मुनि विज्ञ सागर महाराज ने कहा:अपने जीवन में सुख चाहते हो तो कर्म अच्छे करो: विज्ञ सागर

अंबाह3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

जीवन में सुख चाहते हो तो कर्म अच्छे करो। अच्छे कर्म करने वाला कभी दुखी नहीं होता। यह बात जैन मुनि विज्ञ सागर महाराज ने प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि नैतिकता, सद्भावना का संदेश देने वाले शांतिदूत आचार्य श्री विनम्र सागर जी के पावन प्रवास से अंबाह के लोग धन्य महसूस कर रहे हैंै। आचार्य के आगम से आपको धर्मलाभ प्राप्त हो रहा है। शनिवार को प्रवचन श्रृंखला में जैन बगीची में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए जैन मुनि विज्ञ सागर जी महाराज ने कहा कि तीन सकार- साहित्य सृजन, साधना और संघीय सेवा में सभी आगे बढ़ें।

कार्य में सक्षमता रहे और साधना में निरंतरता रहे, चित्त में समाधि रहे यही सच्ची साधना है। वर्चुअल अमृत देशना में विज्ञ सागर ने कहा कि हमारी सृष्टि में अनेक प्रकार के प्राणी है। उनमें मनुष्य सबसे कम संख्या में होते है। मनुष्यों में भी आपस में समानता नहीं होती। किसी में बल की दृष्टि से तो किसी में रूप, ज्ञान, आध्यात्मिकता, भौतिकता, स्वास्थ्य जैसी अनेक दृष्टियों से भिन्नता होती है। जैन सिद्धान्त के अनुसार प्रत्येक कालचक्र में कुछ उत्तम पुरुष होते है।

20 तीर्थंकर, 12 चक्रवर्ती, 9 वासुदेव, 9 बलदेव इस प्रकार कुल चौवन उत्तम पुरुष होते है। जंबू-द्वीप के भरत क्षेत्र में प्रत्येक अवसर्पिणी और उत्सर्पिणी काल में सृष्टि नियमानुसार चौबीस तीर्थंकर होते हैं। ग्रंथों में नौ वासुदेव और बलदेव के पिताओं का वर्णन कर इनकी महत्ता और गौरव को अभिमंडित किया गया है। मुनिश्री ने कहा कि वह माता-पिता यश-प्रसिद्धि पाते है जिनकी सुयोग्य संतानेें उच्चता के शिखर को प्राप्त करती है। तीर्थंकर भगवान धर्म के अधिकृत प्रवक्ता होते है।

खबरें और भी हैं...