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  • 21 year old Rakshit Entered The Guinness Book Of World Records By Trekking 5200 Km From Kashmir To Kanyakumari

5200 किमी लंबी पैदल यात्रा:21 साल के रक्षित ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक 5200 किलोमीटर की पैदल यात्रा करके, गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया

दमोह3 महीने पहले
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रक्षति पेशे से हैं फोटोग्राफर, 35 हजार रुपए लेकर निकले, 10 हजार बच गए - Dainik Bhaskar
रक्षति पेशे से हैं फोटोग्राफर, 35 हजार रुपए लेकर निकले, 10 हजार बच गए
  • 218 दिन पैदल चले, 4 जाेड़ी जूते बदलने पड़े, 22 सितंबर 2021 को यात्रा प्रारंभ की और 28 अप्रैल 2022 को कन्याकुमारी में समापन किया
  • जब 1 हजार किमी की यात्रा कर चुका तो लोग स्वयं ही मदद के लिए सामने आने लगे

जिले के नरसिंहगढ़ में रहने वाले 21 साल के रक्षित श्रीवास्तव ने 218 दिन में पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) के कारगिल से कन्याकुमारी तक 5200 किमी लंबी पैदल यात्रा करके सबसे कम उम्र की कैटेगिरी में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। रक्षित ने 22 सितंबर 2021 को गो-ग्रीन और सेफ इंडिया का उद्देश्य लेकर अपनी यात्रा प्रारंभ की थी। 28 अप्रैल को कन्याकुमारी में अपनी पूरी यात्रा करने के बाद रक्षित अपने घर लौट आए हैं।

भ्रमण के दौरान लोगों ने मेहमानों की तरह घर में रात रूकने का ठिकाना दिया, खाना खिलाया और आशीर्वाद भी दिया

रक्षित ने भास्कर से चर्चा में बताया कि भ्रमण के दौरान उन्हें काफी अच्छे अनुभव मिले। देशवासियों का भरपूर प्यार और सहयोग मिला। लोगों ने मेहमानों की तरह अपने घर में रात रूकने के लिए ठिकाना दिया। खाना खिलाया और भरपूर आशीर्वाद मिला। रक्षित ने बताया कि पूरी यात्रा के दौरान कहीं भी एक पल के लिए ऐसा नहीं लगा कि वह असुरक्षित हैं। पैदल यात्रा के दौरान उन्हें जानने और देखने के लिए बहुत कुछ मिला। लोगों की भाषा, उनका रहन-सहन, खान-पान और वेशभूषा अलग-अलग देखने को मिली। लोगों के कल्चर भले अलग है, लेकिन राष्ट्र प्रेम सभी में कूट-कूटकर भरा है। यही हमारे देश की एकता है और हमारी ताकत भी। रक्षित बताते हैं कि पैदल यात्रा का सुझाव उन्हें किसी ने अलग से नहीं दिया था। बल्कि स्वयं के मन में यह भाव आया था। बार-बार लोग एक ही बात करते हैं कि देश में पैदल यात्रा सुरक्षित नहीं है। भ्रमण के दौरान उनकी बात झूठी निकली। हमारा देश बहुत सुरक्षित और सेफ है। कहीं पर भी किसी तरह की समस्या नहीं है। यहां पर बता दें कि रक्षित श्रीवास्तव के पिता राजेश श्रीवास्तव नरसिंहगढ़ सीमेंट फैक्ट्री में नौकरी करते हैं। जबकि उनकी मां सीमा श्रीवास्तव हाउस वाइफ हैं।

रक्षति पेशे से हैं फोटोग्राफर, 35 हजार रुपए लेकर निकले, 10 हजार बच गए

रक्षित पेशे से फोटोग्राफर हैं। उन्होंने फोटोग्राफी में डिप्लोमा कोर्स किया है। उन्होंने बताया कि जब वे घर से पैदल यात्रा के लिए निकल रहे थे तो उनके मन में इस बात का भ्रम था कि पैसा बहुत लगेगा। लेकिन उतने पैसे उनके पास नहीं थे। ऐसे में उन्होंने अपने पास रखी 35 हजार रुपए की जमा पूंजी रख ली और निकल पड़े। लेकिन जब 1 हजार किमी की यात्रा कर चुका तो लोग स्वयं ही मदद के लिए सामने आने लगे। किसी ने रात्रि में रहने अपने घर के दरवाजे खोल दिए तो किसी ने खाने का इंतजाम किया। ऐसे में उनकी केवल 25 हजार रुपए की राशि खर्च हुई और यात्रा पूरी हो गई। 10 हजार रुपए उसमें से भी बच गए। रक्षित अब आने वाले समय में राजस्थान के थार जैसलमेर राजस्थान में पैदल यात्रा करना चाहते हैं। एक से डेढ़ माह बाद वह अपनी यात्रा प्रारंभ करेंगे।

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