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आदेश:स्कूल शिक्षा विभाग का आदेश- स्कूल 31 तक बंद, राज्य शिक्षा केंद्र का फरमान- घर-घर जाकर पढ़ाएं

भिंड23 दिन पहले
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  • भारी न पड़ जाए प्रयोग - दाेहरे के आदेश से उलझन में शिक्षक, घर-घर भेजे जाने से संक्रमण का खतरा
  • अफसराें में समन्वय की कमी से उपजी समस्या
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इन दिनों सरकार के दाेहरे आदेशों से शिक्षक उलझन में हैं। एक ओर स्कूल शिक्षा विभाग ने 31 जुलाई तक पूरी तरह से विद्यालय बंद रखने के आदेश कर दिए हैं। जबकि दूसरी ओर राज्य शिक्षा केंद्र ने शिक्षकों को विद्यालय समय में घर-घर घंटी बजाकर पांच बच्चों को एक साथ पढ़ाने का फरमान सुना दिया है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। शिक्षक घर पहुंच रहे हैं ताे बच्चाें के परिजन काे संक्रमण का डर सता रहा है। 

यहां बता दें कि कोरोना संक्रमण काल में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 30 जून तक प्रदेश के सभी शासकीय अशासकीय एवं अर्धशासकीय विद्यालय बंद रखने का आदेश जारी किया गया था। लेकिन लॉकडाउन खुलने के बाद जिस तेजी से कोरोना संक्रमण के मरीज सामने आए ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग के उपसचिव प्रमोद सिंह ने इसकी समय सीमा में बढ़ोत्तरी करते हुए 31 जुलाई तक सभी स्कूल बंद रखने के आदेश कर दिए थे।

लेकिन अब राज्य शिक्षा केंद्र ने एक नया प्रयोग किया है, जिसमें उन्होंने शिक्षकों को आदेश दिया है कि वे प्रतिदिन विद्यालय समय में (सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक) गांव या शहर के एक मोहल्ले में जाकर पांच बच्चों को एक जगह एकत्रित करेंगे और हमारा घर हमारा विद्यालय की तर्ज पर उन्हें पढ़ाएंगे। लेकिन राज्य शिक्षा केंद्र का यह आदेश शिक्षकों के गले नहीं उतर रहा है।बता दें कि जिले में 2373 सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय हैं, जिसमें प्राथमिक स्कूलों की संख्या 1648 और माध्यमिक स्कूल 725 हैं। वहीं इन स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक एक लाख 16 हजार 306 बच्चे दर्ज हैं, जिसमें 59 हजार 221 छात्राएं और 57 हजार 85 छात्र हैं।

क्या दिया है कार्यक्रमः राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा हमारा घर हमारा विद्यालय कार्यक्रम के तहत शिक्षकों को प्रतिदिन कम से कम पांच बच्चों के यहां जनसंपर्क कार्यक्रम उनके कार्य का अवलोकन करना होगा। साथ ही अभ्यास कार्य, दक्षता उन्नयन, वर्कशीट, हिंदी, अंग्रेजी लेखन और मौखिक गणित कार्य का भी अवलोकन करना होगा। 

पालकों को डर इससे फैल न जाए संक्रमण

राज्य शिक्षा केंद्र के इस आदेश को लेकर पालकों में डर देखा जा रहा है। नहटोली निवासी अवधेश शर्मा का कहना है कि इससे तो बच्चों के संक्रमित होने का ज्यादा खतरा रहेगा। वजह यह है कि एक शिक्षक चार से पांच घरों में होकर उनके बच्चे को पढ़ाने घर आएगा। ऐसे में पता ही चल पाएगा कि आखिर वह कहीं से संक्रमित होकर तो नहीं आया है।

शिक्षकों  बोले- इससे तो स्कूल में पढ़ाना बेहतर

आजाद अध्यापक संघ के जिलाध्यक्ष संतोष लहारिया का कहना है कि इससे तो अच्छा बच्चों को स्कूल बुलाकर पढ़ाया जा सकता है। वजह यह है कि विद्यालय में सीमित संख्या में बच्चे बुलाकर उनके हाथ सेनेटाइज कराकर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ब्लैक बोर्ड पर पढ़ाया जा सकता है। जबकि हर घर में यह संभव नहीं हो पाएगा।

पहले भी हो चुका है प्रयोग

इससे पहले भी राज्य शिक्षा केंद्र प्राथमिक शालाओं के बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई का प्रयोग भी कर चुका है। इसके लिए डिजी लैप से आने वाले वीडियो को व्हाट्स ग्रुप पर डालने का आदेश आया था। लेकिन बच्चों के पास एंड्रायड मोबाइल फोन न होने को देखते हुए उसे भी रद्द कर दिया गया है।

सोशल डिस्टेंस रखेंगे शिक्षक

यह सही है कि 31 जुलाई तक शालाएं बंद रखने का आदेश है। लेकिन राज्य शिक्षा केंद्र से हमारा घर हमारा विद्यालय कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसमें एक शिक्षक को पांच बच्चों के यहां जाना है। शिक्षकों से कहा गया है कि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ होमवर्क देखें। 
हरभवन सिंह तोमर, डीईओ, भिंड

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