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बारिश की बेरुखी:बारिश की आस में लगाई धान, पानी न बरसने से अब सूखने लगी

डबरा17 दिन पहले
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पानी के अभाव में सूख रही भितरवार रोड पर खेत में खड़ी धान की फसल। - Dainik Bhaskar
पानी के अभाव में सूख रही भितरवार रोड पर खेत में खड़ी धान की फसल।
  • डबरा व भितरवार अंचल में वर्तमान में 7 हजार हेक्टेयर में की जा चुकी है धान की रोपनी

बारिश की आस में किसानों ने बोरवेल के सहारे खेतों में धान की पौध की रोपनी तो करा दी है, लेकिन अब बारिश की बेरुखी से लगाई गई पौध सूखने की कगार पर पहुंच गई है। वहीं बिजली भी किसानों का साथ नहीं दे रही। हालत यह है कि 10 घंटे भी गांवों में बिजली नहीं मिल पा रही है। जबकि तेज धूप के कारण खेतों में नियमित पानी लगाया जाना जरुरी है।

किसानों द्वारा लगातार बिजली कंपनी के अधिकारियों से ग्रामीण क्षेत्र में पर्याप्त बिजली दिए जाने की मांग की जा रही है। अंचल में जुलाई के पहले सप्ताह से ही धान की पौध की रोपनी का कार्य शुरु हो जाता है। लेकिन इस बार अभी तक मानसून नहीं आने चलते अधिकांश किसानों द्वारा रोपनी का कार्य शुरु नहीं किया गया है। हालांकि जिन किसानों के पास बोरवेल हैं उन्होंने बारिश होने की आस में महीने के पहले सप्ताह में ही पौध खेतों में लगा दी। अंचल में करीब 7 हजार हेक्टेयर में रोपनी का कार्य हो चुका है। लेकिन अब बारिश नहीं होने से फसल में सिंचाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में किसान बोरवेल से ही पानी लगाने में लगे हैं, लेकिन इसके लिए बिजली पर्याप्त नहीं मिल पा रही है।

\ग्रामीण क्षेत्रों में बमुश्किल पांच से छह घंटे ही बिजली मिल पा रही है, जिससे बोरवेल नहीं चल पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि बिजली कंपनी के अधिकारियों द्वारा यदि बिजली ही पर्याप्त दे दी जाए तो जितनी पौध लगाई है उसे सूखने से बचाया जा सकता है। कई किसानों की नर्सरी की पौध अब 25 से 30 दिन की हो चुकी है। ऐसे में अब किसान दोबारा से नर्सरी तैयार करने में लगे हैं। क्योंकि पौध बड़ी होने पर फसल की पैदावार पर असर पड़ता है । पैदावार में प्रति हेक्टेयर 4 से 5 क्विंटल की गिरावट आ सकती है। सहायक ग्राम विस्तार अधिकारी पीएस राजपूत कहते हैं कि तेज धूप और तापमान में वृद्धि के कारण खेतों में लगाई गई पौध को पानी की जरुरत है। इसलिए रोज पानी लगाएं।

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