PM आवास के पैसे से पी गए शराब:गुना में किस्त लेकर कोई दूसरे राज्य चला गया तो किसी ने बाइक-मोबाइल का शौक पूरा किया

आशीष रघुवंशी (गुना)3 महीने पहले
चांचौड़ा इलाके में केवल नींव बनाकर छोड़ दी गई है। दूसरी किस्त मिलने पर भी काम नहीं किया गया।

देश में ऐसे कई जरूरतमंद लोग हैं, जो पीएम आवास के लिए भटक रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ पैसा मिलने के बाद भी कई हितग्राही आवास नहीं बना रहे। उन्होंने इन पैसों को दूसरे ही कामों में खर्च कर दिया। कई ऐसे हैं, जो आवास की किस्त लेकर दूसरे राज्यों में चले गए। कुछ शराब पी गए। जिले में ऐसे अधूरे पीएम आवास की लिस्ट बढ़ती जा रही है। कुछ मामले ऐसे हैं, जिनमें तीन वर्ष से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन आवास नहीं बन पाया।

पहले प्रक्रिया समझिए

बता दें कि PM मोदी की महत्वाकांक्षी PM आवास योजना वर्ष 2016 में शुरू हुई थी। इसके तहत शहरी इलाकों में आवास बनाने के लिए 2.50 लाख रुपए (3 किस्तों में) और ग्रामीण इलाकों में 1.20 लाख रुपए (4 किश्तों में) दिए जाते हैं। ग्रामीण इलाकों में पहली किस्त 25 हजार रुपए की दी जाती है। इन्हीं पैसों में हितग्राही को मकान बनाना होता है। लगभग 280 स्क्वायर फीट का साइज तय किया जाता है। बिल्डिंग कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि इतनी साइज के मकान को बनाने में कम से कम 2.80 लाख रुपए खर्च होते हैं। मजदूरी और मटेरियल को मिलाकर इतनी राशि खर्च हो जाती है। इतने में भी एक कमरा, किचन, लेट-बाथ ही तैयार हो पाते हैं। केवल उनका ढांचा और छत ही बनाई जा सकती है। फिर रंगाई-पुताई, खिड़की-दरवाजे अगर लगाना है, तो उन पर अलग खर्च होता है।

इन्हें मिलता है PM आवास

एक लाभार्थी पति, पत्नी और अविवाहित बेटियां/बेटे हो सकते हैं। एक लाभार्थी के पास पक्का घर नहीं होना चाहिए, जिसका अर्थ है कि घर उसके नाम पर या पूरे भारत में परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम पर नहीं होना चाहिए। किसी भी वयस्क को उसकी वैवाहिक स्थिति पर ध्यान दिए बिना पूरी तरह से एक अलग घर के रूप में माना जा सकता है।

ये आ रही समस्याएं

जिले में 3 हजार से ज्यादा पीएम आवास अधूरे पड़े हैं। जिनके पीछे कई कारण सामने आते हैं। पहला कारण बढ़ती हुई महंगाई है, जिसके कारण इतने कम पैसों में मकान बनाना संभव नहीं हो पाता है। दूसरा एक और जो कारण सामने आया है, वह अचंभित करने वाला है। हितग्राही के खाते में पैसा तो आ जाता है, लेकिन वह इस पैसे का उपयोग दूरी जगह कर लेते हैं। मकान बनाने की जगह वह दूसरे काम कर लेते हैं। कई मामले ऐसे सामने आए, जिनमें आवास बनाने के लिए मिले पैसों को हितग्राही ने गाड़ी, मोबाइल खरीदने में खर्च कर दिया। कोई पैसे लेकर दूसरे राज्य मजदूरी करने चला गया। अब कर्मचारी उसे तलाश रहे हैं, लेकिन वह मिल ही नहीं रहा। जानिए, कुछ ऐसे ही केसों के बारे में जहां हितग्राही ने पैसों को दूसरी जगह खर्च कर दिया।

