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मंत्री के आदेश को भूल गए अधिकारी!:निजी अस्पतालों में जारी नहीं कि जा रही रेमडेसीविर इंजेक्शन की सूची, आपदा प्रबंधन की बैठक में दिये गए थे दिशा निर्देश

3 महीने पहले
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आपदा प्रबंधन की बैठक के दौरान प्रदेश के कोरोना प्रभारी  मंत्री अरविंद भदौरिया - Dainik Bhaskar
आपदा प्रबंधन की बैठक के दौरान प्रदेश के कोरोना प्रभारी मंत्री अरविंद भदौरिया
  • निजी अस्पतालों में दिए जाने वाले इंजेक्शन की कालाबाजारी रोकने के दिये गए थे निर्देश

छिंदवाड़ा। रेमडेसीविर इंजेक्शन के नाम पर हो रही कालाबाजारी को रोकने के लिए छिंदवाड़ा प्रवास पर आए जिले के कोरोना प्रभारी मंत्री अरविंद भदौरिया ने आपदा प्रबंधन की बैठक लेते हुए पत्रकारों के प्रश्न पूछने के दौरान अधिकारियों को यह निर्देश जारी किया था कि निजी अस्पतालों में रेमडेसीविर इंजेक्शन जिन मरीजों को लगाए जा रहे है उनकी सूची सार्वजनिक की जाए, प्रभारी मंत्री के सामने जिला प्रशासन ने सूची जारी करने की हामी तो भर दी थी लेकिन आज तक निजी अस्पतालों में दिए जाने वाले रेमडेसीविर इंजेक्शन की सूची जारी नहीं की गई है ऐसे में कहा जा सकता है कि या तो सरकारी अधिकारी प्रभारी मंत्री के आदेश को भूल गए है, या फिर जिला प्रशासन प्रभारी मंत्री के आदेश का पालन नहीं कराना चाह रहे है। कोरोना संकट काल में जहां निजी अस्पतालों में आए दिन मरीजों के साथ मनमाने बिल वसूलने के मामले सामने आ रहे है ऐसे में प्रशासन रेमडेसीविर जैसे अति आवश्यक इंजेक्शनों की निजी अस्पतालों में हो रही सप्लाई की सूची को सार्वजनिक करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। जिससे यह सवाल उठना लाजमी है कि या तो निजी अस्पताल यह सूची सामने नहीं लाना चाह रहे है, या फिर प्रशासन ही नहीं चाह रहा है कि यह सूची सार्वजनिक की जाए। हालांकि आदेश तो प्रभारी मंत्री ने जारी किया था, अब प्रशासन इसका पालन करना क्यों नहीं चाह रहा है यह वरिष्ठ अधिकारी ही तय कर सकते है। अस्पतालों में मरीजों के सिटी स्कोर देखकर दिए जाते है इंजेक्शनगौर किया जाए तो निजी अस्पतालों में भी शासन के द्वारा कोरोना संक्रमित मरीजों के सिटी स्कोर के आधार पर रेमडेसीविर इंजेक्शन उपलब्ध कराए जाते है, ऐसे में कई बार यह शिकायत भी सामने आती है कि जिन मरीजों के लिए रेमडेसीविर इंजेक्शन अलाट किए गए है उन्हे इंजेक्शन लगाए ही नहीं गए है। फिलहाल ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए यह निर्देश कारगार है लेकिन प्रशासन न जाने क्यों सूची सार्वजनिक करने में हिचकिचा रहा है।

कालाबाजारी की सामने रही है घटनाएं

गौर किया जाए तो प्रदेश के निजी अस्पतालों से आये दिन इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं, जहा अस्पतालों में मरीजों को एलाट किये जा रहे इंजेक्शन नहीं लग पा रहे हैं।

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