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  • Due To Indiscriminate Sand Extraction From Parvati River, Potholes, Degraded Environment, Aquatic Organisms Are Threatened

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अनदेखी:पार्वती नदी से अंधाधुंध रेत निकालने से हो गए गड्‌ढे, बिगड़ा पर्यावरण, जलीय जीवों को खतरा

बैराड़10 महीने पहले
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  • बैराड़ क्षेत्र से निकली पार्वती नदी में अवैध उत्खनन रोकने के लिए प्रशासन और खनिज विभाग नहीं दे रहा ध्यान

बैराड़ क्षेत्र के ग्राम ऐंचवाड़ा, खरई जालिम सहित दर्जनों गांवों के पास से गुजरी पार्वती नदी में क्षेत्र के रेत माफिया द्वारा अंधाधुंध अवैध रेत का उत्खनन किया जा रहा है। हालात ये हैं कि इस नदी में रेत का उत्खनन करते एक खरई जालिम गांव के पास नदी में प्राचीन मूर्तियां निकल चुकी हैं। वहीं 5 जुलाई को ऐंचवाड़ा गांव के पास नदी से रेत उत्खनन करते हुए रेत खदान धंसकने और उसके नीचे दबने से एक मजदूर की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी इस नदी से रेत का अवैध उत्खनन बंद नहीं हो पा रहा है। खासबात यह है कि नदी से लगातार उत्खनन होने से इसमें जगह-जगह गड्ढे हो चुके हैं। इसके चलते पार्वती नदी का स्वरूप बिगड़ता जा रहा है। वहीं इससे पहले इस नदी में उत्खनन के दौरान आधा दर्जन से अधिक मजदूर मौत के मुंह में अकाल मृत्यु समा गए हैं। इसके बाद भी क्षेत्र की पार्वती नदी में हो रहे अवैध उत्खनन रोकने के लिए प्रशासन और खनिज विभाग इस  कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
रेत खदान में दबने से इन मजदूरों की हो चुकी है मौत

पार्वती नदी पर चल रहे रेत के अवैध उत्खनन के दौरान 5 जुलाई को रेत खदान में दबने से मजदूर राजेंद्र (25) पुत्र रंजीत आदिवासी निवासी ग्राम मजेरा की मौत हो गई। वहीं इससे पूर्व मारोरा निवासी सुदामा गोस्वामी पुत्र सरवन पुरी गोस्वामी, निवासपुरी गोस्वामी पुत्र सरवन गोस्वामी, नितेशपुरी पुत्र बालपुरी गोस्वामी, देवेंद्र गोस्वामी, चारों लड़के नाबालिग मिट्टी खोदते समय काल के मुंह में समा गए। रसेरा निवासी नारायण पुत्र जगनू ओझा, नेपाल पुत्र नंदकिशोर धाकड़, दौलतराम धाकड़ कुछ साल पहले रसेरा गांव की पार्वती नदी में बजरी खोदते समय दबकर मौत के शिकार हो गए थे। इस हादसे के बाद दोनों विभागों द्वारा रोजनामचा भर इतिश्री कर ली और न ही रेत के इस अवैध उत्खनन को रोकने के संबंध में कोई ठोस कदम उठाया। 

नदी में रेत उत्खनन के दौरान निकल चुकी हैं मूर्तियां
पार्वती नदी में अवैध खुदाई के दौरान प्राचीन मूर्तियां भी निकली चुकी हैं। इसके चलते जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी उस क्षेत्र में पहुंचे थे। साथ ही निकली मूर्तियों को संग्रहालय भिजवाया गया था। उस समय भी अवैध खुदाई का सिलसिला जारी था। इसे अधिकारियों ने स्वयं देखा था, लेकिन इसके बावजूद रेत के इस अवैध उत्खनन पर रोक नहीं लग सकी है। कुल मिलाकर प्रशासन चाहता ही नहीं है कि अवैध उत्खनन रुके।

लाखों की राजस्व हानि
नदी से रेत उत्खनन होने से राजस्व विभाग को अपने ही अधिकारियों की बजह से लाखों की हानि हो रही है। यदि राजस्व विभाग रेत उत्खनन के लिए रॉयल्टी जारी कर दे तो इसमें राजस्व विभाग को अच्छी खासी आए प्राप्त होने लगेगी। साथ ही अवैध रेत पर प्रतिबंध हो जाएगा, लेकिन सूत्रों के मुताबिक अवैध उत्खनन के एवज में कमाई का एक हिस्सा प्रशासनिक अमले तक पहुंच रहा है इसलिए स्वयं एसडीएम तक मौका मुआयना करने के बाद भी उत्खनन पर प्रतिबंध नहीं लग पा रहा है।
मुझे दिखवाना पड़ेगी
अभी तक बैराड़ तहसीलदार का प्रभार रामनिवास धाकड़ पर था, उन्हें कल ही रिलीव किया है। मुझे आज प्रभार मिला है, इस संबंध में मुझे जानकारी लेनी पड़ेगी, फिर मैं आपको बताऊंगा।
सतेंद्र गुर्जर, प्रभारी तहसीलदार बैराड़

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