चातुर्मास समापन पर साध्वी मंडल श्रीसंघ के साथ गोशाला पहुंचे:साध्वी ने कहा- प्रवचन के माध्यम से जो भी श्रवण किया है, उसे अपने जीवन में उतारे

बदनावरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक

बहता पानी और विचरण करते साधु दोनों ही शुद्धि के लिए आवश्यक है। जैन संत एक स्थान पर ज्यादा समय रुकते नहीं है। चातुर्मास के बाद विहार करना आवश्यक है, यही जिन आज्ञा है। यह बात साध्वी रुचिदर्शना मसा आदि ने अपने औपचारिक विदाई समारोह में कही। उन्होंने कहा कि अनेकता में एकता बदनावर श्री संघ की विशेषता है। मैंने अपने गुरु की आज्ञा से पृथक होकर पहली बार चातुर्मास किया, लेकिन बदनावर श्रीसंघ संघ के सहयोग से एवं भोयरावाला दादा की कृपा से यह चातुर्मास मेरा सफल रहा।

मेरी यही भावना है कि बदनावर श्रीसंघ ऐसे ही एकता बनाकर धर्म के मार्ग पर आगे बढ़े। विगत 4 माह में अपने प्रवचन के माध्यम से जो भी श्रवण किया है। उसे अपने जीवन में उतारे। चातुर्मास समिति और श्री संघ के कार्यों की अनुमोदना की। साथ ही 4 माह में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा याचना भी की। आयोजन में कई वक्ताओं ने महिला मंडल ने एवं बच्चों ने भी अपने विचार एवं गीत के माध्यम से अपनी भावना प्रकट की।

चातुर्मास के सफल आयोजन के उपलक्ष्य में जीव दया के लिए साध्वी मंडल श्रीसंघ के साथ गौशाला पहुंचे। प्रथम बार गायों का साधर्मिक वात्सल्य किया। जिसमें लापसी एवं घास खिलाई। इसी के साथ जैन श्रीसंघ एवं चातुर्मास समिति की ओर से पशुओं के आहार के लिए लोहे के तीन स्टैंड जिनकी लागत लगभग बीस हजार रुपए आएगी देने की घोषणा की। पशु साधार्मिक वात्सल्य का लाभ अभय कुमार, रोहित कुमार, अशोक कुमार, कोठारी परिवार ने लिया।

खबरें और भी हैं...