खजूरवाहिका भी जीवंत रहेगा:खजुराहो की मूल पहचान काे कायम रखने पुरातत्व विभाग द्वारा रोपे जा रहे खजूर के पौधे

खजुराहो10 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

पर्यटकों को खजुराहो की मूल पहचान से परिचित कराने के उद्देश्य से पुरातत्व विभाग ने पश्चिम मंदिर जाने वाली नई सड़क पर खजूर के पेड़ लगाए हैं। इससे जहां पर्यटक खजुराहो की मूल पहचान से रूबरू होंगे,वहीं इसका प्राचीन नाम खजूरवाहिका भी जीवंत रहेगा।

एक हजार साल पूर्व खजुराहो में बहुतायत संख्या में खजूर के पेड़ थे। जिससे चंदेलकालीन राजाओं ने इसका नाम खजूरवाहिका रखा था। चारों ओर खजूर ही खजूर के हजारों पेड़ों से इस क्षेत्र की एक अलग ही शाेभा थी। खजूरों के इस क्षेत्र में आकर लोग आनंदित होते थे।

भारतीय पुरातत्व विभाग ने एक नई सोच के साथ इसकी अति प्राचीन पहचान को जीवित रखने का निर्णय लिया। इसके चलते पश्चिम मंदिर समूह मार्ग के दोनों ओर खजूर के आदमकद पेड़ रोपे गए हैं। यह पेड़ धीरे-धीरे बड़े हो रहे हैं। इसके बाद खजूर के पेड़ लगाने का सिलसिला जारी है।

जीवित रहेगा खजुराहो का पुरातन नाम

पुरातत्व विभाग के सीए शुभम अरजरिया ने बताया कि हम यहां देश विदेश से आने वाले पर्यटकों को खजुराहो की असली पहचान से रूबरू कराना चाहते हैं। इसी सोच के चलते खजूर लगाने का निर्णय लिया है। जो धीरे-धीरे बडे़ हो रहे हैं। खजुराहाे की अति प्राचीन पहचान को जीवित रखने का निर्णय लिया है।

खबरें और भी हैं...