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एम्बुलेंस नहीं मिली, घायल CRPF जवान को ट्रेक्टर लाया अस्पताल:सड़क हादसे में घायल हुआ था जवान, लोगों ने एंबुलेंस को किया कॉल लेकिन आधे घंटे बाद भी नहीं मिली मदद तो ट्रैक्टर से पहुंचाया अमरवाड़ा अस्पताल

छिंदवाड़ा2 महीने पहले
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घायल सीआरपीएफ जवान को  ट्रेक्टर से उतारकर स्ट्रेचर में शिफ्ट करते हुए - Dainik Bhaskar
घायल सीआरपीएफ जवान को ट्रेक्टर से उतारकर स्ट्रेचर में शिफ्ट करते हुए

मंगलवार देर रात अमरवाड़ा के पिपरिया रोड पर एक सड़क हादसे में घायल सीआरपीएफ जवान प्रशांत धुर्वे को एंबुलेंस न मिलने के कारण ट्रेक्टर में डालकर अस्पताल लाना पड़ा। प्रत्यक्ष दर्शी मोहित साहू की माने तो सड़क हादसे के बाद यहां मौजूद लोगों ने अमरवाड़ा अस्पताल में एंबुलेंस के लिए कॉल किया था लेकिन आधे घंटे बाद भी घटनास्थल पर एंबुलेंस नहीं पहुंचाई गई घायल जवान तड़प रहा था जिसकी तड़प को देखकर मौके पर मौजूद शुभम साहू,नीरज साहू, इरशाद खान और मोहित साहू ने तत्काल एक ट्रैक्टर का प्रबंध किया और घायल सीआरपीएफ जवान को अमरवाड़ा अस्पताल लेकर आये। हालांकि जवान की हालत गंभीर होने के चलते उसे तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद अमरवाड़ा के चिकित्सकों ने छिंदवाड़ा रेफर कर दिया। बताया जा रहा है कि यदि थोड़ी भी देर हो जाती तो घायल युवक की जान भी जा सकती थी।

विधायक निधि से अस्पताल को मिली है 19 लाख की एंबुलेंस

घायलों को त्वरित उपचार मिल सके इस उद्देश्य से अमरवाड़ा विधायक राजा कमलेश शाह ने अपनी विधायक निधि से ₹19 लाख देकर सर्व सुविधा युक्त एंबुलेंस अमरवाड़ा अस्पताल को उपलब्ध कराई है। लेकिन बीती रात हुई हादसे के बाद यह साफ हो गया है कि यह एंबुलेंस सफेद हाथी की तरह अस्पताल परिसर में खड़ी रहती है, सूचना के बाद भी घायलों को अस्पताल तक लाने के लिए नाकाफी साबित हो रही है।

अस्पताल में खड़ी थी एंबुलेंस

इरशाद खान ने बताया कि सीआरपीएफ जवान प्रशांत धुर्वे को ट्रैक्टर में डालकर जब उपचार के लिए अमरवाड़ा अस्पताल लाया गया तो एंबुलेंस भी अस्पताल परिसर में ही खड़ी थी। समझा जा सकता है कि किस तरह से अस्पताल प्रबंधन के द्वारा यह लापरवाही की जा रही है युवाओं का कहना था कि यदि वे इस एंबुलेंस की राह देखते तो उनके दोस्त की जान चली जाती।

बेसुध हो गया था जवान, आई है गंभीर चोट

पिपरिया राजगुरु के पास हुए सड़क हादसे में सीआरपीएफ जवान प्रशांत धुर्वे बुरी तरह से घायल हो गया था जिसके चलते हुए 15 से 20 मिनट तक रोड पर ही बेहोश होकर पड़ा रहा इस दौरान जैसे ही उसके परिजनों को इसकी जानकारी लगी भी मौके पर पहुंचे तथा उन्होंने तत्काल एंबुलेंस को फोन मिलाया था लेकिन एंबुलेंस जब मौके पर नहीं पहुंची तो उन्हें ट्रैक्टर से ही युवक को अस्पताल लेकर जाना पड़ा।

प्रसार के अभाव में शोभा की सुपारी साबित हो रही है विधायक निधि से खरीदी एम्बुलेंस

आम आदमी को घायल के उपचार के लिए 108 या निजी एम्बुलेंस की सहायता से नजदीकी अस्पताल की मदद मांगता है लेकिन हाल ही में विधायक निधि से खरीदी गई एम्बुलेंस का कोई भी टोल फ्री नंबर और पर्याप्त प्रचार प्रसार नही होने की वजह से लोगो के काम नही आ रही है।कमोबेश जिले में सभी जगह ऐसी स्थिति है।

BMO ने झाड़ा पल्ला

इस संबंध में बीएमओ डॉ अर्चना कैथवास का कहना है कि उन्हें किसी ने भी एंबुलेंस के लिए कॉल नहीं किया। ऐसे में कैसे एंबुलेंस उपलब्ध करा पाती।

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