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अनुमति की गफलतो:वाह साहब! एटा में फंसी बहू को लाने के लिए जाने की अनुमति दे दी, पर यह तो सोचिए कि लौटेंगे कैसे...

भिंड2 वर्ष पहले
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  • अब तक 1211 लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किए, 197 को ही मिली अनुमति, कलेक्टोरेट में लगा रहे चक्कर

एक ओर दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों को शासन घर बुला रहा है। दूसरे ओर जो लोग दूसरे जिलों में परिवार पालने के लिए नौकरी करने गए थे, वे चाहकर भी अपने घर नहीं आ पा रहे हैं। वे शासन की गाइड लाइन के अनुसार ऑनलाइन परमिशन के लिए आवेदन कर रहे हैं लेकिन भिंड जिला प्रशासन उनके अावेदन निरस्त कर रहा है। कुछ ऐसा ही मामला एडवोकेट पुष्पेंद्र कुशवा के साथ घटित हुआ। उन्हें अपनी बहू को एटा से लाने के लिए जाने अनुमति तो मिल गई, लेकिन लौटने  अनुमति नहीं मिली। वहीं युवक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष आशीर्वाद शर्मा ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से भी इस संबंध में शिकायत की है। यहां बता दें कि लॉकडाउन-2 लागू होने के बाद शासन स्तर से दूसरे शहरों में फंसे लोगों को लाने के लिए आनलाइन परमिशन का प्रावधान रखा गया। इसके लिए कलेक्टर छोटे सिंह ने डिप्टी कलेक्टर शुभम शर्मा को जिम्मेदारी दी लेकिन डिप्टी कलेक्टर शर्मा लगातार लोगों की अनुमतियां निरस्त करने में लगे हैं। बताया जा रहा है कि अब तक करीब 1211 आवेदन आॅनलाइन अनुमति के लिए लोगों ने किए, जिसमें से 197 लोगों को ही अनुमति दी गई है। शेष लोगों को अनुमति क्यों नहीं दी गई, यह कारण भी उन्हें नहीं बताया जा रहा है। इनमें से कई लोग ऐसे भी हैं, जो हॉटस्पॉट क्षेत्र में नहीं हैं, इसके बावजूद उन्हें अनुमति नहीं दी जा रही है।

तीन उदाहरण जो बताते हैं कि अनुमति मांगने के बाद भी लोग नहीं आ पा रहे घर

1. अटेर क्षेत्र के बिजौरा निवासी अमित दुबे (26) पुत्र प्रमोद गुजरात के अहमदाबाद जिले से 30 किलोमीटर दूर सानंद गांव में टॉवर पर नौकरी करने गए थे लेकिन 22 मार्च से लॉकडाउन होने के बाद वे वहां फंस गए। अमित चार बार ऑनलाइन आवेदन कर चुके हैं, लेकिन हर बार डिप्टी कलेक्टर शुभम शर्मा उनका आवेदन निरस्त कर देते हैं। 2. जलुआपुरा निवासी श्रीकांत उपाध्याय की माताजी की तबियत खराब है। वे फरीदाबाद में एक प्रायवेट कंपनी में काम करते हैं। लॉकडाउन की वजह से वे भिंड नहीं आ पा रहे हैं। उपाध्याय ने भिंड आने के लिए आॅनलाइन आवेदन भी किया, जिसे निरस्त कर दिया गया। ऐसे में वे अपनी बीमार मां का इलाज नहीं करा पा रहे हैं। 3. एडवोकेट पुष्पेंद्र कुशवाह की बहू एटा में फंसी हुई हैं। अचानक लाकडाउन होने की वजह से वह अपनी ससुराल नहीं आ पा रही है। एडवोकेट कुशवाह ने बहू को लाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया लेकिन प्रशासन उन्हें सिर्फ एक ओर से जाने की परमिशन दे रहा है। लौटकर आने की परमिशन न होने से उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।

12 बसों से आए मजदूरों को किया क्वारेंटाइन
शासन के निर्देशों के तहत दूसरे शहरों में फंसे 300 से ज्यादा मजदूरों को 12 बसों के माध्यम से भिंड लाया गया, जिनकी मालनपुर पर स्क्रीनिंग की गई। इसके बाद 92 लोगों को गोहद, 23 को मालनपुर, 84 को मौ छात्रावास और ग्लोबल स्कूल में क्वारेटाइन किया गया है। यह सभी मजदूर मध्यप्रदेश के बुराहनपुर, बैतूल, शाजापुर और राजस्थान के धौलपुर, जयपुर शहर से लाए गए। इसके अलावा भिंड से टीकमगढ़ जा रहे 52 मजदूरों को बस द्वारा उनके जिले के लिए भेजा गया है।

4 बाइकों से 15 लोग अहमदाबाद से आए
लॉकडाउन में  सार्वजनिक परिवहन बंद होने के बाद लोग किसी भी तरह अपने घर तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बुधवार को ऊमरी के मोहांड पर चार बाइकों से 15 लोग अहमदाबाद से आए। यहां चेक पोस्ट पर लोगों ने पुलिस को बताया कि चार दिन पहले अहमदाबाद से चले थे। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम बुलाकर सभी की स्क्रीनिंग कराई गई। साथ ही एंबुलेंस बुलाकर उन्हें भिंड में क्वारेंटाइन किया गया है।

भिंड-मुरैना से शिवपुरी पहुंचे 607 मजदूर, छह बसें लगाईं
लॉकडाउन में भिंड-मुरैना में फंसे 607 मजदूरों बुधवार को शिवपुरी पहुंचाया गया। प्रशासन ने इन मजदूरों की स्क्रीनिंग करा इन्हंे शिवपुरी से खनियांधाना, पिछोर, कोलारस, बदरवास के साथ बैराड़ के लिए 6 बसों से रवाना किया। दरअसल जिले के खनियाधाना, पिछोर, कोलारस, बदरवास के साथ पोहरी क्षेत्र में आदिवासी परिवार की संख्या बहुतायत है। यहां से आदिवासी महिला पुरुष रोजगार की तलाश में दूसरे जिलों में जाते हैं।

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