बिजली गुल:वनांचल के गांव में बिजली नहीं होने पर सोलर पैनल बना सहारा

हटा17 दिन पहले
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आदिवासी बाहुल्य धूरखेड़ा गांव के युवा सोलर पैनल से चार्जिंग प्वाइंट बनाकर मोबाइल चार्ज करते हैं। - Dainik Bhaskar
आदिवासी बाहुल्य धूरखेड़ा गांव के युवा सोलर पैनल से चार्जिंग प्वाइंट बनाकर मोबाइल चार्ज करते हैं।

आवश्यकता अविष्कार की जननी है। कुछ इन्ही पंक्तियों को वनांचल के आदिवासी बाहुल्य गांव धूरखेड़ा के युवाओं ने चरितार्थ कर दिया है। गांव में आए दिन बिजली गुल हो जाती है। जो चार से पांच घंटे में आती है। इसी समस्या को देखते हुए गांव के मोबाइल चलाने वाले युवाओं ने स्कूल प्रांगण में लगे सोलर पैनल से जुगाड़ तकनीक से मोबाइल चार्जर प्वाइंट बनाकर अपने मोबाइल की बैटरी चार्ज करते हैं। युवा सूरज आदिवासी ने बताया कि हमारा गांव ग्राम पंचायत घोघरा के अंतर्गत आता है। गांव में पेयजल व्यवस्था के लिए पंचायत द्वारा बोरबेल कराया गया था।

बिजली की समस्या के चलते सोलर सिस्टम से बोरबेल के द्वारा जल सप्लाई होती थी। लेकिन बोरबेल में खराबी आने के बाद यह कई माह से बंद पड़ा है। जिससे सोलर पैनल का कोई उपयोग नहीं हो पा रहा था। जिसके बाद गांव के मोबाइल चलाने वाले युवाओं ने इसमें चार्जिंग प्वाइंट जोड़कर मोबाइल चार्ज कर रहे हैं। गांव में जब भी बिजली गोल होती है या कुछ दिन का ब्लैक आउट होता है तो युवा और बच्चे स्कूल प्रांगण में लगे इस सोलर पैनल के पास पहुंच जाते हैं और अपने मोबाइल फोन सहित बैटरियों को चार्ज करते हैं।

मोबाइल चार्ज और बैटरी पूरी होने तक बच्चे यहां खेलकर समय व्यतीत करते हैं। गांव में 20 युवाओं के पास मोबाइल है। जो इसी से मोबाइल चार्ज करते हैं।

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