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डैम फूटने का डर, दहशत में 18 गांव:धार में प्रशासन ने खाली कराया गांव; जिसके हाथ में जो आया वो लेकर चल दिया

धार6 महीने पहले

वक्त, गुरुवार शाम 5 बजे का... हर घर में राखी बांधने को लेकर तैयारी चल रही है... अचानक, एक अनाउंसमेंट होती है और सभी के खिले चेहरों पर चिंता की लकीरें खिंच जाती हैं। अनाउंस होता है कि... बांध में दरार आ गई है, सभी लोग अपना कीमती सामान लेकर सुरक्षित स्थान पर जाने की तैयारी शुरू कर दें। घरों में तले जा रहे कुछ पकवान गैस पर चढ़ी कढ़ाई में तो गूंथा हुआ आटा और बेसन परात में ही पड़ा रह गया। ये हालात कारम नदी पर बने डैम के आसपास के गांवों के हैं। इस डैम में दरार आने के बाद लगातार पानी रिस रहा है, जिसके बाद प्रशासन ने गांव खाली कराए हैं।

शुक्रवार को दैनिक भास्कर की टीम डैम के सबसे नजदीकी गांव जहांगीरपुरा पहुंची तो हर चेहरे पर सिर्फ डर दिख रहा था और लोग कंधे पर सामान लटकाकर गांव से जा रहे थे। किसी के हाथ में बैग तो किसी के हाथ में बर्तन नजर आए। उनकी मंजिल थी ऊंचाई पर बना स्कूल, जिसे प्रशासन ने राहत कैंप बनाया है। जरूरी सामान के अलावा वे अपने मवेशियों को भी साथ लेकर जा रहे थे। कुछ घंटों पहले तक धार जिले के जिस जहांगीरपुरा गांव में चहल-पहल थी, लेकिन अब वह वीरान हो चुका है।

जहांगीरपुरा वही गांव है, जो भरुड़पुरा और कोठीदा के बीच कारम नदी पर 304 करोड़ 44 लाख की लागत से बन रहे डैम के सबसे नजदीक है। डैम पहली बारिश में ही लीक होने लगा है। हालात काे देखते हुए धार जिले के 12 और खरगोन जिले के 6 गांवों में अलर्ट जारी कर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

कारम नदी पर बन रहे बांध के गेट वाला हिस्सा।
कारम नदी पर बन रहे बांध के गेट वाला हिस्सा।

डैम से जहांगीरपुरा की दूरी महज 3 किमी है। यदि डैम फूटता है तो सबसे पहले इसी गांव को चपेट में लेगा। यानी यह गांव पानी में समा जाएगा। 50 से 60 मकान वाले इस गांव से प्रशासन ने सभी को ऊंचाई पर बने एक स्कूल में शिफ्ट कर दिया है। कुछ लोग घरों पर ताला लगाकर अपने रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं। ग्रामीण इतने डरे हुए हैं कि अनाउंसमेंट के बाद खुद ही अपना जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थान की ओर निकल गए।

मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासन के अधिकारी।
मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासन के अधिकारी।

एक-एक पाई जोड़कर बनाया है यह बसेरा, उजड़ते नहीं देख सकता
अपना सामान समेटकर गांव से जा रहे प्रकाश बवानिया कहते हैं- कल शाम को जैसे ही पता चला कि बांध में लीकेज हो रहा है। हम सभी डर गए। परिवार दहशत में है। 48 घंटे बाद भी हालात जस के तस हैं। पूर्वजों ने बड़े प्यार से यह बसेरा बनाया था। हम तो इसे छोड़कर जाना नहीं चाहते हैं। मजबूरी में छोड़ना पड़ रहा है। प्रशासन हमें हर घंटे अलर्ट कर रहा है कि सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। ये घर हमने कर्ज लेकर बनाया था, अब उसे उजड़ते नहीं देखना चाहता। भगवान से यही प्रार्थना है कि इस आपदा को वह टाल दे और हमारा खुशहाल गांव उसी प्रकार से खिलखिलाता रहे।

