क्रेशर संचालकों को बचाने खनिज विभाग के हथकंडे:नियमों का दिया हवाला, लाइसेंस ना होने के बावजूद कर रहे ब्लास्ट

छतरपुर (मध्य प्रदेश)एक महीने पहले
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छतरपुर जिले के खजुराहो में ब्लास्टिंग से रेलवे ट्रैक के परखच्चे उड़ने के बाद जिला प्रशासन ऐसे हादसों को रोकने के लिए कितना सजग हैं। इसकी एक झलक छतरपुर में देखने को मिली है। यहां जिला कलेक्टर के निर्देश पर बीते रोज सरसेड़ स्थित क्रेशरों की जांच करने पहुंची खनिज टीम विभाग के नियमों का हवाला देकर उनको बचाने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रही हैं।

यह है मामला

हरपालपुर थाना क्षेत्र के सरसेड में स्थित क्रेशर संचालकों द्वारा पत्थर खनन के लिए की जा रही हैवी ब्लास्टिंग पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है। यहां जांच करने आई खनिज टीम ने इस पर कोई भी जांच करना सही नहीं समझा और ना ही विस्फोटक के लाइसेंसों की जांच की है।

मैगजीन लाइंसेंसधारी मौजूद नहीं

क्रेशर संचालक खदानों में विस्फोटल मैगजीन कहां से लाते हैं किस मैगजीन लाइंसेंसधारी से अनुबंध हैं या इनके पास खुद मैगजीन का लाइसेंस हैं। यदि इनका मैगजीन लाइसेंसधारियों से अनुबंध हैं तो वो सरसेड़ से कितने किलोमीटर दूरी पर स्थित है। जब हरपालपुर में मैगजीन नही हैं उस के बाद भी क्रेशर संचालक अवैध रूप विस्फोटक का भण्डारण कैसे करते हैं।

नियमानुसार जिस मैगजीन लाइसेंस वाले अनुबंध होगा वही खदान पर डीलिंग और ब्लास्टिंग करेगा जो विस्फोटक बचेगा उसे वापस आपने साथ परिवहन के लिए अनुबंधित वाहन से लाया जाएगा। लेकिन सरसेड में स्थित क्रेशर संचालकों को इस सब कि परवाह न करते हुए मजदूरों से खदानों में डीलिंग ब्लास्टिंग कराई जा रही। दिन में कई बार इन संचालक खदानों में हैवी ब्लास्टिंग कराते है। स्थानीय लोगों के अनुसार जब खदानों से पत्थर निकालने के लिए ब्लास्ट किया जाता हैं तो 5 किलोमीटर दूर तक भूकंप जैसे कपन महसूस किया जाता है।

रेलवे लाइन और खेतों में गिरते

झांसी मानिकपुर रेलवे लाइन के पास स्थित जय भवानी ट्रेडर नाम से संचालित क्रेशर से खदान में पत्थर निकालने के लिए ब्लास्ट किया जाता है जिसकी वजह से आए दिन पत्थर उछलकर रेल लाइन सहित किसानों के खेतों में गिरते हैं। इसी के पास एक क्रेशर जो सुधा सोनी के नाम से संचालित हो रही है जिन के पास किसी भी प्रकार का कोई भी खदानों में ब्लास्टिंग करने का अनुबंध पत्र नहीं है और ना ही पर्यावरण विभाग की एनओसी है। वे इसके वावजूद भी ब्लास्टिंग कर रहे हैं।

जांच प्रतिवेदन उल्लेख नहीं

खजराहो में हादसे के बाद खनिज अधिकारी ने जांच प्रतिवेदन ये नहीं उल्लेख किया कि रेल्वे ट्रैक पर पत्थर गिरते या नहीं जब कि चार साल पहले तत्कालीन नौगांव एसडीएम बीबी गंगेले ने शिकायत पर तत्कालीन हल्का पटवारी से जांच कटवाई की जिस में हल्का पटवारी दयाराम अहिरवार ने पंचनामा जांच प्रतिवेदन में स्वीकार किया था कि रेल लाइन पर क्रेशर खदानों में विस्फोटक से रेलवे लाइन पर पत्थर गिरते जिस से कोई बड़ा हादसा होने का अंदेशा हैं।

उदासीनता या मिलीभगत

इस मामले में खनिज विभाग सिर्फ यह कह कर पल्ला झाड़ लेता हैं कि खदानों में विस्फोटक से उन को कोई लेना देना नही लीज प्रदान की गई जो सही जब खनिज इंस्पेक्टर अशोक द्विवेदी से बात कि उनका कहना था विस्फोटक का लाइंसेंस हम लोग नही जांचते हैं उस लिए अन्य विभाग है। जिस साफ जाहिर होता हैं खनिज विभाग मामले को दबाने में लगा हैं।

रेल लाईन नही है सुरक्षित

झांसी मानिकपुर रेल लाईन भी इन क्रेशर संचालकों के द्वारा की जानी हैवी ब्लास्टिंग से अब सुरक्षित नही दिखती क्यों क्रेशर वालों द्वारा खदानों से पत्थर निकालने के की जा रही बेहिसाब हैवी ब्लास्टिंग कभी भी रेल लाईन को छति पहुँचा सकती हैं जो खजुराहो जैसे हादसों को जन्म दे सकती हैं। जिस किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता हैं आये दिन रेल लाईन के पास पत्थर खदानों से उछल कर गिरते हैं।

SDM नोगांव विनय द्विवेदी ने बताया कि जिला प्रशासन खजुराहो हादसे के बाद रेलवे लाइन किनारे स्थित क्रेशरो की जांच करवा रहा है। कल ही सरसेड़ खनिज रेलवे की संयुक्त टीम ने जाँच की है इस के अलावा मैगजीन के अनुबंध की जांच भी होगी। हम और नौगांव एसडीओपी मौके पर आकर इसकी जांच करते हैं।

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