गुना नगरपालिका अध्यक्ष भाजपाई या निर्दलीय!:कांग्रेस का आरोप: BJP नोटिस-नोटिस खेल रही; पढ़िए पूरा मामला

गुना2 महीने पहले
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नगर पालिका अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह का फोटो। फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
नगर पालिका अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह का फोटो। फाइल फोटो।

गुना नगरपालिका चुनाव का पॉलिटिकल ड्रामा अभी तक थमा नहीं है। कांग्रेस ने जहां बागियों पर कार्यवाई कर दी, वहीं भाजपा नोटिस तक ही सीमित है। 6 पार्षदों को नोटिस जारी कर 7 दिन में जवाब मांगा गया था। 15 दिन से ज्यादा गुजर जाने के बाद भी भाजपा कोई निर्णय नहीं ले पाई है, जबकि सभी पार्षदों ने नोटिस का जवाब जिलाध्यक्ष को दे दिया है। जिलाध्यक्ष का कहना है कि उन्होंने पार्षदों के जवाब को प्रदेश अनुशासन समिति को भेज दिया है। अब अंतिम निर्णय वही करेगी।

यह था मामला

नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव के मामले को लेकर भाजपा ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 4 पार्षदों को नोटिस जारी किये थे। जिला मंत्री ने सभी को नोटिस भेजकर 7 दिन में जवाब मांगा था। अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा मैंडेट के खिलाफ चुनाव लड़ने और वोटिंग करने पर इन सभी को नोटिस दिए गए थे। अध्यक्ष का चुनाव हारीं भाजपा प्रत्याशी सुनीता रविन्द्र रघुवंशी ने वरिष्ठ नेतृत्व से शिकायत की थी। इसके बाद पार्टी ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 4 पार्षदों को पार्टी मैंडेट के खिलाफ जाने पर नोटिस जारी किए थे। इनमे अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता, उपाध्यक्ष धर्म सोनी, पार्षद वार्ड 16 दिनेश शर्मा, वार्ड 18 कैलाश धाकड, वार्ड 3 बबीता राजेश साहू और वार्ड 9 सुमन लालाराम लोधा को नोटिस जारी किया है।

कांग्रेस ने भी दिया था पार्षद को नोटिस

उधर कांग्रेस ने भी वार्ड 34 के पार्षद सचिन धूरिया को नोटिस दिया था। उन पर आरोप था कि 27 सितंबर को हुई परिषद की बैठक में उन्होंने पार्टी गाइडलाइन के खिलाफ काम किया था। दरअसल 27 सितंबर 2022 को आयोजित हुए गुना नगर पालिका के पहले सम्मेलन में सचिन धूरिया ने पार्टी की गाइडलाइन के विपरीत मत दिया था। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष शेखर वशिष्ट से चर्चा के दौरान दी गई सफाई से भी सचिन अगले दिन मुकर गए। नेता प्रतिपक्ष शेखर वशिष्ट ने जिलाध्यक्ष और वरिष्ठ नेतृत्व को सचिन के विरोधाभासी रवैया से अवगत कराया था। कांग्रेस जिला अध्यक्ष हरिशंकर विजयवर्गीय ने बताया है कि पार्षद सचिन को अनुशासनहीनता का दोषी पाया गया है। उनका स्पष्टीकरण भी विरोधाभासी था। मीडिया के सामने आकर वह दलील रहे थे कि वार्ड में विकास कार्य कराने के लिए उन्होंने भाजपा और नगरपालिका अध्यक्ष का साथ दिया है। इसके बाद पार्टी ने पार्षद सचिन धूरिया को पार्टी से 6 वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया। इससे पहले ही कांग्रेस अपने एक नेता पर कार्यवाई कर चुकी है। पार्षद सुनीता बसंत शर्मा पर पार्टी ने कार्यवाई की थी।

भाजपा से कांग्रेस के सवाल

कांग्रेस बागी पार्षदों पर कार्यवाई करने के बाद अब भाजपा से सवाल कर रही है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष का कहना है कि सचिन के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है और उन्हें 6 वर्ष तक के लिए पार्टी की सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया है। इस तरह कांग्रेस की ओर से कड़ा संदेश देने का प्रयास किया गया है कि संगठन की गाइडलाइन के विपरीत जाने वालों के खिलाफ पार्टी सख्त से सख्त कार्यवाही करेगी। उधर सत्ताधारी दल भाजपा में फिलहाल नोटिस का खेल जारी है और वह पार्टी के विपरीत गतिविधियां करने वाले पार्षदों को अब तक बाहर करने का हौसला नहीं दिखा पाई है। ऐसे में कांग्रेस ने यह कार्यवाही कर बता दिया है कि उनके लिए अनुशासन और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आदेश ही सर्वोपरि है। संख्याबल कोई मायने नहीं रखता।

आखिर नपाध्यक्ष निर्दलीय या भाजपा के?

उधर एक सवाल अभी भी बना हुआ कि आखिर गुना नगरपालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता भाजपा की हैं या निर्दलीय। कुछ दिन पहले ही भाजपा के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव गुना के दौरे पर पहुंचे। यहां जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिकरवार ने उन्हें बताया कि गुना में नगरपालिका अध्यक्ष निर्दलीय हैं। भाजपा यहां विपक्ष में है। उधर नगरपालिका अध्यक्ष ने मुरलीधर राव से मुलाकात की। उन्होंने दावा किया कि 17 पार्षदों के उन्हें समर्थन हैं। अगर वह अध्यक्ष का चुनाव नहीं लड़ते तो कांग्रेस का अध्यक्ष बन जाता। इसलिए उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया। जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिकरवार का कहना है कि जिन पार्षदों को नोटिस दिए गए थे, उनके जवाब मिल गए हैं। सभी प्रकरणों को प्रदेश अनुशासन समिति को भेज दिया गया है। समिति का जो भी निर्णय आएगा, उसके अनुसार कार्यवाई की जाएगी।