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प्रशासन की ये कैसी सख्ती!:प्रतिबंध के बाद भी 7 सितंबर को पांढुर्ना में होगा खूनी गोटमार, लोगों ने जमा किये पत्थर, प्रशासन की रोक बेअसर

छिंदवाड़ाएक महीने पहलेलेखक: सचिन पांडे
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गोटमार मेला - Dainik Bhaskar
गोटमार मेला

पांढुर्णा में इस साल भी पोला पर्व के दूसरे दिन भी खूनी गोटमार खेला जाएगा। मंगलवार को आयोजित किए जाने वाले गोटमार मेले को लेकर कलेक्टर की रोक के बावजूद यहां लोगों ने मेले से 1 दिन पहले से ही पत्थर को जमा करना शुरू कर दिया है। कलेक्टर ने भले ही यहां धारा 144 लागू करने का आदेश दिया है बावजूद इसके लोगों में इस प्रतिबंध का कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा है। पांढुर्ना और सावरगांव में जगह-जगह पत्थरो का ढेर लगने लगा है। बावजूद इसके प्रशासनिक तौर पर कोई रोक टोक नहीं देखी जा रही हैं। प्रशासन की सख्ती के बावजूद पुलिया पर पत्थरो का ढेर देखा जा रहा है, जिन्हें लोगों ने यहां जमा कर रखा हैं, जबकि इस मेले को प्रतीकात्मक आयोजित करने का निर्देश है।

गोटमार में लिए जमा किये गए पत्थर
गोटमार में लिए जमा किये गए पत्थर

एहतियातन गई व्यवस्था

मंगलवार को होने वाली गोटमार मेरे में घायलो को उचित स्वास्थ सुविधा मिले इस उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी पूर्ण कर ली हैं घायलो के लिए मलहम पट्टी , इंजेक्शन , एक्सरे , दवाई , एम्बुलेंस जैसी व्यवस्था बनाई गई हैं।

अब तक 13 लोग गवां चुके हैं जान

विश्वप्रसिद्ध गोटमार मेले में मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्णा तहसील में हर साल पोला पर्व के दूसरे दिन आयोजित होता है, जहां लोग एक दूसरे पर जमकर पत्थर बरसाते है। परम्परा के नाम पर खूब खून खराबा भी होगा। सबसे बड़ी बात की इस पूरे कार्यक्रम का आयोजन खुद प्रशासन करवाता है । गौर करने वाली बात यह है कि इस खूनी खेल में पिछले कई वर्षों में 13 लोगो की जान जा चुकी है। बावजूद इसके पांढुर्णा के लोग इस जुनून को छोड़ने तैयार नही है।

प्रशासन ने इस खेल को बंद करने लाख जतन किये, लेकिन प्रशासन के सारे अरमानों पर साल दर साल पानी फिरता गया। इस जुनून को कोरोना का भय भी नहीं रोक पाया था पिछले साल भी प्रशासन के प्रतिबंधों के बावजूद यहां पत्थर चले थे इस वर्ष भी प्रशासन के प्रयासों के बाद भी जब लोग नहीं माने तो मेले की अनुमति प्रदान करनी पड़ी । हालांकि यहां पर हर वर्ष धारा 144 लगा दी जाती है लेकिन वह केवल रस्म अदायगी होती है उसका कोई प्रभाव यहां देखने को नहीं मिलता ।

पांढुर्णा के लोग इस खेल को गोटमार कहते है।गोटमार में पुलिस और प्रशासन के सामने लोग एक-दूसरे को पत्थर मारकर घायल करते है।अब देखना है कि इस बार गोटमारी मे कितने घायल होते है। कलेक्टर सौरभ सुमन ने बताया कि गोटमार के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर लिए गए हैं। अवैध शराब और पत्थरों के जमावड़े पर भी नियंत्रण रखने के प्रयास किए जा रहे हैं ।

140 साल से चल रही परंपरा

140 वर्ष पहले की यह परंपरा आज भी नहीं बदली।गोटमार की यह परंपरा एक प्रेम कहानी से जुड़ी है।इसी प्रेम कहानी से आज गोटमार परम्परा बन गई है।इस परंपरा से जुड़ी एक किवदंती है, कहते हैं कि यह दो गांव की दुश्मनी और प्रेम करने वाले युगल के याद में शुरू हुई। सावरगांव की लड़की थी और पांढुर्णा का लड़का,जो एक-दूसरे को प्रेम करते थे। एक दिन लड़का-लड़की को लेकर भाग रहा था और जाम नदी को पार करते समय लड़की पक्ष के लोगों ने देख लिया।

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फिर पत्थर मारकर रोकने की कोशिश की।यह बात लड़के पक्ष को पता चली तो वह उन्हें बचाने के लिए लड़की वालों पर पत्थर बाजी करने लगे। जिसमे दोनो की मौत हो गई।हालांकि प्रेमी प्रेमिका कौन थे आज तक किसी को पता नहीं लेकिन तबसे लेकर आज तक यह परम्परा चली आ रही है।

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