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वेबीनार का आयोजन:प्रकृति संतुलन के साथ ही विकास कल्याणकारी

अंबाह13 दिन पहले
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  • प्रकृति संतुलन को लेकर पीजी कॉलेज में हुआ वेबीनार का आयोजन

विकास मानव की उपज है। मानव ने प्राकृतिक तत्वों का दोहन कर अपने विवेक से विकास को अंजाम दिया है। अतः स्वाभाविक रूप में विकास मानव जनित और मानव केंद्रित प्रक्रिया है। विकास आवश्यक था आज भी है, किन्तु प्रकृति के संतुलन के साथ ही विकास कल्याणकारी है। यह शोध व्याख्यान गहिरागुरु विश्वविद्यालय सरगुजा के राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय वेबीनार में पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शिवराज सिंह तोमर रविवार को व्यक्त कर रहे थे।

डॉ. तोमर ने कहा कि प्रकृति के अविवेक पूर्ण अंधाधुंध दोहन से पर्यावरण में असंतुलन पैदा हो गया है। जिसके भयावह परिणाम अनेकानेक त्रासदियों के रूप में सामने आने लगे। हमें विकास को लगातार बनाए रखना है, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ। भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए संसाधनों को सुरक्षित रखेंगे तभी विकास सतत हो सकेगा। विकास की निरंतरता, मानव कल्याण और संसाधन सतत विकास का ध्येय है। वेबीनार में विश्वविद्यालय की कुलपति सुश्री जेनेविवा किंडो, डॉ. समरेंद्र सिंह सहित अन्य जिलों के अधिकारियों द्वारा भागीदारी की गई।

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