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कार्रवाई:बगैर रजिस्ट्रेशन के चल रहा था क्लीनिक डॉक्टर पर डिप्लोमा तक नहीं मिला, सील

भिंड8 महीने पहले
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फूफ वह क्लिनिक जो बिना रजिस्ट्रेश के चल रहा था। - Dainik Bhaskar
फूफ वह क्लिनिक जो बिना रजिस्ट्रेश के चल रहा था।
  • पहली बार बौद्ध भिक्षु भंते की शिकायत पर फूप में कार्रवाई, जवाब तक नहीं दे पाया कथित डॉकटर
  • ढाई साल पहले तक एक एमएमबीएस डॉक्टर के नाम पर संचालित किया जा रहा था क्लीनिक

स्वास्थ्य विभाग के जिला छापामार दल ने मंगलवार को फूप नगर में अवैध रूप से संचालित विमल क्लीनिक को सील कर दिया है। बगैर रजिस्ट्रेशन के इसका संचालन एक ऐसे कथित डॉक्टर द्वारा किया जा रहा था जिस पर डिग्री तो दूर कोई डिप्लोमा तक नहीं है। इसके बाद भी यह फर्जी डॉक्टर मरीजों का धड़ल्ले से एलोपैथी व आयुर्वेद दवाओं से इलाज कर रहा था। छापामार दल ने फिलहाल क्लीनिक को सील कर इसकी सूचना पुलिस को दे दी है ताकि यह फिर से खुल न सके। विभाग द्वारा कथित डॉक्टर के विरुद्ध न्यायालयीन कार्रवाई किए जाने की तैयारी की जा रही है।

यहां बता दें फूफ में लंबे अर्से से विमल क्लीनिक का संचालन किया जा रहा था। इसकी शिकायत पिछले दिनों फूफ नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष भंते शीलानंद द्वारा प्रशासन के साथ ही स्वास्थ्य विभाग में की गई थी। इसके बाद मंगलवार को छापामार दल जांच के लिए पहुंचा तो क्लीनिक खुला मिला। इसका संचालक रामजीलाल विमल पुत्र मूंगाराम विमल छापामार दल के प्रभारी डॉ. बीआर आर्य के सवालों का संतोषप्रद जवाब नहीं दे सका।

इनके द्वारा दो ही सवाल मुख्य रूप से किए गए पहला क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन है या नहीं, इसका जवाब न में मिला। इसके बाद दूसरा सवाल इसके संचालन के लिए आपके पास कोई डिग्री है या नहीं इसका भी जवाब न में ही मिला। तब क्लीनिक का सरसरी तौर पर अवलोकन करते हुए उसे सील कर दिया गया। क्लीनिक में मरीजों के परीक्षण के उपकरण व दवाइयां भी रखी पाई गईं। कार्रवाई में दल के सदस्य डॉ. आरके दुबे एवं लिपिक अजेंद्र सिंह कुशवाह भी शामिल थे।

जिस डॉक्टर के नाम से चल रहा, उसे किसी ने देखा नहीं
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार फूप में विमल क्लीनिक का संचालन ढाई- तीन साल पहले तक एमबीबीएस डॉ. सीआर राजे के नाम पर किया जाता रहा है। लेकिन इसके बाद जब रजिस्ट्रेशन खत्म हो गया तब भी इसका संचालन किया जाता रहा। फूफ के लोगों के अनुसार जिन डॉक्टर के नाम पर क्लीनिक संचालित किया जाता रहा उन्हें तब भी कभी यहां नहीं देखा गया था। नियमानुसार रजिस्ट्रेशन खत्म होने के बाद रिन्यू कराया जाना चाहिए अन्यथा की स्थिति क्लीनिक बंद कर देना चाहिए था।

संचालक को नोटिस
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजीत मिश्रा ने बताया अवैध रूप से संचालित क्लीनिक को सील किए जाने के बाद इसके संचालक रामजीलाल विमल को नोटिस जारी कर दिया गया है। इस प्रकार के अवैध स्वास्थ्य संस्थान का संचालन आम नागरिकों के लिये खतरे का सूचक हैं। जिनके पास किसी भी प्रकार की तो डिग्री होती है और ना ही ये संस्था पंजीकृत होती है। इसके विरुद्ध मध्यप्रदेश नर्सिंगहोम एक्ट 1973 की धारा 3 और धारा 8 (क) (1) एवं (2), मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया एक्ट 1956 की धारा 1 एवं मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल एक्ट 1987 की धारा 24, चिकित्सा शिक्षा संस्थान नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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