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इनसाइड स्टोरी ऑफ 'नाम वापसी':पहले वो-पहले वो के चक्कर में नहीं हो पाए नाम वापस; जानिए...आखिरी 15 मिनिट में क्या-क्या हुआ

गुना6 महीने पहले

गुना जिला पंचायत चुनाव के लिए शुक्रवार को स्थिति साफ हो गति। 29 उम्मीदवारों के फॉर्म वापस लेने के बाद अब मैदान में 148 उम्मीदवार बचे हैं। नाम वापसी का दिन गहमा-गहमी भरा रहा। सबसे ज्यादा चौकाने वाला वक़्त वार्ड 16 से श्यामलाल मीना का नाम वापस लेना रहा। अपने दामाद के समर्थन में उन्होंने अपना नाम वपस ले लिया। वहीं पूर्व विधायक ममता मीना और जिला पंचायत अध्यक्ष अर्चना चौहान के प्रतिनिधि फॉर्म वापस लेने 5 मिनिट पहले पहुंचे, लेकिन दोनों में से किसी ने नामांकन वापस नहीं लिया। पढ़िए...आखिरी के 15 मिनिट में कलेक्टर न्यायालय कक्ष में क्या-क्या हुआ और नाम वापसी की बिसात में ममता मीना ने कैसे कांग्रेस को मात दी...

पहले पिछले 10 दिनों का किस्सा

30 मई से नामांकन शुरू हुए। 3 जून को पूर्व विधायक और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ममता मीना ने वार्ड 18 से अपना नामांकन दाखिल किया। उनके पति रिटायर्ड IPS रघुवीर सिंह मीणा ने भी वार्ड 16 से अपना फॉर्म भर दिया। 6 जून को श्यामलाल मीना और उनके दामाद ने वार्ड 16 से अपना नामांकन भरा। इसी दिन IRS की पत्नी प्रियंका मीना(पेंची) ने वार्ड 18 और उनके देवर अनिरुद्ध मीना ने वार्ड 16 से पर्चा भरा। नामांकन का समय खत्म होने के मात्र डेढ़ घंटे पहले ही निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष अर्चना चौहान ने भी ममता मीना कर खिलाफ वार्ड 18 से अपना नामांकन दाखिल कर सबको चौंका दिया। क्योंकि माना जा रहा था कि इस बार वह चुनाव नहीं लड़ेंगी।

8 जून, दिन- बुधवार, स्थान-बीनागंज

मीना समाज ने एक बैठक आयोजित की। वार्ड 16 और 18 से अधिकतर मीना समाज के ही उम्मीदवार आमने-सामने थे। लिहाजा, समाज की यह कोशिश रही कि आपसी सहमति बन और समाज मे एकजुटता बन जाए। समाज के दोनों संगठनों के मुअज्जिब लोग उस बैठक में मौजूद रहे। बैठक में यह चर्चा हुई कि वार्ड 16 से श्यामलाल मीना के दामाद को समर्थन दिया जाए। वहीं वार्ड 18 में भी ऐसा ही प्रयास किया जाए।

9 जून, दिन-गुरुवार

सुबह से ही यह अपुष्ट सूचनाएं आने लगीं कि पूर्व विधायक ममता मीना और उनके पति रिटायर्ड IPS दोनों समाज हित में अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। राजनैतिक गलियारों में यह बात आग की तरह फैली। प्रशासन के पास भी यह बात उड़ते-उड़ते पहुंची और IB तक ने इनपुट दिया कि ऐसी संभावना बन रही है। साथ ही अर्चना चौहान के भी फॉर्म वापस लेने की आशंकाएं बाजार में तैरने लगीं। यह माना जा रहा कि ममता मीना वापस लेती हैं तो अर्चना चौहान भी अपना नामांकन वापस ले लेंगी, क्योंकि ममता मीना की वजह और उनकी प्रतिद्वंदिता में ही अर्चना चौहान ने अपना पर्चा भरा था।

10 जून, दिन शुक्रवार(नाम वापसी का दिन)

सुबह कलेक्टर न्यायालय कक्ष खुलते ही 10:30 बजे जिला निर्वाचन अधिकारी फ्रैंक नोबल ए अपनी कुर्सी पर आकर बैठते हैं। उनके दाईं तरफ उप-जिला निर्वाचन अधिकारी सोनम जैन आकर बैठ जाती हैं। दाईं ओर नीचे की तरफ सभी कर्मचारी अपनी-अपनी टेबलों पर फाइलें संभालते हुए बैठ जाते हैं। कलेक्टर के सामने की तरफ उम्मीदवारों और प्रस्तावकों को बैठनेके लिए कुर्सियां लगी हुई हैं। कलेक्टर घोषणा करते हैं कि नाम वापसी का समय शुरू हो गया है। बाहर 8-10 पुलिसकर्मी मोर्चा संभालते हैं और आने वाले लोगों को बाहर लगी कुर्सियों पर बैठने का इशारा करते हैं।

