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मां गजलक्ष्मी व्रत आज:जानिए...क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि, पढ़िए...किन मंत्रों को जपने से होग लाभ

दतिया16 दिन पहले
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प्रतिवर्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को गजलक्ष्मी व्रत रखा जाता है। आज गज पर सवार मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से महालक्ष्मी व्रत आरंभ होते हैं। जो 16 दिन होते हुए आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को समाप्त होते हैं। इस दिन गजलक्ष्मी व्रत के साथ उद्यापन किया जाता है और मां लक्ष्मी के गजस्वरूप की पूजा की जाती है। जानिए गजलक्ष्मी व्रत की पूजा विधि,शुभ मुहूर्त और मंत्र।

शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 17 सितंबर शनिवार को दोपहर 02 बजकर 14 मिनट पर शुरू हुई थी। जो 18 सितंबर, रविवार को शाम 04 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी। आज के दिन 4 बजकर 32 मिनट तक गज लक्ष्मी की पूजा का महूर्त रहेगा।

पूजा विधि

व्रत के दिन सुबह उठकर सभी कामों ने निवृत्त होकर स्नान आदि कर लें। इसके बाद एक चौकी में लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और उसके ऊपर हल्दी से कमल बना दें। इसके बाद इसमें मां लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित कर दें। इसके साथ ही श्रीयंत्र और कलश की स्थापना भी कर दें और चौकी में मिट्टी या चांदी के हाथी को रखें। फिर पूजा आरंभ करें। मां लक्ष्मी की पूजा में हल्दी, कुमकुम, लाल गुलाब, माला, अक्षत, कमल गट्टा, सोलह श्रृंगार, नैवेद्य आदि चढ़ाएं। इसके साथ भोग अर्पित करने के साथ धूप दीप जलाकर महालक्ष्मी मंत्र, श्री लक्ष्मी चालीसा का पाठ कर लें। अंत में आरती करते भूल चूक के लिए माफी मांग लें।

महालक्ष्मी मंत्र

गजलक्ष्मी के दिन महालक्ष्मी के इन मंत्रों का करीब 108 बार जाप करना लाभकारी साबित होगा।

1. ऊं ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नम:

2. ऊं नमो भाग्य लक्ष्म्यै च विद्महे अष्ट लक्ष्म्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोद्यात

3. ऊं मां लक्ष्मी मंत्रः

4. ऊं विद्या लक्ष्म्यै नम:

5. ऊं आद्य लक्ष्म्यै नम:

6. ऊं सौभाग्य लक्ष्म्यै नम:

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