मई में सूखने की कगार पर ताप्ती नदी:लाेग बोले - जल संरक्षण के नहीं होते प्रयास, आसपास के जलस्त्रोत भी तोड़ रहे दम

बुरहानपुर4 महीने पहले

ताप्ती नदी के तट पर बसा बुरहानपुर ताप्ती नदी का जल संरक्षित कर उसे उपयोग में नहीं ले पा रहा है। आलम यह है मार्च से ही यह नदी सूखने लगती है और मई, जून में पूरी तरह खाली हो जाती है। इन दिनों भी यही हालात बन रहे हैं।

एक तरफ आजादी के अमृत महोत्सव के तहत हर जिले में 75-100 तालाब खोदे जा रहे हैं तो वहीं खुद ताप्ती नदी के पास होकर लोग प्यासे हैं। यहां बोरी बंधान आदि जल संरक्षण के काम नहीं होने से हर साल ताप्ती नदी का पानी व्यर्थ ही बह जाता है। जबकि इसका सदुपयोग किया जा सकता है। लोगों का कहना है कि जल संरक्षण के प्रयास नहीं हो रहा है। आसपास के जलस्त्रोत भी दम तोड़ रहे हैं।

बारिश में लबालब रहती है ताप्ती
बारिश के चार महीने ताप्ती नदी लबालब रहती है। आलम यह है कि ताप्ती के सारे घाटों के उपर तक पानी पहुंच जाता है। लेकिन इसका सदुपयोग नहीं किया जा रहा है। हर साल गर्मी में शहर के अधिकांश हिस्सों मंे टैंकरों से जल वितरण होता है।

ताप्ती में मिलता है शहर का गंदा पानी
ताप्ती नदी में शहर का गंदा पानी भी छोड़ दिया जाता है, जिससे यह प्रदूषित होती है। तालाबों पर करोड़ों खर्च करने के अलावा यदि ताप्ती नदी के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाए तो शहर में जलसंकट दूर किया जा सकता है। लेकिन वर्तमान में ताप्ती नदी से रेत उत्खनन ही अधिक हो रहा है।