जागरुकता / 1 घंटे में निकले 300 वाहन, एक को भी नहीं रोका, 4 लोगों ने खुद कराई स्क्रीनिंग

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  • बाहर से आने जाने वालों का रिकार्ड न होने से फैल सकता है कोरोना संक्रमण
  • डबरा-दतिया चेकपोस्ट पर पुलिसकर्मी तैनात, फिर भी बरती जा रही लापरवाही

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

डबरा. ग्वालियर-झांसी हाईवे पर चांदपुर के पास सिंध नदी के पुल पर जिले का बॉर्डर है। सिंध नदी के पुल के दूसरी ओर से दतिया जिले की सीमा शुरु होती है। नेशनल हाईवे होने की वजह से यहां से होकर कई राज्यों के लोगों का आना जाना रहता है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में वाहन यहां से होकर निकलते हैं। 
भिंड, मुरैना व दतिया जिले में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमितों को देेखते हुए कलेक्टर द्वारा इस सीमा को सील कर यहां से होकर गुजरने वाले प्रत्येक वाहन को रोककर उसमें सवार सभी की फीवर क्लीनिक में स्क्रीनिंग व जांच किए जाने और पूरी जानकारी दर्ज किए जाने के आदेश दिए हैं। अब आदेश जारी होने के बाद बॉर्डर पर बेरीकेड्स तो लगा दिए गए हैं, लेकिन अभी वाहनों को रोककर एंट्री नहीं की जा रही है। स्थिति यह है कि अपने आप रुककर जो फीवर क्लीनिक में आ जाता है उसी की स्क्रीनिंग कर जानकारी लिख ली जाती है। बॉर्डर पर ऐसी लापरवाही से शहर में संक्रमण बढ़ने का खतरा हो सकता है।

पूरी टीम तैनात थी, फिर भी नहीं की जा रही थी कार्रवाई
डबरा-दतिया बार्डर पर बने चेकपोस्ट का मंगलवार को सुबह करीब 11 बजे दैनिक भास्कर की टीम ने पहुंचकर जायजा लिया। यहां पर दो प्रशासन के कर्मचारी व चार पुलिसकर्मी तैनात थे। सभी लोग यहां पर बनाई गई अस्थायी टीनशेड के नीचे बैठे हुए थे। फीवर क्लीनिक में भी एक डॉक्टर व एक स्वास्थ्य कर्मी बैठे थे। सिंध नदी के पुल से पहले बेरीकेड्स लगे थे, लेकिन वाहनों को रोका नहीं जा रहा था। एक घंटे के भीतर करीब 300 से ज्यादा छोटे बड़े वाहनों का यहां से होकर निकलना हुुआ। इस दौरान दो बाइकों से निकल रहे दंपत्ति फीवर क्लीनिक में जांच के लिए खुद पहुंचे।

शहर के लोग भी बेहिचक जा रहे अन्य शहर, राज्यों में
शहर में दूसरे राज्यों से तो लोग आ ही रहे हैं, वहीं शहर के लोग भी बेहिचक और बिना सुरक्षा अपनाए दूसरे राज्यों व शहरों में आवागमन कर रहे हैं। इससे सामूहिक संक्रमण भी फैल सकता है। खास बात यह है कि शहर से कई सरकारी व प्राइवेट कर्मचारी दतिया व मुरैना तक प्रतिदिन जाकर ड्यूटी भी कर रहे हैं। ऐसे में उनका रोज आना जाना होता है। अधिकांश कर्मचारी अपनी बाइक या चार पहिया वाहनों से आना-जाना कर रहे हैं। सुबह घर से जल्दी निकलकर शाम को देर रात अधिकारी-कर्मचारी अपने घरों को लौट रहे हैं, लेकिन किसी की जांच नहीं हो रही है।

वार्डाें में निगरानी समिति नहीं कर रहीं अपना काम
शहर के तीस वार्डों में एसडीएम राघवेंद्र पांडेय द्वारा निगरानी समितियां बनाई थी। साथ ही वार्ड प्रभारी भी नियुक्त किए गए हैं। ताकि बाहर से आने वाले व बाहर जाकर लौटने वालों की जानकारी लग सके। लेकिन इन समितियों द्वारा भी काम करना बंद कर दिया गया है। यही कारण है कि दूसरे राज्यों से कितने लोग आए और शहर से कितने लोग दूसरों राज्यों में जाकर लौटकर आए, यह डाटा शासन के पास उपलब्ध नहीं है। डाटा न होने से होम क्वारेंटाइन की प्रक्रिया पर भी पूरी तरह से ब्रेक लग गया है। बाहर से आने के बाद लोग बेहिचक बाजार और मोहल्लों में घूमते हैं।

चेकपोस्ट पर तैनात टीम को सख्त निर्देश दिए जाएंगे
चेक पोस्ट पर सीमा को सील किया गया है, साथ ही सभी को रोककर उनकी स्क्रीनिंग एवं नाम पते नोट किए जा रहे हैं। साथ ही चेक पोस्ट पर फीवर क्लिनिक भी बनाया गया है। यदि किसी को नहीं रोका जा रहा है, तो सख्त निर्देश दिए जाएंगे। अगर इसके बाद भी लापरवाही बरती गई तो कार्रवाई की जाएगी। 
नवनीत शर्मा, तहदीलदार, डबरा

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