गांव छोड़ने से पहले बुजुर्ग खाना खाते हुए।
गांव छोड़ने से पहले बुजुर्ग खाना खाते हुए।

घर पर दो रोटी खा लूं, फिर पता नहीं...
सुरेश बुंदेला का कहना है कि डैम फूटने का पता चला है, इसलिए घर छोड़कर पहाड़ी पर बने स्कूल में रहने जा रहा हूं। खाने-पीने का नहीं पता, क्या होगा। वहीं, 65 साल के दशरथ का कहना है कि घर पर दो रोटी खाकर बस निकल ही रहा हूं। मन नहीं है, पर जाना पड़ेगा। पता नहीं फिर क्या हो। आशा कार्यकर्ता सुभद्रा रक्षक कहती हैं लोगों को लग रहा है कि गांव डूबने जा रहा है। लोग डरे हुए हैं। गाय-भैंस, सामान सबकुछ लेकर वे सुरक्षित ठिकाना तलाश रहे हैं। गुरुवार शाम 6 बजे से ही गांव खाली करवाने को लेकर अनाउंसमेंट शुरू हो गया था। सभी को स्कूल में शिफ्ट किया गया है।

गांव की एक महिला खाना और बर्तन लेकर राहत शिविर की ओर जाती हुई।
गांव की एक महिला खाना और बर्तन लेकर राहत शिविर की ओर जाती हुई।

304 करोड़ से बना डैम, पहली ही बारिश में हुआ लीक
कारम नदी पर 304 करोड़ 44 लाख की लागत से बना डैम पहली ही बारिश में लीक होने लगा है। इस परियोजना की वजह से 8 गांव की जमीन डूब में गई थी और करीब 8 से 11 हजार हेक्टेयर जमीन में इससे सिंचाई के लिए पानी मिलना था। गुरुवार दोपहर 1 बजे डैम के लीकेज हाेने की सूचना मिलते ही कलेक्टर, एसपी समेत प्रशासनिक अमला माैके पर पहुंचा। लीकेज काे देखकर अफसरों ने धार के 12 गांव और खरगोन के 6 गांवों में मुनादी कराते हुए लाेगाें काे अलर्ट रहने के लिए कहा। साथ ही सुधार के लिए इंदौर व भोपाल से विशेषज्ञों का दल बुलाया गया, जो शुक्रवार दोपहर डैम पर पहुंचा।

पुलिस ने मुनादी कर गांव खाली कराया। लोग राहत शिविर की ओर जाते हुए।
पुलिस ने मुनादी कर गांव खाली कराया। लोग राहत शिविर की ओर जाते हुए।

36 महीने में बनकर तैयार होना था बांध
ग्राम कोठीदा में कारम मध्यम सिंचाई परियोजना का शिलान्यास एवं भूमिपूजन चार साल पूर्व जिले के तत्कालीन प्रभारी मंत्री अंतरसिंह आर्य ने किया था। डैम का निर्माण दिल्ली की कपंनी ANS कंस्ट्रक्शन प्रा.लि. कंपनी कर रही है। 10 अक्टूबर 2018 से बन रहे इस डैम को 36 महीने में बनकर पूरा होना था। हालांकि कोरोना काल के चलते दो साल इसका काम बंद रहा। डैम का जल संग्रहण क्षेत्र 183.83 वर्ग किमी, बांध की लंबाई 564 मीटर और चौड़ाई 6 मीटर है। जल भरण क्षमता करीब 43.98 मीट्रिक घन मीटर है, लेकिन डैम में लीकेज होने से जगह-जगह से पानी निकलने लगा है।

