महिला दिवस पर खास:लॉकडाउन में पति की नौकरी गई तो शुरू किया मशरूम उत्पादन, अब दूसरों को भी दे रहीं रोजगार

डबरा9 महीने पहले
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  • ग्राम समचौली की महिला ने खुद को आत्मनिर्भर बनायाा

समचौली गांव की महिला इंदु पचौरी के पति भोपाल में एक ट्रैक्टर कंपनी में काम करते थे। पति-पत्नी दोनों ही भोपाल में रहते थे। कोरोना की वजह से लगे लॉकडाउन में पति की नौकरी चली गई तो दोनों गांव आ गए। लेकिन यहां कोई काम नहीं था। परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए इंदु पचौरी ने महिलाओं का समूह बनाया और शेड बनाकर यूट्यूब से सीखकर बटन मशरुम उगाने का काम शुरु किया। इससे चार महीने में ही अच्छी आय होने लगी। अब पति-पत्नी दोनों ही इस काम को कर रहे है साथ ही गांव की कुछ अन्य महिलाओं को भी इसमें जोड़ लिया है।
ट्रैक्टर कंपनी में थी नौकरी
इंदु पचौरी बताती हैं कि कोरोना की वजह से उन्होंने बहुत परेशानी झेली है। पति ओमबाबू पचौरी की अच्छी खासी ट्रैक्टर कंपनी में नौकरी चल रही थी, लेकिन लॉकडाउन के दौरान कंपनी ने उन्हें निकाल दिया जिससे उनकी नौकरी छिन गई।
रोज सात हजार की इनकम
बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए काम तो जरुरी था लेकिन उस समय पति को दूसरा काम मिल नहीं रहा था। कॉलेज के समय में थोड़ा बहुत बटन मशरुम के बारे में पढ़ा था, जो कि अब काम आ गया। इसकी विधि उन्होंने यूट्यूब से सीखी और एक शेड बनाकर उसमें आवश्यक सामगी से मशरूम उगाने शुरू कर दिए। चार महीने बाद ही अच्छी इनकम होने लगी। अब दंपति चार शेड में मशरुम लगा रहे हैं। प्रतिदिन एक क्विंटल से ज्यादा मशरुम की पैदावार होती है।
खरीदार भी पहुंच जाते हैं
इंदु बताती हैं कि इसमें मेहनत करनी पड़ती है। घर में प्रतिदिन पैक कर रखा जाता है। पैकिंग की भी व्यवस्था की गई है। मशरूम जिसे खरीदने वाले गांव ही पहुंच जाते हैं। वे गांव की महिलाओं को भी रोजगार देने के अलावा ट्रेनिंग देने का काम करते हैं जिससे वह किसी के आगे हाथ न फैलाएं और स्वयं ही आत्मनिर्भर बनकर घर का आर्थिक बोझ भी उठा सकें। इंदु पचौरी बताती है कि उन्हें अब प्रतिमाह सत्तर से अस्सी हजार की इनकम बटन मशरुम से होने लगी है।
घर में पैदावार इसलिए बाहर जाने की भी जरुरत नहीं
इंदु बताती हैं कि बटन मशरुम की पैदावार शेड बनाकर होती है, इसलिए बाहर जाने की भी जरुरत नहीं है। जो महिलाएं घर से बाहर नहीं निकलती वह भी बटन मशरुम उगाकर अच्छा खासा लाभ कमा सकती हैं। गांव की बेटियां भी अभी से आत्मनिर्भर बनें इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग दें। क्योंकि शादी के बाद जब वह ससुराल जाएंगी और किसी कारणवश परिस्थिति बिगड़ती है तो यह ट्रेनिंग उनके काम आ सकती है। श्रीमती पचौरी का कहना है हर महिला को आत्मनिर्भर होना चाहिए।

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