जिले से वैक्सीन के लिए नहीं भेजी डिमांड:पशु पालकाें में लंपी वायरस का डर, गायों में लक्षण दिखे, पशु चिकित्सा विभाग बेखबर

छतरपुर14 दिन पहले
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मवेशियों के लिए जानलेवा लंपी वायरस से पशुपालकाें में डर की स्थिति बनी है। जिले में कई मवेशियों में लंपी वायरस जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद पशु चिकित्सा विभाग गंभीर बीमारी से बेखबर है, विभाग के आला अधिकारियों ने जिले में अधीनस्थ अमले से वायरस के संबंध में न तो कोई जानकारी जुटाने के लिए कहा और न ही इस रोग से बचाव के लिए पूर्व से कोई तैयारी की है। लंपी बीमारी के कारण देश के कई राज्यों सहित मध्यप्रदेश में भी मवेशियों की मौत हो चुकी है।

प्रदेश शासन ने पशु चिकित्सा विभाग को इस बीमारी के प्रति अलर्ट किया है। लेकिन इसके बावजूद छतरपुर जिले का पशु चिकित्सा विभाग नींद से अब तक नहीं जागा है। छतरपुर जनपद की सौंरा ग्राम पंचायत के मवासी गांव के पशु पालक सीताराम यादव की श्यामा गाय 4 दिन से लंपी वायरस जैसे लक्षण से पीड़ित है। इसे लेकर पशु पालक दहशत में हैं। इसके अलावा शहर के आसपास बड़ी संख्या में गाैवंश लावारिस हालत में घूम रहीं हैं। इसमें से कई गायों में लंपी के लक्षण देखे गए हैं। संक्रामक रोग होने के कारण उनके संपर्क में आने वाले अन्य मवेशियों के भी चपेट में आने का डर बना हुआ है।

ये हैं लम्पी वायरस के लक्षण
लंपी वायरस से पीड़ित मवेशियों के शरीर में छोटी-छोटी गठान बन जाती हैं, जो धीरे-धीरे बड़ी होकर पक जाती हैं। इससे पीड़ित मवेशी खाना कम कर देता है, उसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ये एक संक्रामक बीमारी है, पीड़ित मवेशी के संपर्क में आने वाले दूसरे मवेशी को भी यह बीमारी हो सकती है।

जिले से वैक्सीन के लिए नहीं भेजी डिमांड
लंपी को लेकर प्रदेश के अन्य जिले अलर्ट हैं। कई जिलों से इसके बचाव और इलाज के लिए पशु चिकित्सा विभाग द्वारा वैक्सीन की डिमांड भेजी गई है। लेकिन छतरपुर जिले के पशु चिकित्सा उप संचालक ने अभी तक वैक्सीन के लिए डिमांड ही नहीं भेजी। लापरवाही की बात ताे यह है कि लम्पी को लेकर पूरा प्रदेश चिंतित है लेकिन जिले के पशु चिकित्सा विभाग को इसकी खबर ही नहीं है। उप संचालक का कहना है कि उन्हें जिले में लम्पी वायरस फैलने की कोई जानकारी ही नहीं है।

लम्पी से मवेशी की मौत भी हो सकती है
इस बीमारी की शुरुआत में पशु को दो से तीन दिन के लिए हल्का बुखार रहता है। उसके बाद पूरे शरीर में गठानें (2-3 सेमी) निकल आती हैं। ये गठानें गोल उभरी हुई होती हैं जो चमड़ी के साथ-साथ मसल्स की गहराई तक जाती हैं। मवेशी के मुंह, गले, श्वांस नली तक इस बीमारी का असर दिखता है। साथ ही पैरों में सूजन, दुग्ध उत्पादकता में कमी, गर्भपात, बांझपन और कभी-कभी जानवर की मौत भी हो जाती है। हालांकि, ज्यादातर संक्रमित पशु 2 से 3 सप्ताह में ठीक हो जाते हैं। लेेकिन समय पर इलाज न मिलने से करीब 15 दिन में मवेशी की मौत हो जाती है।

वैक्सीन खरीदी के लिए भेजेंगे प्रस्ताव
"अभी जिले में लंपी होने की जानकारी नहीं है, आपने मवासी गांव के बारे में बताया। गांव में टीम भेजेंगे। एक नोट सीट चलाकर 50 हजार रुपए की वैक्सीन खरीदी के लिए कलेक्टर को प्रस्ताव भेजेंगे।"
-डॉ. विमल तिवारी, उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं छतरपुर।

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