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चंबल के बीहड़ में काटे जा रहे हरे पेड़:बेरोकटोक हरे-भरे वृक्षों का कटान कर जीवन की बगिया उजाड़ने का खेल चल रहा, जिम्मेदार नहीं कर रहे कार्रवाई

अटेर19 दिन पहले
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एक तरफ पर्यावरण असंतुलन बनाए रखने के लिए पौधरोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है तो दूसरी ओर बेरोकटोक हरे-भरे वृक्षों का कटान कर जीवन की बगिया उजाड़ने का खेल चल रहा है। वन विभाग के जंगल खोखले हो रहे हैं, लेकिन अधिकारी आंख मूंद तमाशबीन की भूमिका में हैं। रात के अंधेरे और दिन के उजाले में खुले आम चंबल के बीहड़ से हरे पेड़ों को काटकर लकड़ी का परिवहन कर दिया जाता है। अटेर कस्बे सहित चंबल नदी के किनारे बसे गांवों के बीहड़ों में पेड़ाें को निरंतर काटा जा रहा है।

गौरतलब है कि 10 साल पहले जहां चंबल के बीहड़ में मिट्टी के टीले हरे-भरे पेड़ों के कारण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते थे। आज पेड़ कटने की वजह से टीले एकदम वीरान दे दिखाई देते हैं। खास बात यह है कि चंबल के बीहड़ में पर्यावरण हरण की बढ़ती समस्या को देखते हुए तमाम समाजसेवी संस्थाएं सामने आई हैं, लेकिन किसी ने पेड़ों की कटाई रोकने का प्रयास नहीं किया है। कुछ आंकड़ों के अनुसार अटेर कस्बे सहित चंबल नदी के किनारे मौजूद गांवों के बीहड़ में प्रति दिन 25 से 30 पेड़ काट दिए जाते हैं। चंबल के बीहड़ों की सुरक्षा के लिए शासन की ओर से अटेर कस्बे में वन विभाग अमले को नियुक्त किया गया है। लेकिन अटेर में एक-दो दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को छोड़कर विभाग का एक भी अधिकारी और स्थाई कर्मचारी ड्यूटी पर ही नहीं आते हैं। जिससे कारण लकड़ी माफिया द्वारा बीहड़ से प्रतिदिन पेड़ों की कटाई धड़ल्ले से जारी है।

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