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पापा ने कोई गुनाह नहीं किया...:इज्तिमा से लौटकर जान गंवाने वाले शख्स की बेटी बोली

आशीष रघुवंशी। गुना13 दिन पहले

मेरे पापा ने‎ कोई गुनाह नहीं किया। अगर वे‎ ऐसा कुछ करते, तो मैं खुद आ‎ जाती। वे मुझसे जरूर बात‎ करते। बस हमारे पापा हमें मिल‎ जाएं। हम यहां से दूर चले‎ जाएंगे। कभी लौटकर नहीं‎ आएंगे। आप बताओ बाबा अब‎ कभी लौटकर आएंगे। वे बहुत‎ दूर चले गए हैं।

इतना कहकर 7 साल की बच्ची फफक-फफक कर रो पड़ी। उसके पिता की सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस पर पिटाई का आरोप है। मृतक इसराइल की नन्ही बेटी ने‎ अस्पताल में रोते हुए जो कुछ कहा,‎ उससे लोगों की आंखें नम हो‎ गईं।

इसराइल की सात साल की बेटी आलिया ने रोते हुए अपना दर्द सुनाया। उसका कहना है कि पापा ने कोई गुनाह नहीं किया।
इसराइल की सात साल की बेटी आलिया ने रोते हुए अपना दर्द सुनाया। उसका कहना है कि पापा ने कोई गुनाह नहीं किया।

ये है मामला

गुना में गोकुल सिंह के चक्क का रहने वाला इसराइल खान (30) सोमवार शाम भोपाल इज्तिमा से लौटा था। इंटरसिटी ट्रेन से स्टेशन से उतरकर वह ऑटो से घर के लिए निकला। कुशमौदा चौकी पर उसे पुलिस ने रोका और मारपीट के केस में उससे पूछताछ करने लगे। पुलिस के मुताबिक, उसे चक्कर आने लगे। जिला अस्पताल ले गए, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। उधर, मृतक के परिवार का कहना है कि पुलिस ने इसराइल को पीटा, इसी से उसकी मौत हो गई।

इस घटना से शुरू हुआ था विवाद

18 नवंबर को‎ कैंट पुलिस थाने के गोकुल सिंह चक्क इलाके में‎ मारपीट के आरोपियों को पकड़ने गई पुलिस पर‎ कथित तौर पर वहां रहने वाले कुछ लोगों ने‎ हमला किया था। इसका एक वीडियो भी सामने आया था। पुलिस कार्रवाई की अगुवाई कर रहे‎ आरक्षक रविंद्र सोलंकी (जो इसराइल की मौत के‎ मामले में लाइन हाजिर हो चुके हैं) की शिकायत‎ पर कैंट पुलिस ने 8 लोगों पर मामला दर्ज किया।‎

इनमें इब्राहिम खान, अफसर खान, सलीम खान,‎ ओवेश खान, खलील खान, अल्ताफ खान,‎ शाहिद खान और इशरू खान शामिल थे। आठवें‎ नंबर का आरोपी इशरू खान ही असल में‎ इसराइल है। परिजन का आरोप है कि 18 नवंबर‎ को मारपीट और 19 को पुलिस पर कथित हमले के‎ दौरान इसराइल भोपाल इज्तिमे में था।‎

इसराइल खान मजदूरी करता था। उसकी शादी रीना से 11 साल पहले हुई थी। उसके 4 बच्चे हैं। सबसे बड़ी बेटी महक (9), उससे छोटी बेटी आलिया (7), अनुष्का (3) और सबसे छोटा बेटा अशरफ (15 महीने) का है। कुछ दिन पहले ही उसके नाम से PM आवास भी मंजूर हुआ था। वह अपने घर में इकलौता बेटा था।
इसराइल खान मजदूरी करता था। उसकी शादी रीना से 11 साल पहले हुई थी। उसके 4 बच्चे हैं। सबसे बड़ी बेटी महक (9), उससे छोटी बेटी आलिया (7), अनुष्का (3) और सबसे छोटा बेटा अशरफ (15 महीने) का है। कुछ दिन पहले ही उसके नाम से PM आवास भी मंजूर हुआ था। वह अपने घर में इकलौता बेटा था।

बेटी रो-रोकर बोली...

मेरे पापा गुनाह नहीं करते, उन्होंने कभी गुनाह नहीं किया। अगर वो गुनाह करते, तो मैं खुद ही आ जाती मेरे पापा की जगह। गुनाह करते तो पापा मुझसे कहते। पापा के लिए मैं जाने को तैयार हूं। मेरे पापा को किसने मारा, किसने उनको तकलीफ पहुंचाई? बस हमें हमारे पापा मिल जाएं, हम तभी खुशी से रहेंगे। यहां से चले जाएंगे, दूर रहा करेंगे। हमारा परिवार और हम दूर रहेंगे। अब यहां कभी लौटकर नहीं आएंगे। बस हमारे पापा बताओ कभी आएंगे यहां, बताओ आएंगे क्या? वो बहुत दूर चले गए। इतने दूर गए हैं हमसे, कभी आएंगे ही नहीं।

SP बोले- आरक्षकों ने पूछताछ के लिए रोका

SP पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि मृतक शासकीय कार्य में बाधा के मामले में आरोपी था। इसकी तलाश पुलिस को थी, इसलिए कुशमौदा चौकी पर आरक्षकों ने उसे ऑटो से उतारा और पूछताछ के लिए चौकी में ले गए। वहां अचानक से उसकी तबीयत खराब हो गई। इसके बाद उसे जिला अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले की जांच की जा रही है। शुरुआती तौर पर 4 आरक्षकों लखन जाटव, रविंद्र सोलंकी, प्राण सिंह और शिवकुमार रघुवंशी को लाइन अटैच कर दिया गया है।

