गुना में तीन पुलिसकर्मियों पर कोर्ट ने की FIR:युवक से मारपीट करने का था आरोप; जानिए पूरा मामला

गुना2 महीने पहले

जिले के तीन पुलिसकर्मियों और उनके एक एजेंट पर मुकदमा चलाया जाएगा। कोर्ट ने चारों पर FIR दर्ज की है। इनमे एक SI, एक ASI, एक आरक्षक और एजेंट शामिल हैं। इन पर एक व्यक्ति को गैर कानूनी तरीके से प्रतिबंधित करने, उसके साथ मारपीट और गाली-गलौच करने और धमकी देने का आरोप था। फरियादी ने कोर्ट में प्राइवेट इस्तगासा लगाई थी। एडवोकेट मजहर आलम ने प्राइवेट इस्तगासा लगाया था। JMFC निशांत मिश्रा की अदालत ने आदेश दिए हैं।

यह था मामलाजिले के रुठियाई इलाके के रहने वाले जमील खान ने अपने एडवोकेट के जरिये कोर्ट में प्राइवेट इस्तगासा लगवाया था। इसमे उन्होंने बताया कि 28 मई को वह अपने घर से गुना आया हुआ था। वह अपने साथ 1.20 लाख रूपये लिये हुये था। चूना भट्टी पर किसी की शादी थी और वहां पर रात हो जाने के कारण वह वहीं पर रूक गया। रात लगभग 10:30 बजे मोती गूजर, महेश सिपाही, टोकलू दरोगा उसके भतीजे के घर(जहां जमील रुका हुआ था) पहुचें। उससे(जमील से) कहने लगे कि दरोगाजी उसे बुला रहे है। गाडी में उमेश यादव(तत्कालीन थाना प्रभारी सिरसी) बैठा हुआ था। जैसे ही वह गाड़ी में बैठा, तब ये सभी उसके साथ गाली-गलौंच करने लगे। उसके साथ थाने में कपड़े उतारकर लात-घूसों से मारपीट की। इससे उसके सिर, पीठ व हाथ में चोट आई थी।

तबियत बिगड़ी तो रास्ते मे उताराजमील ने अपने आवेदन में बताया कि ये चारों जब उसे अपनी गाडी से अन्यत्र कहीं ले जाने लगे, तब उसकी तबीयत खराब होने लगी। ये सभी उसे रास्ते में उतारकर अपनी गाड़ी से वापस चले गये थे। सरकारी अस्पताल में वह दो-तीन दिन तक भर्ती रहा था। कुछ समय बाद जब उसने घटना के संबंध में आरक्षी केन्द्र में कार्यवाही किये जाने का प्रयास किया, तब पुलिसकर्मी के द्वारा कोई भी कार्यवाही नहीं की गई।

कोर्ट की ली शरण

जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो जमील खान ने इन चारों के खिलाफ न्यायालय में प्राइवेट इस्तगासा लगाया। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मेहरूनिशा, सोनू उर्फ सुनीता तथा घटना दिनांक को आरक्षी केन्द्र सिरसी में पदस्थ रहे प्रधान आरक्षक करनसिंह के कथन प्रस्तुत किये है। सभी गवाहों ने इस्तगासा में दी गयी कहानी का समर्थन किया। पुलिसकर्मी करनसिंह ने यह व्यक्त किया है कि घटना दिनांक को वह आरक्षी केन्द्र सिरसी में पदस्थ था। उसके समक्ष ही अभियुक्तगण ने परिवादी के साथ मारपीट की थी। उसने यह भी व्यक्त किया है कि परिवादी जमील खान को उमेश यादव के द्वारा गिरफतार भी नहीं किया गया था। उसे अवैध रूप से निरूद्ध किया गया था। बयानों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा की "ऐसी स्थिति में परिवाद पत्र में वर्णित अंर्तवस्तुओं के आधार पर यह स्पष्ट है कि प्रस्तावित अभियुक्तगण के द्वारा अपने पदीय कर्तव्य के अंतर्गत निर्वहित कार्य में परिवादी के साथ कार्यवाही नहीं की गई है। ऐसी स्थिति में प्रस्तावित अभियुक्तगण के द्वारा भादंसं की धारा 342, 323, 294, एवं धारा-506भाग-2 के अंतर्गत प्रथम दृष्टया रूप से अपराध कारित किया जाना दृष्टिगत है।" कोर्ट ने अपने आदेश में चारों के खिलाफ FIR दर्ज की है। उनके खिलाफ किसी को अवैध रूप से कब्जे में रखना, मारपीट, गली-गलौच और धमकी देने की धाराओं में FIR दर्ज की है। एडवोकेट मजहर आलम ने बताया कि चारों पर अब मुकदमा चलाया जाएगा। उन्हें समन जारी किए जाएंगे।