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1 लाख टन कोयले के स्टाक में लगी आग:वेकोलि प्रबंधन की लापरवाही से उरधन खदान में लगी आग, लाखों टन कोयले के ढेर में आग लगने से मचा हडक़ंप

छिंदवाड़ा4 दिन पहले
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प्रबंधन की लापरवाही और जान बूझकर की जा रही गलतियों से एक बार फिर उरधन के लिए कोयले की आग बडे नुकसान की खबर लेकर आई है। उरधन में कोयले के स्टाक में आग भडक गई है । खदान में इस समय एक लाख टन कोयले का स्टाक है। भडकी आग खदान को एक बडे नुकसान की ओर ले जा रही है।
ये आग उस समय लगी है जब खदान को पेंच क्षेत्र की उम्मीद माना जा रहा था। वर्षो बाद खदान में काम शुरू हुआ था। इससे कोयला निकाला भी जाने लगा था। खदान से एक लाख टन कोयला बाहर निकालकर स्टाक कर लिया गया। इसी स्टाक में आग लगी है। खास बात यह है कि प्रबंधन खदानों से निकलने वाले कोयले से घाटा कम होने की बात करता है। लेकिन इस स्टाक को आग से नहीं बचा पाता। उरधन में इससे पहले भी आग लगी थी। तब भी हजारो टन कोयला आग की भेंट चढा था। उरधन में लगातार मजदूर संगठन आग की संभावना व्यक्त कर रहे थे। लेकिन प्रबंधन ने इस पर कोई कदम नहीं उठाया। अब कोयला सुलग रहा है। आग पूरे स्टाक में है। जिस तरह से धुंआ उठ रहा है और गैस फैल रही है वह एक बडी आग की ओर इषारा कर रही है।
महादेवपुरी की ठंडी नहीं हुई आग
गौरतलब है कि महादेवपुरी कोयला खदान में भी स्टाक में आग लगी है। इस आग को बुझाया नहीं जा सका है। महादेवपुरी में आग की खबरों के बाद से अन्य खदानों के स्टाक और इसमें आग की संभावना व्यक्त की गई थी। लेकिन प्रबंधन ने कोई कदम नहीं उठाया।
जब बेचना नहीं था तो निकाला क्यों
इस मामले में सबसे अहम बात ये है कि जब कोयला बेचना ही नहीं था तो निकाला क्यों गया। एक लाख टन कोयला जमीन से निकाल लिया गया। इसका न तो आक्षन किया गया न पावर हाउस भेजा गया। करोडों रुपयों का नुकसान प्रबंधन की इस गलती और लापरवाही से हो रहा है।
क्यों सबक नहीं लेता प्रबंधन
कोयले में लगातार आग लगती है। प्रबंधन को करोडो रुपयों का नुकसान होता है। इसके बाद भी आग को लेकर प्रबंधन क्यों सबक नहीं लेता। इसका सीधा से कारण पूरे क्षेत्र में चर्चाओं में रहता है। दरअसल प्रबंधन अपनी नाक बचाने के लिए ओवर रिपोर्टिंग करता है। बाद में स्टाक मिलान करने में आग सहायक बन जाती है।
कोयले को आग की भेंट चढा रहा प्रबंधन-तिवारी
मजदूर संगठन इंटक के पेंच के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि प्रबंधन कोयले को आग की भेंट चढा रहा है। इस कोयले को निकाला गया है तो इसका परिवहन कर लिया जाना था। नहीं बेच पा रहे थे तो इसे निकालना नहीं था। राष्ट्र की संपत्ति का इस तरह नुकसान भी राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में आता है। इस आग पर शीघ्र काबू पाकर कोयला बेचना परिवहन करना चाहिए।

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