2:45 बजे तक 29 नाम वापस

नाम वापसी शुरू होते ही प्रत्याशी और उनके प्रस्तावक कलेक्टर न्यायालय में पहुंचने लगते हैं। सुबह 11 बजे से ही नाम वापस होना शुरू हो जाते हैं। एक ही परिवार से दो लोगों के फॉर्म भरे गए थे। ऐसे में एक उम्मीदवार का फॉर्म वापस लेने के लिए वह कलेक्टर को आवेदन देते हैं। औपचारिकता पूरी करने के बाद कलेक्टर अकेले में उम्मीदवार से पूछते हैं- "क्या आप अपना नामांकन स्वेच्छा से वापस ले रहे हैं? किसी प्रकार का कोई दवाब तो नहीं? कोई प्रलोभन या डर तो नहीं?" उम्मीदवार के 'नहीं' कहने पर उनका नामांकन वापस होता है और उन्हें रसीद दे दी जाती है। दोपहर 2:45 तक 29 उम्मीदवार अपना पर्चा वापस ले लेते हैं।

नाम वापस लेते श्यामलाल मीना।
नाम वापस लेते श्यामलाल मीना।

नाम वापसी के आखिरी 15 मिनिट

दोपहर 1 बजे ही यह सूचना आती है कि ममता मीना और उनके पति गुना पहुंच गए हैं। वह कभी भी कलेक्ट्रेट पहुंच सकते हैं। लेकिन 2:45 तक भी वह नहीं पहुंचे। इसी बीच श्यामलाल मीना आते हुए दिखाई देते हैं। यह वहां मौजूद लोगों के लिए अचंभित करने वाली बात थी, क्योंकि यह माना जा रहा था कि इन्ही के लिए नाम वापसी करने समाज एकजुट हुए था। 2:52 पर वह कलेक्टर न्यायालय में पहुंचते हैं और अपना नामांकन वापस लेकर निकल जाते हैं। इस कक्ष के बाहर ममता मीना और अर्चना चौहान की राह सभी लोग देखते हैं।

समय दोपहर 2:52 बजे

अर्चना चौहान के प्रतिनिधि न्यायालय कक्ष में दाखिल होते हैं। उनके बाद ही एक और व्यक्ति(जिसका बाद में पता चलता है कि वह ममता मीना का प्रस्तावक है) भी आता है। वह टेबल पर जाकर औपचारिकता पूरी करना शुरू कर देता है। इसी बीच अर्चना चौहान का प्रतिनिधि धीरे से उनसे पूछता है कि वह किसका नामांकन वापस ले रहे हैं। वह कहता है ममता मीना का। वह दूसरे व्यक्ति से पूछता है कि आप? उसने कहा अर्चना चौहान का। यह सुनते ही ममता मीना के प्रतिनिधि अचंभित होकर कहते हैं- "अच्छा! अर्चना चौहान वापस ले रही हैं।" यह बोलते ही वह मोबाइल निकालकर किसी से बात करने की कोशिश करता है, लेकिन कलेक्टर उसे टोक देते हैं। वह कान से मोबाइल लगाकर बाहर निकल जाता है।

समय दोपहर 2:58 बजे

अब केवल दो मिनिट शेष हैं। SDM वीरेंद्र सिंह गेट पर आकर यह घोषणा करते हैं कि केवल दो मिनिट बचे हैं। कोई नाम वापस लेना चाहता है तो ले सकता है। ममता मीना के प्रतिनिधि फिर अंदर आते हैं और दस्तावेज वापस देने का कहते हैं। कलेक्टर कहते हैं कि वापस लेना है या नहीं? तीन बार उससे पूछा, लेकिन उन्होंने वापस लेने से मना कर दिया। इतने में ही नामांकन वापस लेने का समय समाप्त हुआ और निर्वाचन अधिकारी उठकर न्यायालय कक्ष से चले गए। अर्चना चौहान के प्रतिनिधि भी उठकर कमरे से बाहर निकल गए।

असमंजस में नहीं हो पाए नामांकन वापस

यह लगभग तय था कि ममता मीना और अर्चना चौहान अपना नामांकन वापस लेंगी। दोनों के प्रतिनिधि पहुंचे भी, लेकिन पहले आप-पहले आप के चक्कर मे किसी का भी नामांकन वापस नहीं हो पाया। अर्चना चौहान ने केवल ममता मीना की वजह से अपना नामांकन दाखिल किया था। क्योंकि दोनों पुरानी प्रतिद्वंदी मानी जाती हैं। इनमे से एक भी कोई नामांकन वापस ले लेता तो तुरंत दूसरा भी वापस ले लेता। अब वार्ड 18 में तीन प्रत्याशी मैदान में हैं- ममता मीना, प्रियंका मीना और अर्चना चौहान। तीनों को चुनाव चिन्ह भी आवंटित हो गए हैं।