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लोकतंत्र में डराने वाले चेहरे:28 में से 17 सीटों पर 6 हजार वोटरों को मतदान से रोक सकते हैं 1329 दबंग, भिंड-मुरैना में डर ज्यादा

भिंड8 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो
  • चुनाव आयोग को भेजी गई इसकी जानकारी, इन दबंगों की धरपकड़ भी शुरू
  • प्रशासन और पुलिस ने उपचुनाव वाली सीटों पर 311 वल्नरेबल क्षेत्र बनाए, यहां पर दबंगों से किसी प्रत्याशी विशेष के पक्ष में जबरन मतदान कराने का खतरा

अब तक आपने चुनावों में वोट डालने के लिए लोगों को प्रेरित करने वालों के रूप में पुलिस, प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं के लोगों को देखा होगा लेकिन प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर हो रहे इन उपचुनावों में कुछ दबंग चेहरे कमजोर लोगों को वोट डालने से रोकने वाले भी हैं।

प्रदेश की 28 में से 17 सीटों पर 1329 दबंग 6032 वोटरों को वोट डालने से रोक सकते हैं या किसी पार्टी या प्रत्याशी विशेष के पक्ष में मतदान करने के लिए मजबूर कर सकते हैं। ऐसे दबंग चेहरे सबसे ज्यादा ग्वालियर-चंबल अंचल के भिंड, ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी और दतिया जिले की उपचुनाव वाली 13 में से 12 सीटों (पोहरी को छोड़कर) सीटों पर हैं।

अंचल में भी मुरैना जिले की पांच विस सीटों पर सबसे ज्यादा 159 (वल्नरेबल क्षेत्र) क्षेत्रों में 655 दबंग साढ़े चार हजार से अधिक कमजोर वर्ग के वोटरों को वोट डालने से रोक सकते हैं। जिला प्रशासन ने चुनाव आयोग को इस तरह की रिपोर्ट भेजी है। आयोग के निर्देश पर ऐसे दबंगों की धरपकड़ और रासुका जैसी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

ग्वालियर-चंबल के पांच जिलों में पोहरी छोड़कर सभी सीटों पर दबंग से खतरा
ग्वालियर-चंबल के भिंड, मुरैना, शिवपुरी, ग्वालियर और दतिया की 13 सीटों में 12 सीटों पर दबंगों के डर से मतदाता वोट डालने से डर सकते हैं। शिवपुरी जिले की सिर्फ पोहरी विस सीट पर एक भी दबंग नहीं है।

वल्नरेबल क्षेत्रों के लिए मिलता है ज्यादा फोर्स
यूं तो ग्वालियर-चंबल अंचल में चुनाव कराना प्रशासन के लिए हमेशा से ही चुनौतीपूर्ण रहा है लेकिन वल्नरेबल हेमलेट ज्यादा संख्या में बनाने से प्रशासन को फायदा होता है क्योंकि वल्नरेबल हेमलेट की संख्या को देखकर निर्वाचन आयोग उस जिले को ज्यादा केंद्रीय बल मुहैया कराता है, ताकि वहां लोग निडर होकर मतदान कर पाएं।

जानिए, क्या है वल्नरेबल हेमलेट
वल्नरेबल से तात्पर्य समाज के दबे, कुचले और शोषित लोगों से हैं जबकि हेमलेट का अर्थ गांव के मजरा, टोला से हैं। चुनाव के समय ऐसे मजरे, टोले चिह्नित किए जाते हैं, जहां कुछ लोग एक वर्ग विशेष को मतदान करने से रोक सकते हैं या किसी के पक्ष में मतदान करने के मजबूर कर सकते हैं। इन्हें इंटीमिडेटर (डराने वाला) और इंटीमिडेट (डरने वाला) के रूप में चिह्नित किया जाता है। डराने वालों पर कार्रवाई कर डरने वालों लोगों के मन में विश्वास पैदा कर मतदान कराना प्रशासन का कार्य होता है।

इन सीटों पर एक भी वल्नरेबल क्षेत्र नहीं
पोहरी, बमोरी, अशोकनगर, मुंगावली, सांची, आगर, सुवासरा, सांवेर, ब्यावरा, अनूपपुर और मांधाता में वल्नरेबल क्षेत्र नहीं हैं। यहां एक भी दबंग चिह्नित नहीं है। किसी मतदाता को डराने की आशंका भी नहीं है।

कैसे किए जाते हैं चिह्नित

  • किसी गांव में पार्टी बंदी के कारण झगड़े होते हैं और झगड़ों में हर बार एक ही पक्ष प्रभावित होता है तो यह वल्नरेबल हेमलेट की श्रेणी में आता है।
  • पिछले चुनावों में यदि किसी इलाके के मतदाताओं को किन्हीं के द्वारा मतदान करने से रोका गया है तो यह क्षेत्र भी वल्नरेबल हेमलेट की श्रेणी में आता है।
  • किसी मजरे, टोले में यदि एक जाति विशेष के लोग ज्यादा संख्या में रहते हैं और दूसरे जाति अल्प संख्या में है तो वह क्षेत्र भी इसी श्रेणी में आएगा।
  • किसी क्षेत्र में किसी दबंग का ज्यादा प्रभाव है तो प्रशासन उसे भी वल्नरेबल हेमलेट के रूप में चिह्नित करता है। यह संख्या हर चुनाव में घटती बढ़ती रहती है।
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