ब्लड की कमी:डोनेशन में शहर पिछड़ा, 75 फीसदी रक्तदान राघौगढ़, आरोन में

गुना2 महीने पहले
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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी है। सबसे ज्यादा जरूरत वाले ग्रुप, जिनमें ओ, बी और ए पॉजिटिव शामिल हैं, की ही सबसे ज्यादा कमी हो रही है। इनमें भी बी व ए पॉजिटिव ग्रुप लगभग खत्म ही हैं। थैलेसीमिया, अनुवांशिक एनीमिया, कैंसर व हीमोफीलिया जैसी बीमारी वाले मरीजों को हर माह 150 यूनिट ब्लड और पूरे साल के दौरान लगभग 2 हजार यूनिट की जरूरत होती है। इनमें से ज्यादातर को पॉजिटिव ग्रुप का ब्लड ही लगता है। इसके अलावा इन्हें रिप्लेसमेंट फ्री सेवा देना होती है।

यानि इन मरीजों के परिजनों से बदले में रक्तदान करने की शर्त नहीं रखी जाती। इसलिए इसकी पूर्ति सिर्फ रक्तदान शिविरों से की जा सकती है। इस साल अभी तक 2 हजार यूनिट ब्लड एकत्रित हुआ हो चुका है। इसमें से 75 से 80 फीसदी योगदान राघौगढ़-आरोन का रहा।

दुर्लभ ब्लड ग्रुप की समस्या कम
निगेटिव ग्रुप, जो दुर्लभ होते हैं, उनको लेकर ज्यादा समस्या नहीं आती है। एक तो इनकी जरूरत वाले मरीजों की संख्या कम रहती है। दूसरे इनके डोनर की सूची अस्पताल के पास पहले से रहती है। जैसे ही किसी मरीज को अचानक जरूरत पड़ती है तो अस्पताल संबंधित डोनर को सूचित कर देता है। इसलिए दुर्लभ होने के बावजूद ऐसे ग्रुप के मरीज उतने परेशान नहीं होते।

हर साल सात हजार यूनिट ब्लड ट्रांस्फ्यूजन
जिला अस्पताल में हर साल 7 हजार यूनिट ब्लड ट्रांसफ्यूजन होता है। इसमें से 5 हजार यूनिट ब्लड रिप्लेसमेंट के आधार पर उपलब्ध कराया जाता है। यानि मरीज के रिश्तेदार काे एक डोनर अपने साथ लाना होता है। बाकी 2 हजार यूनिट रिप्लेसमेंट फ्री उपलब्ध कराना होता है।

गंभीर मरीज पूरी तरह जिला अस्पताल के ब्लड बैंक निर्भर
रक्तकोष अधिकारी के मुताबिक जिले में 75 ऐसे मरीज हैं जिनको हर माह ब्लड की जरूरत होती है। हर दिन 4 से 5 ऐसे मरीज औसतन जिला अस्पताल आते हैं। इसके अलावा हादसों में घायल होने वाले लोग, आपात प्रसव जैसी स्थिति में भी तुरंत ब्लड की जरूरत होती है। यह सभी पूरी तरह जिला अस्पताल पर निर्भर हैं। निजी ब्लड बैंक में रिप्लेसमेंट के बिना रक्त नहीं दिया जाता है। वे मरीजों को इंकार कर सकते हैं लेकिन हम ऐसा नहीं कर सकते। हमें स्पष्ट निर्देश हैं कि गंभीर स्थितियों में रिप्लेसमेंट फ्री ब्लड उपलब्ध कराया जाना है।

रक्तदान की समस्याएं

जरूरत और उपलब्धता का अंतर
जिला अस्पताल के रक्तकोष अधिकारी डॉ. अशाेक कुमार ने बताया कि जिले की आबादी के अनुपात में बहुत कम ब्लड डोनेशन हो रहा है। जबकि हर साल 10 हजार यूनिट ब्लड डोनेट होना चाहिए। हमें औसतन 1000 से 1200 यूनिट ही मिल रहा है।

समान जागरुकता नहीं
जिले में सभी जगह समान जागरुकता नहीं है। इस साल हमने 2 हजार यूनिट ब्लड एकत्रित किया लेकिन इसमें 75 फीसदी योगदान राघौगढ़-आरोन का रहा। अकेले राघौगढ़ से ही एक हजार यूनिट ब्लड डोनेट हुआ। चांचौड़ा-बीनागंज की स्थिति खराब है। इस साल शहर भी पिछड़ गया। बमोरी का भी यही हाल है।

रक्तदाता ग्रुप

डॉ. कुमार ने बताया शहर में रक्तदाता ग्रुपों की संख्या खूब है। जरूरत के वक्त पर वे तुरंत हाजिर भी हो जाते हैं। पर यह लोग डोनेशन कैंप में नहीं आते। यह एक समस्या है। तुरंत ब्लड लेकर चढ़ाने के दौरान उसकी ठीक से जांच नहीं हो पाती। डोनेशन कैंप में मिलने वाले ब्लड के नमूनों की जांच भोपाल से कराई जाती है। जब आपात स्थिति में ब्लड डोनेट होता है तो हम अपने स्तर पर ही जांच कर पाते हैं।

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