36 महीने में बांध बनकर तैयार होना था।
36 महीने में बांध बनकर तैयार होना था।

इतने गांवों को खाली करवाया

NDRF की टीम और SDERF धार और इंदौर की टीम और पड़ोस के थानों का पुलिस बल, होम गार्ड, राजस्व विभाग के अमले के साथ बचाव कार्य में जुटी है। डैम का निरीक्षण कर गुजरी के आसपास जहांगीरपुरा, कोठीदा, भरुड़पुरा, इमलीपुरा, भांडाखो, दुगनी, डेहरिया, सिमराली, सिरसोदिया, डहीवर, लसनगांव, हनुमंतिया समेत 12 गांवों में ग्रामीणों को अलर्ट कर सुरक्षित स्थान पर जाने को कहा गया। वहीं, खरगोन जिले के भी 6 गांवों को भी खाली कराया गया है। सूचना के बाद जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, उद्योग मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, धरमपुरी विधायक पांचीलाल मेड़ा, कलेक्टर डॉ. पंकज जैन, एसपी आदित्य प्रताप सिंह समेत पुलिस अधिकारी पहुंचे।

मौके पर जलसंसाधन मंत्री तुलसी सिलावट भी पहुंचे।
मौके पर जलसंसाधन मंत्री तुलसी सिलावट भी पहुंचे।

विधायक ने उठाए सवाल, कहा- घटिया मटेरियल लगाया
धरमपुरी विधायक पांचीलाल मेड़ा ने कहा- बांध में कई खामियां हैं, जिसे मैं समय-समय पर उठाता रहा हूं। चार साल पहले इसका भूमिपूजन हुआ था। कोरोना के कारण दो साल बांध का काम नहीं हो पाया। जल्दबाजी में इसे तैयार किया जा रहा है, इस कारण मोरम और काली मिट्‌टी डालकर डैम को तैयार कर दिया गया। इन्होंने इतनी लापरवाही की कि मिट्‌टी और मोरम को दबाया तक नहीं। हाईवा और डंपर से डालकर सीधे बांध की दीवार को उठाया गया। यहीं कारण है कि आज ग्रामीण परेशान हो रहे हैं। जिन्होंने इसमें लापरवाही बरती है, उनसे न सिर्फ 305 करोड़ रुपए वसूलने चाहिए, बल्कि सख्ती से कार्रवाई भी होनी चाहिए। घर छोड़कर लोग पहाड़ियों पर बैठे हैं, दो दिन से सो नहीं पा रहे हैं। कानूनी कार्रवाई काे लेकर विधानसभा में मामला उठाऊंगा। धरने पर बैठना पड़े तो वह भी करूंगा।

गांव के लोग अपने मवेशियों को भी साथ में ले जाते हुए।
गांव के लोग अपने मवेशियों को भी साथ में ले जाते हुए।

महेश्वर तहसील में 5 राहत शिविर में लोगों को ठहराया
महेश्वर तहसील के गांव जल कोटा, बड़वी, काकरिया, मक्सी और कुसुमबिया गांव के स्कूल और पंचायत भवन में राहत शिविर बनाए गए हैं। तहसीलदार मुकेश बामनिया ने बताया कि इन शिविरों में पीने के पानी, बिजली और शौचालय की व्यवस्था की गई हैं। खरगोन जिले के कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम और एसपी धर्मवीर सिंह यादव भी क्षेत्र में डटे हुए हैं। लोगों को सुरक्षित स्थान पर ठहराया गया है।

राहत शिविर की ओर जाते हुए ग्रामीण।
राहत शिविर की ओर जाते हुए ग्रामीण।

डैम से पानी निकालने का काम जारी
धार कलेक्टर डॉ. पंकज जैन का कहना है कि डैम से पानी निकालने का काम जारी है। एक जगह से नहर को कट किया गया है। डैम निर्माणाधीन है, उसमें पानी पहले भर गया। बारिश की संभावना है। सुरक्षा की दृष्टि से गांवों को खाली करवाया गया है। हमारी प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा है। गुणवत्ता काे लेकर जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम बुलाई है। जाे भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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