श्रीमद्भागवत कथा:आचार्य लोकेश शास्त्री ने कहा- नारायण को भजने से आप ही मिल जाएंगी लक्ष्मी

डबरा5 दिन पहले
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मां लक्ष्मी तो केवल नारायण की हैं। जो मनुष्य लक्ष्मी को अपना बनाने की कोशिश करता है वह शिशुपाल की तरह धोखा खाता है, क्योंकि लक्ष्मी का वाहन उल्लू है। लक्ष्मी मैया उनकी मति को चलाएमान कर देती हैं। इसलिए लक्ष्मी को ना पकड़कर, नारायण को पकड़ोगे तो लक्ष्मी अपने आप ही नारायण के साथ चली आएंगे।

यह बात आचार्य लोकेश शास्त्री वृंदावन धाम ने आंतरी-जोरासी मार्ग पर शिव पार्वती मंदिर पर चल रही भागवत कथा में शनिवार को कहीं। भागवत आचार्य ने बताया कि भगवान के 16 हजार 108 विवाह हुए थे। दरअसल 16 हजार वैदिक मंत्र बन गई, 100 उपनिषद और 8 मूल प्रकृति उनकी पत्नी बन गई।

कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

सुदामा चरित्र सुनाया

सुदामा चरित्र की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान को सब दीनबंधु कहते हैं। दीनबंधु का अर्थ होता है जो दिनों के बंधु हैं और दीन हीन पर कृपा करते हैं। महाराज की महिमा बताते हुए कहा कि रसों का समूह महारास है। जो भगवान के रास पंचाध्याई का पाठ करता है, उसका काम नष्ट हो जाता है। काम पर विजय प्राप्त कर मनुष्य जीवन में जो चाहे वह कर सकता है। कुछ लोग सांसारिक मोह माया में पढ़कर जीवन भर रोते रहते हैं जो भगवान के लिए रोते हैं। उन्हें फिर जगत के लिए रोने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

भागवत कथा के सार को समझाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान अपनी लीला समाप्त कर भगवत गीता में विराजमान हो गए, इसलिए यह श्रीमद्भागवत भगवत स्वरूप है। इसके श्रवण मात्र से ही तीन जन्मों के पापों से कुल सहित मुक्ति मिलती है। ईश्वर की आराधना के बगैर जीवन में सुख शांति समृद्धि पाना असंभव है।

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