले ब्रीडिंग के लिए फार्म हाउस पर लेकर आए थे। अच्छी नस्ल के होने के कारण बचपन से ही इनका रूटीन प्लान किया गया था। उनका कहना है कि अब हमें तब की गई प्लानिंग का बेहतर रिजल्ट मिल रहा है।

डॉ. तुषार नेमाड़े बकरियों की ब्रीडिंग के लिए अलग-अलग राज्यों से बकरे लेकर आते हैं।
डॉ. तुषार नेमाड़े बकरियों की ब्रीडिंग के लिए अलग-अलग राज्यों से बकरे लेकर आते हैं।

2 महीने पहले थन को हाथ लगाया तो निकला दूध
डॉ. तुषार नेमाड़े के अनुसार- अमूमन सभी बकरों के थन होते हैं, लेकिन रेयर केस में किसी के बढ़ जाते हैं। इन बकरों को जब खरीदकर लाया था तो यह नहीं सोचा था कि ये दूध देंगे। मैंने बस इनकी डाइट पर पूरा फोकस किया। करीब 2 महीने पहले इनके थन की साइज बढ़ती देख, हाथ लगाया तो दूध की पिचकारी फूट पड़ी। दूध को थोड़ा सा पीकर देखा तो उसका स्वाद बकरियों के दूध जैसा ही था। इसके बाद दैनिक उपयोग में दूध को लिया। मुझे इस फील्ड में 15 साल का अनुभव है, इसलिए इस दूध का उपयोग करना शुरू कर दिया।

पशु चिकित्सक बोले- 27 साल की नौकरी में ऐसा पहली बार देखा
पशु चिकित्सक डॉ. अजय रघुवंशी ने एक साथ 4 बकरों के दूध देने की बात पर आश्चर्य जताया। वे बोले- 27 साल की नौकरी में मैंने ऐसा पहली बार होते देखा है। 100 में से किसी एक केस में ऐसा होता है। हालांकि उन्होंने कहा यह बकरे टेस्टिकल होते हैं। ऐसा हार्मोंस के बदलने के कारण होता है। वीडियो में मैंने भी देखा है कि बकरा दूध दे रहा है। वाकई यह आश्चर्यचकित करने वाली बात है।

बकरों के बारे में जानने के बाद पशु चिकित्सक डॉ. अजय रघुवंशी भी हैरान रह गए। उनका कहना था कि 27 साल की नौकरी में मैंने ऐसा पहली बार देखा है।
बकरों के बारे में जानने के बाद पशु चिकित्सक डॉ. अजय रघुवंशी भी हैरान रह गए। उनका कहना था कि 27 साल की नौकरी में मैंने ऐसा पहली बार देखा है।

फार्म हाउस पर देशभर के विभिन्न राज्यों के बकरे
डॉ. तुषार फार्म हाउस पर मप्र, के अलावा पंजाब, अहमदाबाद, राजस्थान, हैदराबाद समेत अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग प्रजाति के बकरे मौजूद हैं। इनकी कीमत 52 हजार रुपए से लेकर 4 लाख रुपए तक है। डॉ. तुषार करीब 15 साल से यह फार्म हाउस चला रहे हैं। छोटे स्तर पर शुरू किया गया यह व्यवसाय अब बढ़ा रूप ले चुका है।

करीब 15 साल से फार्म हाउस चला रहे डॉ तुषार के पास मौजूद बकरों की कीमत 52 हजार रुपए से लेकर 4 लाख रुपए तक है।
करीब 15 साल से फार्म हाउस चला रहे डॉ तुषार के पास मौजूद बकरों की कीमत 52 हजार रुपए से लेकर 4 लाख रुपए तक है।

अच्छी नस्ल के बकरे लाखों में बिकते हैं
डॉ. तुषार के अनुसार अच्छी नस्ल के बकरे यहां लाखों में बिकते हैं। बकरों की कद-काठी आम बकरों से अलग होती है। लंबाई, ऊंचाई देखकर लोग दाम तय करते हैं। ऑनलाइन बुकिंग भी की जाती है। बकरे बुक होने पर सीधे घर पहुंच सेवा दी जाती है।

करीब 2 महीने पहले डॉक्टह नेमाड़े ने बकरों के थन की साइज बढ़ती देखे हाथ लगाया तो दूध की पिचकारी फूट पड़ी।
करीब 2 महीने पहले डॉक्टह नेमाड़े ने बकरों के थन की साइज बढ़ती देखे हाथ लगाया तो दूध की पिचकारी फूट पड़ी।

रोजगार के साथ ट्रेनिंग भी दे रहे नेमाड़े
डॉ. तुषार नेमाड़े यहां लोगों को रोजगार के साथ ही ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। दूर-दूर से यहां युवा ट्रेनिंग के लिए आते हैं। किसानों को भी वह बकरी पालन के लिए प्रेरित कर रहे हैं।