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समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में धांधली:व्यापारी के गोदाम से यूपी से लाई गई 236 क्विंटल धान जब्त, समर्थन मूल्य पर खपाने की थी तैयारी

डबराएक महीने पहले
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शहर के एक गोदाम पर रखी उप्र से बेचने के लिए लाई गई घटिया धान। - Dainik Bhaskar
शहर के एक गोदाम पर रखी उप्र से बेचने के लिए लाई गई घटिया धान।
  • उत्तरप्रदेश से घटिया धान मंगवाकर बेच रहे व्यापारी

उत्तरप्रदेश से कम भाव में घटिया धान खरीदकर समर्थन मूल्य पर खपाई जा रही है। खास बात यह है कि समर्थन मूल्य पर सिर्फ क्रांति धान ही खरीदी जा रही है। इस धान का डबरा-भितरवार अंचल में रकबा 5 से 6 हजार हेक्टेयर ही है। मंगलवार को एसडीएम और खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने एक व्यापारी के गोदाम से ट्रक और ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरी 236 क्विंटल धान जब्त की है। यह धान यूपी से लाई गई थी और समर्थन मूल्य पर बेची जा रही थी।

समर्थन मूल्य के सरकारी तौल कांटे शुरू होते ही व्यापारियों ने धांधली शुरू कर दी है। मंगलवार को सिरोही रोड स्थित फर्म बालाजी फूड प्रोडक्ट के नाम से कैलाश नारायण साहू के गोदाम पर इटावा जिले के अंतर्गत भरथरा मंडी से ट्रक और ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर आई धान को जब्त किया गया।

धान से भरा ट्रक शहर के व्यापारी कैलाश नारायण साहू द्वारा उत्तर प्रदेश से मंगाकर अपने गोदाम में रखकर समर्थन मूल्य के कांटे पर बेचकर मुनाफा कमाने के लिए मंगवाई गई थी। इसे एसडीएम प्रदीप कुमार शर्मा और खाद्य आपूर्ति अधिकारी संदीप पांडे ने जब्त कर लिया। धान से भरे ट्रक और ट्रैक्टर ट्रॉली को कृषि उपज मंडी सचिव की सुपुर्दगी में दिया गया है।

300 से 400 रुपए प्रति क्विंटल होता है मुनाफा

उत्तर प्रदेश में धान 1500 से 1600 रुपए प्रति क्विंटल तक मिल जाती है। यही धान डबरा में समर्थन मूल्य पर 1940 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बेच दी जाती है। ऐसे में प्रति क्विंटल 400 रुपए तक का मुनाफा होता है। गौर करने वाली बात यह है कि खरीदी केंद्रों पर आने वाली इस घटिया क्वालिटी की धान की जानकारी केंद्र प्रभारियों को भी रहती है लेकिन इसके बाद भी वह धान खरीदते हैं और गोदामों में पहुंचा देते हैं क्योंकि व्यापारियांे से उन्हें भी हिस्सा मिलता है।

अंचल में क्रांति धान का रकबा 5 हजार हेक्टेयर

कृषि विभाग के मुताबिक इस साल 80 हजार हेक्टेयर में धान हुई है। इसमें से 75 हजार हेक्टेयर में 1121, 1509, 1718 सहित अन्य बासमती वैरायटी की धान हुई है। बाकी 5 से 6 हजार हेक्टेयर में क्रांति धान की पैदावार हुई है। क्रांति धान को छोड़कर बाकी बासमती वैरायटीयों की धान के भाव किसानों को 3200 से 3400 रुपए प्रति क्विंटल मिल रहे हैं। वहीं समर्थन मूल्य पर धान के भाव 1940 रुपए प्रति क्विंटल रखे गए हैं। ऐसे में स्वाभाविक है कि केंद्रों पर क्षेत्र की धान पहुंचना कैसे संभव है।

बटाई पर लेकर फर्जी तरीके से करा लेते हैं पंजीयन

समर्थन मूल्य पर धान बेचकर मुनाफा कमाने का यह गोरखधंधा अंचल में कई सालों से चल रहा है। हालांकि इसमें किसानों की भी भूमिका रहती है क्योंकि थोड़े से रुपए के लालच में किसान बड़े बड़े व्यापारियों और राजनैतिक रसूख रखने वालों को अपने खेत बटाई पर देते हैं। इसके बाद यह लोग अपने नाम पर पंजीयन कराकर उत्तर प्रदेश से धान मंगवा कर खरीद केंद्रों पर तुलबाते हैं और लाखों रुपए का शासन को चूना लगाते हैं।

मौके पर जाकर देखें तो सही स्थिति आए सामने

पंजीयन के दौरान पटवारियों को मौके पर जाकर खेत में खड़ी फसल की स्थिति का वास्तविक मूल्यांकन करना अनिवार्य होता है। लेकिन पटवारी खेतों पर जाकर गिरदावरी करते ही नहीं हैं। इससे खेतों में किस वैरायटी की धान खड़ी हुई है, इसका पंजीयन में उल्लेख नहीं हो पाता है।

एफआईआर दर्ज कराएंगे

बरोठा रोड स्थित गोदाम से एक ट्रक और ट्रैक्टर ट्रॉली को पकड़ा है। इसमें उत्तर प्रदेश से लाई गई 236 क्विंटल धान भरी हुई थी। जो कि समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए लाई गई थी। इसे जब्त कर मंडी सचिव के सुपुर्द किया गया है। मामले में थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। -प्रदीप कुमार शर्मा, एसडीएम, डबरा

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