गुना के इन बच्चों की करुण पुकार सुनो सरकार:SAF जवान 5 महीने से लापता; विभाग ने ढूंढने की जगह थमाए नोटिस

गुना3 महीने पहले

गुना की SAF लाइन। यहां बने डुप्लेक्स में दो कमरों के क्वार्टर में SAF सिपाही विष्णु भगत का परिवार रहता है। घर में पत्नी और दो छोटे बच्चे। बेटी 7वीं और बेटा दूसरी कक्षा में पढ़ रहा है। विष्णु भगत पिछले 5 महीनों से गायब हैं। वह अप्रैल में राजगढ़ जिले के जालपा देवी मंदिर में ड्यूटी करने गए थे। 20 अप्रैल को सुबह चाय पीने गए, फिर नहीं लौटे। पत्नी लगातार कॉल करती रहीं, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। पिछले 5 महीनों से वे पुलिस अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं। बच्चे को पिता के आने का अब भी इंतजार है। पुलिस ने उन्हें खोजने की जगह परिवार को ही नोटिस थमा दिया है। इस नोटिस में उन्हें हाजिर होने के आदेश दिए गए हैं। जानिए, पूरी कहानी...

गायब सिपाही विष्णु भगत की पत्नी मगन भगत बताती हैं कि अप्रैल महीने में नवरात्रि चल रहे थे। पति की ड्यूटी राजगढ़ जिले में स्थित जालपा माता मंदिर में लगी थी। 18 अप्रैल को वह राजगढ़ से वापस घर लौटे। एक दिन रुके और फिर 19 अप्रैल को दोबारा राजगढ़ के लिए रवाना हो गए। 20 अप्रैल को सुबह 9 बजे के आस-पास उसने फोन पर बात हुई। उन्होंने कहा कि वह अब मंदिर के नीचे की तरफ चाय पीने जा रहे हैं। यही उनसे आखिरी बात हुई थी। कुछ देर बाद फिर फोन किया। घंटी जाती रही, लेकिन फोन नहीं उठा। सोचा काम मे व्यस्त होंगे, इसलिए फोन नहीं उठा रहे हैं। 20 अप्रैल की रात किसी तरह गुजरी। 21 अप्रैल की सुबह फिर फोन करना शुरू किया। अभी भी घंटी जा रही थी, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हो रहा था। दोपहर बाद तो घंटी जाना भी बंद हो गई। अब चिंता और बढ़ने लगी थी। उनके साथ वाले सिपाहियों को कॉल किया तो बोले उन्होंने भी सुबह ही देखा था। वह चाय पीने गए थे।

बेटी बोली: प्लीज हेल्प अस

बेटी भी अपने पिता को याद करते हुए भावुक हो गई। उसने बताया कि 18 अप्रैल से पहले पिता से बात हुई थी। हम लोग गांव जाने की तैयारी कर रहे थे। जैसे सबके पिता चिंता करते हैं, वैसे ही मेरे पिता ने भी कहा कि आराम से जाना। सभी का ध्यान रखना। जो भी हो मम्मी को बताना। सामान का ध्यान रखना। उसके बाद मेरी बात नहीं हुई। स्कूल में साथ वाले पूछते हैं कि तुम्हारे पापा क्या करते हैं, कहां हैं, पर मैं कुछ बोल नहीं पाती। मम्मी से पूछते हैं तो वो भी कुछ नहीं बतातीं। कह देती हैं कि ड्यूटी गए हुए हैं, लेकिन मुझे नहीं पता पापा कहां हैं। अंदर से लगता है कहां होंगे, कैसे होंगे, कब आएंगे। स्थिति बहुत खराब है। मैंने कभी सोचा नहीं था कि इतना बुरा टाइम देखने को मिलेगा।" बच्ची रोते हुए अंत में बस इतना ही कह पाती है- "प्लीज हेल्प अस।"

लापता SAF जवान विष्णु भगत।
लापता SAF जवान विष्णु भगत।

विभाग ने थमाए नोटिस

गायब सिपाही की पत्नी बताती हैं कि अधिकारियों के चक्कर लगा-लगा कर थक गए, लेकिन अभी तक कुछ पता नहीं चल सका है। DGP, CM, यहां तक कि प्रधानमंत्री तक को पत्र लिखे। SP राजगढ़ मदद कर रहे हैं, लेकिन अब पांच महीने हो चुके हैं। गुना में विभाग ने तीन नोटिस थमा दिए। इन नोटिस में उन्हें हाजिर होने के लिए कहा गया है। दो नोटिस गांव (छत्तीसगढ़) तक भेज दिए। अगर वो नोटिस ले पाते तो हाजिर ही हो जाते न। अभी तो उनका कुछ पता ही नहीं है। वो कहां हैं, कैसे हैं, विभाग ढूंढने की जगह नोटिस भेज रहा है। शुरू में पुलिस ने हमें चुप करा दिया, किसी से कुछ बोलने नहीं दिया। तभी बता दिए होते तो हो सकता है, जल्दी कार्रवाई हो जाती।

