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अटेर में लापरवाही:छात्राओं को नहीं बांटी साइकिल, तीन साल से स्कूलों में हो रहीं कंडम

भिंड18 दिन पहले
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  • अटेर, सुरपुरा, जवासा, पीपरी एवं किशुपुरा स्कूलों में 841 साइकिले छात्राओं को बांटने भेजी थीं, अब कंडम हो रहीं

प्रदेश सरकार का सोचना है कि गांव में स्कूल घर से काफी दूर होते हैं। ऐसे में छात्राओं के अभिभावक स्कूल छुड़वाकर घर बैठा देते हैं और वे आगे की शिक्षा तक ग्रहण नहीं कर पाती थीं। इस सोच के चलते सरकार ने बच्चियों को साइकिल देने की योजना बनाई थी, जिससे छात्राएं घर से स्कूल तक साइकिल की सवारी कर स्कूल तक पहुंचें और स्कूल न छूटे। लेकिन अटेर क्षेत्र के शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को शासन की इस योजना का लाभ नहीं मिला है। जिसके चलते छात्राओं को मिलने वाली साइकिलें स्कूलों में कंडम हो रही हैं।

गौरतलब है कि शासन द्वारा अटेर विकास खंड अटेर, सुरपुरा, पीपरी, किशुपुरा एवं जवासा के शासकीय स्कूलों में वर्ष 2018-19 में छात्राओं के लिए 841 साइकिलें भेजी गई थी। जिनका वितरण स्कूल में पढ़ने वाली कक्षा 6 से 9 तक की छात्राओं के बीच होना था, लेकिन तीन साल गुजर जाने के बाद स्कूल प्रबंधन द्वारा छात्रों में साइकिलों का वितरण नहीं किया गया। स्कूल में रखी रखी साइकिलें अब कंडम होती जा रही हैं।

स्कूल खुलने के बाद होगा वितरण

^कोरोना काल के कारण स्कूल बंद हैं। इस कारण से साइकिलों का वितरण नहीं हो सका है। साइकिल की देखरेख के लिए स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिए जाएंगे।हरभवन सिंह तोमर, डीईओ भिंड

छह महीने तक खुले में रखी रहीं साइकिलः
छात्राओं के लिए भेजी गई 841 साइकिलें स्वामी विवेकानंद शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सुरपुरा के परिसर में खुले में छह महीने तक रखीं रहीं। इससे कुछ साइकिलों जंग लगने से वह कंडम हो गई थी। जिसके देखते हुए जिला शिक्षा विभाग द्वारा साइकिलों को स्वामी विवेकानंद शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सुरपुरा से हटाकर अटेर, सुरपुरा, किशुपुरा, पीपरी एवं जवासा के शासकीय स्कूलों के कमरों में रखवा दिया गया था।
देखरेख के अभाव में कबाड़ हुई साइकिलें
विवेकानंद शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सुरपुरा से हटवाकर जिला शिक्षा विभाग ने साइकिलों को अटेर, सुरपुरा, किशुपुरा, पीपरी एवं जवासा के शासकीय स्कूलों के कमरों में तो रखवा दिया है। लेकिन स्कूलों के कमरों में साइकिलों को कबाड़ की तरह भर दिया गया है, साथ ही उनकी देखरेख भी नहीं की जा रही है। जिसके चलते साइकिलें कंडम हो रहीं हैं। इसके बाद भी इनको छात्राओं को बांटा नहीं जा रहा है।

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