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52 साल बाद आदिवासी को वापस कराई जमीन:10 हजार रुपए में सूदखोर ने अपने नाम करा ली थी 4 एकड़ जमीन, SDM कोर्ट ने शून्य की रजिस्ट्री

छिंदवाड़ा10 दिन पहले
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ब्याज के बदले सूदखोर द्वारा आदिवासी किसान की लाखों की जमीन हथिया ली गई थी। सूदखोर ने करीब 4 एकड़ जमीन महज 10 हजार रुपए में अपने नाम करा ली थी। जमीन रजिस्ट्री के दौरान आदिवासी किसान की जाति राजपूत बताई गई। सुनारी मोहगांव के पीड़ित आदिवासी परिवार को एसडीएम न्यायालय से न्याय मिला।

एसडीएम अतुल सिंह ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए करीब 52 साल पहले कराई गई नियम विरुद्ध रजिस्ट्री को शून्य घोषित किया। तहसीलदार को जमीन वापस कराने का आदेश दिया।

ये है पूरा मामला

जिले के ग्राम बौहनाखैरी के निवासी श्याम पुत्र लखन लाल खड़िया ने एसडीएम न्यायालय के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया था। श्याम ने बताया था कि सुनारी मोहगांव में उसकी पैतृक जमीन है। साल 1969 में सकलराम द्वारा धोखे से विक्रय पत्र बनवा लिया गया, तो वहीं 1975 में उक्त जमीन श्रीराम रघुवंशी और दयाराम रघुवंशी के नाम दर्ज कर दी गई ।

श्याम ने बताया कि उसके दादा दमड़ी ने श्रीराम रघुवंशी से कुछ पैसे ब्याज पर लिए थे। दयाराम और श्रीराम रघुवंशी ने छल करते हुए महज 10 हजार रुपए देकर करीब 4 एकड़ जमीन अपने नाम करा ली गई। नियमानुसार उक्त जमीन में उसका व उसके परिवार का नाम दर्ज होना चाहिए। एसडीएम अतुल सिंह ने प्रकरण की जांच कराई। साथ ही सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों को सुना व साक्ष्य देखे गए।

एसडीएम अतुल सिंह
एसडीएम अतुल सिंह

इसके आधार पर आदिवासी किसान की जमीन बिना कलेक्टर की अनुमति के विक्रय पत्र बनाना और गैर आदिवासी के नाम जमीन का नामांतरण करना पाया गया। ऐसे में एसडीएम न्यायालय द्वारा विक्रय पत्र रजिस्ट्री को शून्य करने आदेश जारी किया गया। साथ ही आदिवासी खड़िया परिवार के वारिसों के नाम भूमि में दर्ज करने आदेश जारी किया गया। एसडीएम न्यायालय द्वारा रजिस्ट्री शून्य करने के साथ तीखी और स्पष्ट टिप्पणी भी की गई है।

गलत थी प्रक्रिया

  • एसडीएम न्यायालय ने सुनवाई के दौरान पाया कि श्रीराम रघुवंशी और दयाराम रघुवंशी द्वारा आदिवासी व्यक्ति की जमीन का अपने नाम।विक्रय पत्र बनवाया गया।
  • कलेक्टर या फिर सक्षम न्यायालय की अनुमति के बिना आदिवासी व्यक्ति की जमीन का गैर आदिवासी व्यक्ति के नाम विक्रय पत्र और नामांतरण विधि विरुद्ध है, जो किसी भी स्थिति में मान्य नहीं किया जा सकता है।
  • अनावेदकों ने भू राजस्व अधिनियम का दुरुपयोग किया है, जिसके बाद आदेश जारी किया गया।
  • भू राजस्व संहिता की धारा 170 ख की उपधारा 3 की शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए रजिस्ट्री शून्य करने और जमीन आदिवासी परिवार का नाम दर्ज करने का आदेश दिया।
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