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प्रशासन की अनदेखी:कोरोना काल में 10 गुना तक बढ़ा बायोवेस्ट, अब खर्च बचाने के लिए खुले में फिंकवा रहे

अंबाह14 दिन पहलेलेखक: अजय जैन
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  • इस्तेमाल की हुई सिरिंज, मास्क और ग्लव्स के जगह-जगह लगे ढेर
  • जौरा, कैलारस, सबलगढ़, पहाड़गढ़, अंबाह, पोरसा में अस्पतालों के पास से नहीं उठवाया जा रहा बायोवेस्ट

कोरोना महामारी के इस दौर में जिले के सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मेडिकल वेस्ट का निस्तारण बड़ी चुनौती बना हुआ। क्योंकि सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में मेडिकल वेस्ट दो से दस गुना तक बढ़ गया है। उधर निस्तारण का खर्च बचाने के लिए सरकारी व निजी अस्पताल मेडिकल वेस्ट को सामान्य कचरे में मिलाकर खुले में फेंक रहे हैं, जो कई बीमारियों का कारण बन सकता है। हालांकि कुछ जगह आगरा की कंपनी का वाहन मेडिकल वेस्ट उठाने आता है, लेकिन यह पैसा बचाने के फेर में रोजाना न आकर तीसरे दिन आता है।

बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधक मौन रहता है। ताकि वे मेडिकल कचरे के निस्तारण पर होने वाला खर्च कम कर सकें। हैरानी इस बात की है कोरोना संक्रमण के इस काल में मेडिकल वेस्ट का निस्तारण उचित तरीके से सही समय पर हो, इस ओर जिला प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का ध्यान नहीं है। इस संबंध में दैनिक भास्कर ने शनिवार को अंचल के बीएमओ व निजी अस्पताल संचालकों से चर्चा कर पड़ताल की तो स्थिति काफी चौंकने वाली सामने आई।

मेडिकल वेस्ट उठाने तीसरे दिन आता है वाहन
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कैलारस के बीएमओ डॉ एसआर मिश्रा ने बताया कि कोरोना काल में बायो मेडिकल वेस्ट (इस्तेमाल की गई सुई, ग्लब्स, मास्क, प्लास्टर, पट्‌टी आदि) दो से दस गुना बढ़ गया है। बावजूद इसके अनुबंधित आगरा की कंपनी का वाहन बायोमेडिकल वेस्ट उठाने के लिए तीसरे दिन आता है। जबकि प्रावधान के मुताबिक अस्पताल से 48 घंटे के अंदर बायोमेडिकल वेस्ट जाना चाहिए। अनुबंधित कंपनी के ड्रायवर पैसा बचाने के चक्कर में 48 घंटे के बजाए 60 से घंटे की अवधि में मेडीकल वेस्ट उठा रहे हैं।

जौरा अस्पताल में भी रोजाना नहीं आता वाहन
जौरा के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ मनोज त्यागी ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 30 बैड की सुविधा है। प्रत्येक बेड से मेडिकल वेस्ट उठाने के लिए 10 रुपए का भुगतान करने का प्रावधान है। इस लिहाज से अस्पताल प्रबंधन प्रतिदिन 300 यानि एक महीने में 12 हजार रुपए खर्च कर सकता है। लेकिन अनुबंधित कंपनी का वाहन रोजाना मेडिकल वेस्ट उठाने नहीं आता। ऐसी स्थिति नगर परिषद के वाहन से मेडिकल वेस्ट उठवा रहे हैं। प्राइवेट अस्पतालों की भी यही स्थिति है।

मेडीकल वेस्ट उठाने रोज नहीं आता वाहन
बीएमओ डॉ डीएस यादव ने बताया कि सिविल अस्पताल का मेडिकल वेस्ट उठाने अनुबंधित कंपनी का वाहन रोजाना नहीं आता। इसके अलावा नगर पालिका का वाहन भी बुलाने पर आता है। शनिवार को भास्कर टीम पे पड़ताल की तो यहां शवगृह सहित कर्मचारी आवासों के आसपास कई दिनों से गंदगी पसरी है। जिसमें बहुतायत मात्रा में मेडीकल कचरा शामिल था। कचरे के ढेर में भारी मात्रा में इस्तेमाल किए गए ग्लब्स, मास्क और सिरिंज बिखरीं पड़ीं मिली। जबकि इसी मार्ग से अस्‍पताल में काम करने वाले कर्मचारी व मरीजों के परिजन दिनभर निकलते हैं। इसके अलावा पोस्टमार्टम होने पर मृतक के परिजन, पुलिस कर्मचारी आदि की भी यहां भीड़ रहती है। यदि समय रहते इस कचरे को परिसर से नहीं हटाया गया तो इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ सकता है।

मवेशी खा रहे इस्तेमाल किए ग्लव्स और मास्क
सफाई कर्मचारी अस्पताल के विभिन्न वार्डों की सफाई करने के बाद मेडिकल कचरा शवगृह व कर्मचारी आवासों के पास डाल रहे हैं। कई दिनों का कचरा इकट्‌ठा होने से इस परिसर में दुर्गंध फैल रही है। इसके अलावा यहां आनेवाली मवेशियां इस कचरे में मुंह मारती हैं। जिससे न केवल मवेशियों को जान का खतरा बना हुआ है, बल्कि संक्रमण फैलने का भय है। इसके अलावा हवा चलने पर मेडिकल वेस्ट पूरे अस्पताल परिसर में बिखर रहा है, जो कोरोना महामारी को फैलाने की बड़ी बजह बन सकता है।

संक्रमण फैलने का बना रहता है खतरा
डॉक्टरों की माने तो बायोमेडिकल वेस्ट यानि अस्पताल से निकलने वाला वह कचरा है जिसमें कीटाणु, वायरस या अन्य परजीवी होते हैं, जो आसानी से नहीं मरते। यह वायरस व परजीवी तेजी से वातावरण में एक से दूसरी जगह फैल सकते हैं। ऐसे कचरे को अगर कोई इंसान या जानवर छू ले तो यह कीटाणु, जीवाणु व वायरस शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। जिससे व्यक्ति गंभीर बीमार हो सकता है तथा उसकी जान को खतरा हो सकता है। इसलिए बायो मेडिकल वेस्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित करना जरूरी है।

संबंधित को नोटिस जारी कर कार्रवाई करूंगा
^मैं बाबू से पूछकर अभी पता करता हूं कि अस्पतालों का मेडिकल वेस्ट उठाने का काम आगरा की कौनसी कंपनी कर रही है। अस्पतालों से निकलने वाला मेडिकल वेस्ट रोजाना नहीं उठाया जा रहा है। इस संबंध में मुझे एक बीएमओ ने नहीं बताया है। मैं इस संबंध में सोमवार को नोटिस जारी कर प्रभावी कार्रवाई करूंगा। - डॉ. एडी शर्मा, सीएमएचओ मुरैना

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