इसराइल खान की संदिग्ध मौत के बाद परिजन ने एबी रोड पर शव रखकर जाम लगा दिया था। ज्यूडिशियल जांच के आदेश हुए, तब जाकर लोग सड़क से उठे। मामले में इसराइल से पूछताछ करने वाले चार आरक्षकों को भी लाइन अटैच कर दिया है।
इसराइल खान की संदिग्ध मौत के बाद परिजन ने एबी रोड पर शव रखकर जाम लगा दिया था। ज्यूडिशियल जांच के आदेश हुए, तब जाकर लोग सड़क से उठे। मामले में इसराइल से पूछताछ करने वाले चार आरक्षकों को भी लाइन अटैच कर दिया है।

पूरे मामले में 3 बार बनती बात बिगड़ी

‎1. सोमवार रात : रात 8 से साढ़े 8 के बीच‎ इस घटनाक्रम की शुरुआत हुई। जब‎ चौकी पर पुलिस ने भोपाल से लौट‎ रहे इसराइल को रोका था। चौकी में ही‎ वह कथित तौर पर चक्कर खाकर गिर‎ गया। रात करीब 10.30 बजे के आसपास‎ पुलिस मृतक इसराइल खां को अस्पताल‎ ले आई थी। पीछे-पीछे परिजन भी आ गए‎ थे। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर‎ दिया।

रात 2 बजे तक‎ अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही। इस‎ दौरान अस्पताल में इतना जमावड़ा हो गया‎ था कि पुलिस ने नाकेबंदी कर दी। एसपी‎ ने कोतवाली में परिजनों को बुलाकर‎ भरोसा दिलाया कि सुबह पीएम के बाद‎ जो भी स्थिति बनेगी, उसके मुताबिक‎ कार्रवाई की जाएगी। परिजन व अन्य लोग‎ इस पर सहमत हो गए।‎

2. मंगलवार सुबह : पोस्टमॉर्टम शांतिपूर्ण हो गया। शव को लेकर वाहन‎ रवाना भी होने लगा। तब तक परिजन‎ को किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी‎ नहीं दी गई। परिजन अस्पताल के मेन गेट‎ पर जाकर बैठ गए। उन्होंने कहा कि जब‎ तक एफआईआर नहीं होगी, तब तक‎ हम नहीं हटेंगे। कुछ देर बाद‎ तहसीलदार सिद्धार्थ भूषण शर्मा पहुंचे।‎ उन्होंने परिजन को समझाया कि कम से‎ कम मुख्य दरवाजे से हट जाएं। इसके‎ बाद शव ले जा रही वैन वापस अंदर लौटी‎ और टीबी वार्ड के सामने करीब डेढ़ घंटे‎ तक पुलिस, तहसीलदार व परिजन के‎ बीच चर्चा चलती रही।

यहां पहली बार‎ यह जानकारी दी गई कि चार‎ पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया‎ गया है। राजनेताओं के हस्तक्षेप के बाद‎ परिजन शव ले जाने को तैयार हो गए।‎ ऐसा लगा कि अब मामला खत्म हो गया।‎

3. मंगलवार दोपहर: शव घर पहुंच गया।‎ वहां परंपरा के मुताबिक उसे अंतिम‎ संस्कार के लिए तैयार कर दिया गया।‎ अंतिम नमाज के लिए सभी लोग शव के‎ साथ मस्जिद पहुंच गए। यहीं से फिर एक‎ और नया मोड़ आ गया। अचानक उन्होंने‎ फैसला किया कि अंतिम संस्कार नहीं‎ होगा। पहले चार पुलिसकर्मियों के अलावा‎ 3 अन्य लोगों पर हत्या का प्रकरण दर्ज‎ किया जाए। परंपरा के मुताबिक मस्जिद‎ से शव को सीधे कब्रिस्तान ले जाया जाता‎ है, लेकिन परिजन उसे एबी रोड पर ले‎ आए। दोपहर 2 बजे से यहां धरना दे दिया‎ गया। यहां जब दबाव बढ़ा तो पहली बार‎ पुलिस ने कुछ ठोस कदम उठाया। एसपी‎ ने जिला जज को पत्र लिखकर‎ सीआरपीसी की धारा 176 के तहत‎ ज्यूडिशियल जांच का अनुरोध किया। इस‎ पर आनन-फानन में अमल भी हुआ। एक‎ मजिस्ट्रेट इसके लिए नियुक्त हुए और वे‎ शाम करीब 5.30 बजे मौके पर पहुंच गए।‎

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भोपाल इज्तिमा से लौट रहे युवक की मौत

भोपाल से इज्तिमा में शामिल होकर लौटे गुना के युवक की सोमवार रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिवार ने पुलिस पर पिटाई का आरोप लगाते हुए मंगलवार को हाईवे पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। मामले में चार आरक्षकों को लाइन अटैच करते हुए न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं। युवक की मौत के विरोध में परिवार और समाज के लोग जिला अस्पताल में जमा हो गए। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने जांच का भरोसा दिलाया, तब जाकर उन्होंने पोस्टमॉर्टम होने दिया। इसके बाद परिजन युवक का शव लेकर घर चले गए थे, लेकिन कुछ देर बाद ही उन्होंने हाईवे पर शव रखकर जाम लगा दिया था। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...