बच्चों की फीस कैसे भरें

मगन भगत बताती हैं कि दोनों बच्चे एक निजी स्कूल में पढ़ते हैं। बेटी की फीस तो माफ है, लेकिन बेटे की फीस हर दो महीने में 4.5 हजार रुपए भरनी पड़ती है। ऊपर से महंगाई का दौर है। ऐसे में एक हाउस वाइफ के लिए घर चलाना बहुत मुश्किल होता है। बच्चों की फीस, घर का खर्चा कैसे मैनेज करें। घर मे कमाने वाले इकलौते पति ही थे। विभाग को आवेदन देकर आर्थिक सहायता की मांग की, लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला। उनके PF के पैसे हैं, उन्हीं में से हमें कुछ दे दें, लेकिन वह भी नहीं दिया। अगर पड़ोसी मदद न करें तो जीना मुश्किल हो जाएगा। विभाग की तरफ से एक पैसे की मदद नहीं हुई। इन्ही कारणों की वजह से फिर लोग सुसाइड कर लेते हैं।

गुना में पहले भी ऐसा ही दो केस और हो चुके हैं, जिनमें गायब व्यक्ति के बारे में कुछ पता नहीं चल सका है। आरोन इलाके से 17 वर्षीय नाबालिग पांच वर्ष से गायब है। इसी तरह आत्माराम पारदी के गायब होने का मामला भी है, जिसमें अभी तक पुलिस की हाथ खाली हैं। उन दोनों के बारे में भी अभी तक कुछ पता नहीं चल सका है। एक मामले में हाई कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा। वहीं, दूसरे मामले में CID ने ईनाम घोषित किया है। उन दोनों केसों को भी जान लीजिए...

7 वर्ष से गायब आत्माराम पारदी

आत्माराम पारदी 7 वर्ष से लापता है। हालांकि उसके अपहरण और हत्या के आरोप भी पुलिस पर ही लगते रहे हैं। बता दें कि वर्ष 2015 में जिले के धरनावदा इलाके के खेजरा गांव का रहने वाला आत्माराम पारदी पुत्र स्व. हरिलाल पारदी गुमशुदा हो गया था। उसके परिवारवालों ने आरोप लगाया था कि थाने के लोग ही उसे अपने साथ ले गए थे, लेकिन वह घर नहीं लौटा। उन्होंने ही उसे मार दिया। उस समय यह मामला काफी चर्चित रहा था। तत्कालीन एसपी ने मामले की जांच की। उसके बाद आईजी ग्वालियर ने मामले की जांच को अपने हाथ में लिया था। बाद में सीआईडी ने जांच की थी। इसी साल मार्च में अपराध अनुसंधान विभाग भोपाल की तरफ से जारी प्रेस नोट के अनुसार थाना धरनावदा जिला गुना के एक अपराध में गुमशुदा (लापता) आत्माराम पारदी (25) को ढूंढने के काफी प्रयास किए गए, लेकिन आज दिनांक तक गुमशुदा का कोई पता नहीं चल सका है। एडीजी, सीआईडी कुमार सौरभ ने उसे ढूंढने के लिए ईनाम घोषित किया है। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति उसे ढूंढेगा या उसकी जानकारी देगा, उसे 20 हजार रुपए का ईनाम दिया जाएगा।

केरोसिन लेने निकली नाबालिग गायब

जिले के आरोन इलाके में 30 जुलाई 2017 की सुबह 11 बजे के आसपास 17 साल की नाबालिग घर से राशन दुकान पर मिट्टी का तेल लेने के लिए निकली थी। काफी देर तक जब वह वापस नहीं आई तो उसके पिता उसे ढूंढने निकले। पिता जब पहुंचे तो कंट्रोल की दुकान तो बंद थी। आस-पास वालों से पूछा तो उन्होंने भी नाबालिग को नहीं देखा था। पिता ने पूरे गांव के तीन चक्कर लगा दिए, लेकिन बेटी का कुछ पता नहीं चल सका। पिता ने कई दिनों तक थाने के चक्कर लगाए। तीसरे दिन जाकर उसकी बेटी की गुमशुदगी का आवेदन लिया गया। 3 अगस्त को पिता सुबह से 8 बजे तक थाने में बैठा रहा, तब जाकर उसका आवेदन लिया। तब भी पुलिस ने FIR दर्ज नहीं कि। 9 अगस्त को जाकर आरोन थाने में FIR दर्ज की गई। हालांकि उसके बाद भी नाबालिग को ढूंढने के पुलिस ने प्रयास नहीं किए गए। बाद में दो आरोपियों को पकड़ा गया, लेकिन उन्हें भी साक्ष्य के आभाव में छोड़ दिया गया। एक आरोपी ने यह तक कहा कि उसने नाबालिग के साथ रेप कर उसका मर्डर किया और तालाब में फेंक किया। इस मामले में तीन SIT भी बनाई गई, लेकिन पांच वर्ष में भी बच्ची का पता नहीं चल सका।

जब कहीं से न्याय नहीं मिला, तो बच्ची के पिता ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका दायर की। याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट सख्त हुई। थाना प्रभारी से लेकर SP, IG तक को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के सामने हाजिर होना पड़ा। कोर्ट की सख्ती के बाद ही पिछले महीने कोर्ट में हलफनामा देकर एक रोड मैप दिया। इसमे पुलिसकर्मियों को ऐसे केस में गहन विवेचना और पुलिसिया रवैये के ऊपर ट्रेनिंग देने की बात कही। कोर्ट ने 29 अगस्त तक ट्रेनिंग कर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा रहा, जिसके बाद ग्वालियर में दो दिवसीय ट्रेनिंग आयोजित की गई।

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