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  • Angry Farmers Told The Administration Snatched The Land By Promising To Provide Employment, Till Now The Plant Has Not Started Or Got Employment, We Will Now Do Farming On The Land

थर्मल पावर की अधिग्रहित जमीन पर किसानों ने चलाया हल:गुस्साए किसानों ने प्रशासन से कहा- रोजगार देने का वादा करके जमीन छीन ली, अब तक प्लांट चालू हुआ ना रोजगार मिला, हम अब जमीन पर करेंगे खेती

6 दिन पहले
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  • प्रशासन ने किसानों को दी समझाईश

छिंदवाड़ा। पेंच थर्मल परियोजना के लिए चौरई क्षेत्र के 100 से ज्यादा किसानों की भूमि सरकार के द्वारा सालों पहले अधिग्रहित की गई थी, लेकिन यहां बरसों बाद भी पावर प्लांट का काम प्रारंभ नहीं हुआ है। जिसके चलते क्षेत्र के किसानों को आज तक इस क्षेत्र में रोजगार नहीं मिल रहा है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित सैकड़ों किसानों के सब्र का बांध रविवार को टूट गया, तथा वे सीधे अधिग्रहित जमीन पर

चलाने पहुंच गए तथा जमकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। हालांकि सूचना मिलने के बाद प्रशासन भी मौके पर पहुंच गया तथा किसानों को समझा बुझाकर जमीन से बाहर कर दिया।

80 के दशक में बिजली बनाने के लिए अधिग्रहित की गई थी 900 एकड़ जमीन

सन 1988 में सरकार के द्वारा माचागोरा में विधुत वितरण कंपनी के द्वारा बिजली उत्पादन के लिए माचागोरा, भुतेरा, चौंसरा, केवलारी, बारहबरियारी, धनोरा मडुआ भूला मोहगांव सहित पेंच नदीं के किनारे बसे गांवों के लगभग 250 से ज्यादा किसानों को रोजगार दिलाने का वादा करते हुए 900 एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी। लेकिन कुछ साल पहले ही थर्मल पावर बनाने के लिए अधिग्रहित जमीन को अडानी को बेच दी गई। जिसके विरोध में अब किसानों के सब्र का बांध आज टूट गया और वे सबंधित जमीन पर हल चलाने पहुंच गए।
किसान बोले-हमारे साथ हुआ है छलावा, वापस करों जमीन
अधिग्रहित जमीन पर हल लेकर पहुंचे किसान नन्हे पटेल, कमलेश चंद्रवंशी, दिलावर वर्मा, जगदीश वर्मा सहित अन्य किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सरकार से जमीन वापस करने की मांग की। किसान नन्हे चंद्रवंशी ने बताया कि भू अर्जन अधिनियम के तहत यदि अधिग्रहित की गई भूमि पर पांच साल के अंदर सबंधित प्रोजेक्ट चालू नही किया जाता है तो जमीन किसानों को वापस मिल जाती है, लेकिन यहां तो 30 साल हो गए, ना तो प्रोजेक्ट चालू हुआ और ना ही क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को रोजगार मिला। कोरोना महामारी के दौर में वे अब भूखे मरने की कगार पर पहुंच गए है।
दर बदर भटक रहे किसान, खाने के पड़े लाले
गौर किया जाए तो पावर प्लांट खुलने के लिए क्षेत्र के 250 से ज्यादा किसानों ने रोजगार के अवसर मिलने की लालसा लेकर अपनी जमीन सरकार को दे दी थी। लेकिन लगभग 30 साल का समय गुजर गया है। यहां पावर प्लांट के नाम पर एक ईंट तक नहीं रखी गई है। ऐसे में किसान दर बदर भटकने को मजबूर है। किसानों का मानना है कि उन्होने ये सोचकर अपनी जमीन सरकार को दी थी कि क्षेत्र में विकास क ार्य होने से उनके बच्चों को रोजगार के साथ अच्छी शिक्षा मिल सकेगी, लेकिन यह सब सिर्फ एक दिव्य स्वप्न बनकर रह गया।
तीन दिन का दिया अल्टीमेटम
आज विरोध प्रदर्शन करने चौंसरा पहुंचे सैकड़ों किसानों ने प्रशासन को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि यदि उनके हित में कोई कदम नहीं उठाया गया तो, वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

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