जिले में बसा भिखारियों का गांव:पुरुष जाते हैं मजदूरी करने, महिलाएं अपने बच्चों को लेकर मांगती हैं भीख

दमोह2 महीने पहले

दमोह में भिखारियों का पूरा एक गांव बस गया है। यहां के लोग अपने बच्चों से भीख मंगवाते हैं और महिलाएं बच्चों को भीख मांगने के लिए गाइड करती हैं। तिदोना गांव से दर्जनों बच्चे शहर के अलग-अलग ठिकानों पर पहुंच कर दिन भर भीख मांगते हैं। पैसों के अलावा मिलने वाली खाने की चीजों से ही यहां के बच्चे और महिलाएं अपना पेट भरते हैं। दिन भर भीख मांगने के बाद सभी अपने गांव को लौट जाते हैं।

कलेक्टर को सौंपी थी भीख रोकने की जिम्मेदारी
पिछले दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य में भीख मांगने वाले बच्चों को रोकने की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर को सौंपी थी। आदेश के बाद दैनिक भास्कर ने भीख मांगने वाले बच्चों को लेकर कलेक्टर एस कृष्ण चैतन्य से उनकी कार्य योजना जानने की कोशिश की। कलेक्टर से भिखारियों के गांव के बारे में भी चर्चा की। कलेक्टर ने कहा कि भीख मांगने वाले लोगों को चिन्हित कर उनकी काउंसलिंग की जाएगी। उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उनकी बेसिक जरूरतों को पूरा करने का प्लान बनेगा।

'मजबूरी में मांग रहे भीख'
गांव की महिलाओं का कहना है कि पुरुष वर्ग मजदूरी करने निकल जाता है। परिवार में लोग ज्यादा है। उनका पेट पालने के लिए एक आदमी की आय से काम नहीं चल पाता। घर चलाने के लिए ही उन्हें भीख मांगने जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बच्चे अक्सर स्कूल में पढ़ने जाते हैं। उन्हें खाली टाइम में ही अपने साथ ले जाते हैं।

सरपंच बोले- बच्चों को बचाने की कोशिश जारी
सरपंच सोमेश गुप्ता ने कहा कि गांव के ज्यादातर लोग भीख मांगते हैं। बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के कई प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने गोबर से दीपक बनाने का प्लांट डाला था। प्लांट में उसी गांव की महिलाएं भी शामिल थीं।