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जैन धर्म के सिद्घांत / जैन धर्म में मुंहपत्ती (मास्क ), संघेटा (सोशल डिस्टेंसिंग) और सम्यक एकांत (आइसोलेशन ) ढाई हजार साल पहले से लागू, दुनिया ने इसे अब अपनाया

Mouthpatti (mask), Sangheta (social distancing) and Samyak solitude (isolation) applied in Jainism since two and a half thousand years ago, the world adopted it now
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Mouthpatti (mask), Sangheta (social distancing) and Samyak solitude (isolation) applied in Jainism since two and a half thousand years ago, the world adopted it now

  • गणाचार्य बोले- सिर्फ इन तीन सिद्धांत से ही दूर भागेगा कोरोना

दैनिक भास्कर

Jun 02, 2020, 05:00 AM IST

भिंड. कोरोना संक्रमण काल में गणाचार्य विराग सागर ने इससे बचने तीन कारगर उपाय बताए हैं। उन्होंने कहा कि जैन धर्म के सिद्घांत विश्व कल्याण के लिए ही बने हैं। जैन धर्म में ढाई हजार साल पूर्व बने सिद्धांत आज कोरोना जैसी महामारी से लड़ने में हथियार के रूप में काम आ रहे हैं। इन सिद्घांतों में पहला मुंहपत्ती  है, करीब ढाई हजार साल पहले जैन धर्म ने मुंहपत्ती यानी मास्क का ईजाद वाणी पर संयम और सूक्ष्म जीव मुंह में नहीं जाएं, इसलिए किया था।

अब यही मास्क कोरोना से लड़ने में सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरा है। जैन धर्म में सोशल डिस्टेंसिंग को संघेटा कहा जाता है। कोरोना संक्रमण काल में सोशल डिस्टेंसिंग सबसे कारगर है। तीसरा सम्यक एकांत सिद्घांत है, इसे अंग्रेजी में आइसोलेशन कहा जाता है। कोरोना के संक्रमण के डर से आजकल आइसोलेशन के नियमों को सारी दुनिया मान रही है। सभी इन नियमों का पालन करें तो कोरोना संक्रमण का खतरा बिलकुल नहीं रहेगा।

25 संत और 24 आर्यिका कर रहे साधना
कोरोना से दुनिया को बचाने गणाचार्य विराग सागर महाराज के सानिध्य में 25 जैन संत और 24 आर्यिका प्रतिदिन ध्यान- प्रार्थना कर रहे हैं।
नोट: भास्कर को यह फोटो जैन समाज के प्रतिनिधि मनाेज जैन ने उपलब्ध कराया।

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