MP की ककड़ी देश-विदेश में हो रही सप्लाई:धार के किसान 5 हजार की लागत से सालाना एक लाख से ज्यादा कर रहे कमाई

नीलेश जैन (मनावर)8 महीने पहले

धार जिले के मनावर विकासखंड में किसान इंटर क्रॉपिंग टेक्नीक से खेती कर रहे हैं। किसानों ने कपास के साथ ककड़ी की फसल लगाई है। एक बार कपास और ककड़ी की फसल लगाने के बाद सालभर में तीन बार उपज मिल जाती है। इससे कम लागत पर ज्यादा मुनाफा हो रहा है। यहां की ककड़ी देश के बड़े शहरों के साथ विदेशों में सप्लाई की जा रही है। व्यापारी सीधे खेतों से खरीदी कर इसे देश-विदेश में भेज रहे हैं। एक बीघा में ककड़ी की फसल लगाने की लागत 5 हजार आती है। इससे सालाना एक लाख से ज्यादा की कमाई हो जाती है। खेती किसानी सीरीज में आज जानते हैं कि कपास के साथ ककड़ी की फसल लगाकर कैसे कमाई की राह बनाई जा सकती है...

एक बार फसल से तीन बार उपज
किसान हरिशंकर सोलंकी, माधव पाटीदार, हरिओम पाटीदार ने बताया कि खीरा ककड़ी से हमें जीवन में पहली बार किसी सब्जी में इतने पैसे की बचत हुई है। ककड़ी की फसल के लिए प्रति बीघा 5 हजार का खर्च आता है। इससे 35 हजार रुपए की उपज एक बार में होती है। एक फसल से तीन बार उत्पादन लेते हैं। वहीं, कपास की प्रति बीघा की फसल में 16 हजार की लागत आती है। एक बार में 7 क्विंटल उत्पादन होता है। 8000 रुपए के भाव से एक बार में 56 हजार की कमाई होती है। सालाना 1 लाख 68 हजार तक कमाई हो जाती है।

खीरा ककड़ी बाजार में भेजने के लिए की गई पैक।
खीरा ककड़ी बाजार में भेजने के लिए की गई पैक।

15 रुपए किलो ककड़ी खरीदते हैं व्यापारी
क्षेत्र की खीरा ककड़ी की बड़ी डिमांड बनी हुई है। 650 KM दूर मनावर आकर जयपुर के व्यापारी किसानों के खेत से ही खरीदी कर लेते हैं। ये किसानों को 15 रुपए किलो के हिसाब से पेमेंट करते हैं। इसके बाद वे जयपुर और गुड़गांव के प्लांट में ले जाकर वैक्यूम पैक कराते हैं। यहीं से ताजी ककड़ी भारत के बाहर अरब देशों में पहुंचाई जाती है।

क्या है इंटरक्रॉपिंग?
इंटरक्रॉपिंग का अर्थ खेत के बीच-बीच में या खाली जगह में कोई दूसरी फसल लेना है। उदाहरण के लिए गन्ने का अंकुरण और वृद्धि मंद होती है। बीच में फसल ली जा सकती है, क्योंकि इस फसल की रोपाई खाली स्थान छोड़कर की जाती है।

रेतीली जमीन पर ककड़ी का भरपूर उत्पादन
खीरे का उपयोग वजन को कम करने और सलाद के रूप में किया जाता है। बाजार में इसकी कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं। खीरे की खेती रेतीली भूमि में अच्छी होती ऐसे में किसान के पास जो ऐसी भूमि है, जिसमें दूसरी फसलों का उत्पादन अच्छा नहीं होता है उसी भूमि में खीरे की खेती से अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है।

मनावर के में लगाई गई खीरा ककड़ी की फसल।
मनावर के में लगाई गई खीरा ककड़ी की फसल।

जैविक खाद के साथ ऐसे करें तैयारी
खेती की तैयारी के 15-20 दिन पहले 20-25 टन प्रति हेक्टेयर की दर से सड़ी गोबर की खाद मिला देते हैं। खेती की अंतिम जुताई के समय 20 कि.ग्रा नाइट्रोजन, 50 कि.ग्रा फास्फोरस व 50 कि. ग्रा पोटाशयुक्त उर्वरक मिला देते हैं। फिर बुवाई के 40-45 दिन बाद टॉप ड्रेसिंग से 30 कि.ग्रा नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर की दर से खड़ी फसल में प्रयोग की जाती है। जायद में उच्च तापमान के कारण अपेक्षाकृत अधिक नमी की जरूरत होती है। अत: गर्मी के दिनों में हर सप्ताह हल्की सिंचाई करना चाहिए। बारिश के मौसम में सिंचाई बरसात पर निर्भर करती है। ग्रीष्मकालीन फसल में 4-5 दिनों के अंतर पर सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। वर्षाकालीन फसल में अगर बारिश न हो, तो सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है।

गर्मियों में बाजार में काफी डिमांड
कद्दूवर्गीय फसलों में खीरा का अपना एक अलग ही महत्वपूर्ण स्थान है। गर्मियों में खीरे की बाजार में काफी मांग रहती है। यह गर्मी से शीतलता प्रदान करता है और हमारे शरीर में पानी की कमी को भी पूरा करता है। इसलिए गर्मियों में इसका सेवन काफी फायदेमंद बताया गया है। खीरे की गर्मियों में बाजार मांग को देखते हुए जायद सीजन(रबी और खरीफ सीजन के बीच की अवधि) में इसकी खेती करके अच्छा लाभ कमाया जा सकता है।

खीरे की उन्नत किस्में

  • भारतीय किस्में: स्वर्ण अगेती, स्वर्ण पूर्णिमा, पूसा उदय, पूना खीरा, पंजाब सलेक्शन, पूसा संयोग, पूसा बरखा, खीरा 90, कल्यानपुर हरा खीरा, कल्यानपुर मध्यम और खीरा 75 आदि प्रमुख है।
  • नवीनतम किस्में : पीसीयूएच- 1, पूसा उदय, स्वर्ण पूर्णा और स्वर्ण शीतल आदि प्रमुख हैं।
  • संकर किस्में: पंत संकर खीरा- 1, प्रिया, हाइब्रिड- 1 और हाइब्रिड- 2 आदि प्रमुख हैं।
  • विदेशी किस्में: जापानी लौंग ग्रीन, चयन, स्ट्रेट- 8 और पोइनसेट आदि प्रमुख हैं।

बुआई के दो माह बाद ही फल लगना शुरू
किसानों को खीरे की बुवाई करने से पहले उन्हें रोगों से बचाने के लिए उपचारित करना चाहिए। अच्छा उत्पादन लेने के लिए 20-25 टन गोबर की सड़ी हुई खाद प्रति हेक्टेयर के हिसाब से डालनी चाहिए। खीरा बहुत जल्दी तैयार होने वाली फसल है। इसकी बुआई के दो महीने बाद ही इसमें फल लगना चालू हो जाते हैं।

खीरे का बीज तैयार करने की वैज्ञानिक विधि
खीरे की खेती के लिए नवंबर के महीने में प्लास्टिक के गिलास में मिट्टी भरकर बीज अंकुरित करने के लिए डालते हैं। दो माह बाद खेतों में रोपाई की जाती है। बीज तैयार करने का यह वैज्ञानिक तरीका भरपूर उत्पादन देता है। खीरे की खेती से अच्छी आमदनी के लिए किसान हाइब्रिड प्रजाति को प्रमुखता देते हैं।
महेश बर्मन, वरिष्ठ एसडीओ, कृषि विभाग

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