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पीले सोने से बनेगा शहद:सरसों की फसल से अब शहद की भी होगी पैदावार, कश्मीर तक बिकेगा, 300 महिलाओं को अतिरिक्त आमदनी होगी

दतिया6 दिन पहलेलेखक: शुभम मुड़िया
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पीला सोना कही जाने वाली सरसों की फसल से तेल ही नहीं, शहद का उत्पादन भी किया जाएगा। सरसों की फसल की बोवनी के साथ ही सेंवढ़ा ब्लॉक के 13 गांव मेंं 300 महिलाएं मधुमक्खी पालन के बॉक्स लगाकर कच्चे शहद का संग्रहण करेंगीं। चूंकि सेंवढ़ा ब्लॉक में सरसों का सबसे अधिक उत्पादन होता है। हर साल इस फसल के दाम बढ़ने से किसानों की आय का यह मुख्य साधन है। खेतों में शहद उत्पादन की इस नई तरकीब से स्थानीय महिलाओं को अतिरिक्त आमदनी होने लगेगी।

रबी के सीजन में सरसों की फसल से शहद का उत्पादन करने के लिए इसके लिए मप्र डे ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ने सेंवढ़ा ब्लॉक के 13 गांवों को चिन्हित किया है, जिसमें 300 महिलाओं के 30 समूह गठित किए जाने हैं। फिलहाल इसके लिए 200 महिला हितग्राहियों को चयनित कर लिया है। साथ ही मुरैना की एक संस्था से अनुबंध किया है। यह संस्था महिलाओं को शहद के उत्पादन के लिए करीब 600 बॉक्स उपलब्ध कराएगी। यह बॉक्स खेत के अंदर रखे जाएंगे। एक बॉक्स में करीब 40 किलो शहद का संग्रहण किया जाएगा। जिसमें शहद का उत्पादन होगा। मुरैना की संस्था ही इसे बेचने का कार्य करेगी।

कश्मीर तक बिकेगा शहद, विदेशों में भी डिमांड
सरसों के माध्यम से उत्पादन किए गए शहद अनुबंधित संस्था के माध्यम से कश्मीर तक बेचा जाएगा। नवंबर से लेकर फरवरी तक खेत सरसों के पीले फूल से ढंक जाते हैं। इसी से मधुमक्खियां शहद को चुनती हैं। फसल कटने के साथ ही शहद उपलब्ध हो जाता है। इस दौरान कश्मीर में सेव की खेती भी शुरू होती है। सेव की खेती के दौरान वहां शहद की डिमांड अधिक होती है। इसलिए संस्था वहां शहद को बेचेगी। सरसों की फसल से प्राप्त मकरंद और पराग से बना शहद घी की तरह जमा हुआ रहता है, इसलिए उसकी विदेशों में बहुत मांग रहती है, क्योंकि वहां ब्रेड पर मक्खन के स्थान पर शहद लगाकर खाने का प्रचलन है।

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