ड्रीम प्रोजेक्ट:सीएम राइज प्राथमिक शाला संचालित होने के बाद भी नहीं खुला बालक-बालिका शौचालय

हटा11 दिन पहले
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सीएम राइज स्कूल के रास्ते में लग रहे कचरा के ढेर। बच्चों को नहीं मिल रही मूलभूत सुविधाएं। - Dainik Bhaskar
सीएम राइज स्कूल के रास्ते में लग रहे कचरा के ढेर। बच्चों को नहीं मिल रही मूलभूत सुविधाएं।

मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट सीएम राइज स्कूल के अंतर्गत छात्र-छात्राओं को प्राइवेट शालाओं की तर्ज पर शिक्षा के अलावा तमाम प्रकार की सुविधाएं प्रदान करने की योजना तैयार की गई है। छात्र-छात्राओं को प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेलकूद, व्यायाम, योगाभ्यास सहित स्मार्ट क्लास से अध्यापन की भी सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। लेकिन हटा में सी एम राइज स्कूल में छात्र-छात्राओं को इनमें से एक भी सुविधा प्राप्त नहीं है। शासन से प्राप्त बजट का उपयोग बिल्डिंग के रंग रोगन और सीमेंट कांक्रीट के कार्य में हो रहा है।

न तो यहां खेलकूद, योग, व्यायाम आरंभ हुआ है न ही प्रयोगशाला के ताले खुले हैं। विज्ञान के छात्र-छात्राओं को उपकरणों के दर्शन भी नहीं कराए जा रहे हैं। प्राथमिक शाला बूढा हटा को प्राथमिक शाला सीएम राइज स्कूल बनाया गया है। इसमें स्कूल खुलने के पहले शिक्षा विभाग द्वारा तार की फेंसिंग कराकर बिल्डिंग में रंग रोगन करा दिया है। लेकिन सीएम राइज स्कूल जैसी यहां कोई व्यवस्थाएं नजर नहीं आ रही हैं। यहां पर मुख्य मार्ग पर जाने के पूर्व कचरे के ढेरों से बच्चों का सामना होता है फिर स्कूल पहुंचते हैं।

इसके बाद अंदर निर्मित शौचालय का उपयोग करने किसी भी छात्र छात्राओं को नहीं मिलता। एवं नव निर्मित बालक और बालिका के अलग-अलग शौचालयों में ताले लटके हैं। यहां पदस्थ महिला अध्यापक से पूछा गया कि शौचालयों में ताले क्यों डले हैं तो उनका कहना था कि रोज लगा देते हैं और खोल देते हैं। शौचालयों के सामने जमे खरपतवार से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन शौचालयों का उपयोग लंबे समय से नहीं हुआ। महत्वपूर्ण बात यह है कि शैक्षिक स्टाफ की बाइकों के लिए बरामदे को ही पार्किंग बना दिया गया।

परिसर में अतिक्रमण
इस विद्यालय की सबसे बड़ी समस्या परिसर में व्याप्त अतिक्रमण है। बाउंड्री के रूप में लगाई गई तार फेंसिंग भी चारों ओर नहीं है। यहां मुख्य सड़क से सामने की ओर से अतिक्रमण की वजह से तार फेंसिंग ही नहीं हो पाई है। तो दूसरी ओर जो अतिक्रमण है। पूर्व जिलापंचायत अध्यक्ष का नाम होने से अतिक्रमण नहीं हट पा रहा है। जिसका खामियाजा छात्र छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है।

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