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समस्या:बसें बंद, क्षमता से ज्यादा सवारी भरकर दौड़ रहीं जीप-ऑटो

अंबाह18 दिन पहले
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  • अंचल के रूट पर दौड़ रहे खटारा वाहन, यात्रियों से वसूले जा रहे अिधक रूपए, जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान

कोरोना कर्फ्यू में लगाई गई बंदिशों के कारण इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में बसों का परिचालन बंद है। ऐसे में ग्रामीण ऑटो, मैजिक वाहन से आवाजाही कर रहे हैं। आवागमन के साधन बंद होने से कुछ लोगों ने अपने कंडम वाहनों को अवैध कारोबार में लगा दिया है तथा वे यात्रियों से मनमाना पैसा वसूल रहे हैं। यह लेग अधिक मुनाफा कमाने के फेर में क्षमता से अधिक सवारियां बैठा रहे हैं। इस हाल में अगर इनमें एक भी व्यक्ति संक्रमित हुआ तो ग्रामीण इलाकों में कोरोना महामारी काफी बढ़ सकती है।

यहां बताना जरूरी है कि तहसील मुख्यालय से अलग-अलग ग्रामीण इलाकों के लिए करीब 20 निजी बसें संचालित की जाती हैं। इन बसों के अलावा जीप, मैजिक व ऑटो भी चलते हैं। 19 अप्रैल से लगाए गए कोरोना कर्फ्यू के बाद अब एक मई से बसें बंद कर दी गई हैं। पहले बसें चलने से लोगों को कोरोना कर्फ्यू में भी सफर को लेकर कुछ सुविधा थी, लेकिन एक मई से उत्तरप्रदेश एवं राजस्थान की बसों का संचालन बंद कर दिया गया है। इसके बाद छोटे वाहनों का ही विकल्प ग्रामीणों के पास बचा है काम की तलाश में मजदूरों की आवाजाही हो रही है, लेकिन साधन नहीं होने से ओवरलोडिंग बढ़ गई है।

मनमाना किराया वसूल रहे छोटे वाहन चालक: यात्री बस बंद होने से वर्तमान में ई-रिक्शा चालक अंबाह से पिनाहट घाट तक किराया 50 रुपये वसूल रहे हैं। जबकि बस के जरिए यह किराया मात्र 20 रुपए है। इसी तरह अंबाह से पोरसा तक का किराया 30 रुपए जो बस से दस रुपये लगता है। अंबाह से मुरैना का किराया 100 रुपए तक वसूला जा रहा है, जो चालीस रुपये है।

राजस्थान की तर्ज पर निजी बस चलाने की मिले अनुमति
तहसील मुख्यालय पर आसपास के गांवों से मजदूर काम की तलाश में आते हैं। निर्माण कार्य में प्रतिदिन उन्हें 300 से 350 रुपये की मजदूरी मिलती है। श्रमिक ग्रामीण दिनेश ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन के लिए चल रहे छोटे वाहनों में ओवरलोडिंग से संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा है। इस कारण सरकार को कुछ निजी बसों को राजस्थान की तर्ज पर चलाने की अनुमति देना चाहिए।

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