केस-1: पहली किश्त से पी ली शराब

गुना जनपद की म्याना ग्राम पंचायत के म्याना गांव में एक परिवार को वर्ष 2021-22 पीएम आवास स्वीकृत हुआ। आवास बनाने के लिए पहली किस्त के 25 हजार रुपए उसके बैंक खाते में जमा कर दिए गए। उसने मकान बनाना शुरू नहीं किया। इस किस्त से मकान की नींव डालनी थी, जिसके बाद उसे दूसरी किस्त मिलती। मकान न बनने का कारण जब उनसे पूछा गया, तो महिला ने बताया कि इस पैसे से उसका पति शराब पी गया। इसलिए मकान नहीं बन पाया।

केस-2: घर चलाने में पैसे खर्च

इसी तरह म्याना के ही एक परिवार को वर्ष 2021-22 में ही आवास स्वीकृत हुआ। पहली किश्त के रूप में 25 हजार रुपए भी मिल गए, लेकिन उन्होंने मकान बनाना शुरू नहीं किया। जब उनसे कारण पूछा तो बताया गया कि घर के कामों में जरूरत के लिए पैसा खर्च कर दिया। ऐसे में अब उनसे कहा गया कि कहीं से भी पैसे की व्यवस्था कर मकान बनाना शुरू करें।

राशि को दूसरे कामों में खर्च करने के कारण अब कई मकान आधे-अधूरे पड़े हुए हैं।
राशि को दूसरे कामों में खर्च करने के कारण अब कई मकान आधे-अधूरे पड़े हुए हैं।

केस-3: पैसे लेकर गुजरात चले गए

डूंगासरा पंचायत के गोमचीखेड़ा में एक परिवार को 2019-20 में पीएम आवास स्वीकृत हुआ। उन्हें भी 25 हजार रुपए की पहली किस्त जारी हुई। मकान बनाने की जगह परिवार पलायन कर गया। जानकारी मिली कि वह गुजरात चला गया है। न तो अब वह वापस लौट रहे और न ही उनसे बात हो पा रही है। ऐसे में अब मकान बनना शुरू ही नहीं हो पाया। राशि भी बेकार गई।

केस- 4: 80 हजार दूसरे काम में खर्च

शहर से 8 किमी दूर सिंघाडी पंचायत के बरोदिया खुर्द गांव में वर्ष 2017-18 में पीएम आवास स्वीकृत हुआ। उन्हें पहली किस्त 25 हजार की मिली। इससे उन्होंने मकान का बेस बना लिया। पहला काम पूरा होने के बाद जिओ-टैग हुआ और दूसरी किश्त उनके खाते में आई। इस बार 80 हजार रुपए मिले। दूसरी किस्त मिलने के बाद उन्होंने मकान का काम आगे नहीं बढ़ाया। उन पैसों को उन्होंने दूसरे काम में खर्च कर दिया। अब पिछले 4 वर्षों से मकान का काम अधूरा पड़ा हुआ है। वह आगे का मकान नहीं बना रहे हैं। इसलिए यह अधूरा बता रहा है। उनसे कई बार बोलने के बाद भी वह काम नहीं कर रहे हैं।

ये केवल चंद केस हैं। इसी तरह के सैकड़ों केस जिले में हैं, जहां हितग्राही ने पैसे तो ले लिए, लेकिन काम नहीं किया। ग्राम पंचायत सचिव, रोजगार सहायक अब उनके घरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक एक किस्त का काम नहीं होगा, दूसरी किस्त जारी नहीं होती है। इस कारण वर्षों से पीएम आवास अधूरे पड़े हुए हैं। कई बार निर्देशित करने के बाद भी हितग्राही काम नहीं कर रहे हैं।

तीन हजार पीएम आवास अधूरे

जिले में वर्ष 2016-17 से 2021-22 तक 55 हजार पीएम आवास बनाने का लक्ष्य था। इनमें से अधिकतर बन चुके हैं, लेकिन लगभग 3200 पीएम आवास अधूरे हैं। इनके न बनने के पीछे वही सब कारण सामने आ रहे हैं, जिनमें कई ने राशि लेने के बाद भी काम शुरू नहीं किया। कई हितग्राहियों ने थोड़ा-बहुत काम कर लिया, लेकिन दूसरी किश्त मिलने के बाद काम आगे नहीं बढ़ाया।

गुना में तीन हजार से ज्यादा पीएम आवास अधूरे पड़े हैं।
गुना में तीन हजार से ज्यादा पीएम आवास अधूरे पड़े हैं।